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इस किसान की जैविक खेती का अमेरिका भी है दीवाना, 52 तरह के प्रोडक्ट कर रहे एक्सपोर्ट, जानें सफलता की कहानी

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पाली. जैविक किसान लालाराम डूडी को भला कौन नहीं जानता. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पहले ऐसे किसान हैं, जिनके मसाले राजस्थान या देश की मंडियों में नहीं बल्कि अमेरिका में सप्लाई होती है. इनकी जैविक किसानी से देश ही नहीं बल्कि विदेश में बैठे लोग भी मुरिद हैं. यही वजह है कि किसान 52 तरह के अलग-अलग जैविक प्रोडक्ट कई देशों में सप्लाई कर रहे हैं. साथ ही जैविक खेती कर रहे कई किसानों को भी विदेशी सप्लायर से जोड़ने का काम किया है.

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किसान अपनी उपज का दाम खुद ही खरीदार से तय करते हैं. किसानों को किसी तरह का ना तो कोई कमीशन देना पड़ता है और ना ही बिचौलियों की झंझट रहती है. हर साल 30 हजार टन जीरा और धनिया अमेरिका सप्लाई हो रही है.

अमेरिका में करते हैं मसाले की सीधी सप्लाई 

किसान लालाराम डूडी जीरा, धनिया और मेथी की जैविक खेती करते हैं, लेकिन उसे राजस्थान या देश की मंडियों में नहीं बेचते. इनके सारे मसाले सीधे अमेरिका सप्लाई होती है. किसान बताते हैं कि रबी सीजन में जीरा, धनिया, मेथी जैविक तरीके से खेतों में उगाते हैं. इन फसलों का भाव भारत में जीरा की सबसे बड़ी मंडी ऊंझा से करीब चार हजार रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा मिलती है. जीर और धनिया की जैविक फसल से पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, जालोर जिलों के करीब एक हजार किसानों को जोड़ा हुआ है.

30 हजार टन मसाले की करते हैं सप्लाई

किसान लालराम टूडी बताते हैं कि जिन किसानों को विदेशी सप्लायर से जोड़ा गया है, उनसे किसी भी तरह का कोई कमीशन नहीं लिया जाता. वे किसान अपनी उपज का दाम खुद ही खरीदार से तय करते हैं. किसान के खेत से ही माल उठा लिया जाता है. इस तरह हर साल 20-30 हजार टन जीरा और धनिया अमेरिका में सप्लाई हो रही है. सबसे अच्छी बात यह है कि खरीदार पहले माल का पैसा देते हैं. उसके बाद किसान बाद सप्लाई करते हैं.

52 तरह के जैविक प्रोडक्ट कर रहे तैयार

किसान ने बताया कि मोटे अनाज की खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं. बाजरे की फसल के जैविक उत्पाद तैयार कर देश-विदेश में लगने वाले प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर बिक्री करते हैं. महिलाएं, बाजरे से निर्मित बिस्किट, ली कुरकुरे, लड्डू, केक, मठड़ी, चॉकलेट, पकोड़ा तथा आंवला के जूस, मुरब्बा, केन्डी, निम्बू के जूस, बिना तेल का अचार सहित कई उत्पाद तैयार करती हैं. महिलाओं की आय दोगुनी करने के लिए महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें रोजगार भी मुहैया करवा रहे है. किसान डूडी के नेतृत्व में महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर रोजगार पा रही है.

1998 से करते आ रहे हैं जैविक खेती

बता दें कि किसान रामलाल डूडी 1998 से जैविक खेती कर रहे हैं. इनकी 8.13 हेक्टेयर भूमि राज्य जैविक प्रमाणीकरण की ओर से पंजीकृत है. जैविक विशेषज्ञ हर साल ऑडिट कर रिपोर्ट देते हैं. यहां रबी फसलों में गेहूं, चना, सरसों, मेथी, जीरा, धनिया तथा खरीफ में बाजरा, मूंग, मोठ, तिलहन की फसल होती है. खेत में उगाया जैविक जीरा और मेथी अमेरिका भेजी जाती है. जीरा तेल और मेथी का उपयोग औषधि बनाने में भी किया जा रहा है.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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