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The story of a soldier’s wife made my eyes moist | फौजी की पत्नी की स्टोरी ने कर दी आंखें नम: एक ही दिन बेटे और पति का अंतिम संस्कार; बालाघाट में ‘लकीरें’ का मंचन – Balaghat (Madhya Pradesh) News

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बालाघाट में नूतन कला निकेतन के नाट्य महोत्सव में सोमवार को ऐसी कहानी पेश की गई, जिसने लोगों की आंखें नम कर दीं। बैतूल के आरंभ थियेटर के कलाकारों ने निर्देशक सोनू कुशवाह के नाटक ‘लकीरें’ का मंचन किया।

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नाटक में दिखाया गया कि कैसे जमीन पर खींची गई लकीरें सरहदें बन जाती हैं। रिश्तों में खींची गई लकीरें दीवार खड़ी कर देती हैं। कहानी एक फौजी रतन और उसकी पत्नी पूजा की है। जहां रतन सरहद पर कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा होता है। वहीं, पूजा घर पर चुनौतियों से जूझ रही होती है।

कहानी का दर्दनाक मोड़ तब आता है, जब एक ही दिन पूजा के जीवन में दो बड़ी त्रासदी घटती हैं। जिस दिन उसके बेटे की मृत्यु होती है, उसी दिन फौज के लोग उसके पति का शहीद हुआ शव लेकर आते हैं। समाज के रूढ़िवादी नियमों और परिवार के विरोध के बावजूद, वह अकेले ही अपने पति और बेटे का अंतिम संस्कार करती है।

नाटक को बैतूल के आरंभ थिएटर के कलाकारों ने किया।

नाटक को बैतूल के आरंभ थिएटर के कलाकारों ने किया।

नाटक में पत्नी के त्याग और प्रेम की भावना को दर्शाया गया। यह भी दिखाया गया कि कैसे एक पत्नी अपने सुहाग की जिम्मेदारियां निभाती है। पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है। कलाकारों के सजीव अभिनय ने इस भावपूर्ण कहानी को और भी प्रभावशाली बना दिया।

निर्देशक सोनू कुशवाह के नाटक 'लकीरें' का मंचन किया गया।

निर्देशक सोनू कुशवाह के नाटक ‘लकीरें’ का मंचन किया गया।

नाट्य महोत्सव में भूपेंद्र मालवी और अक्षय मालवी के सेट पर कलाकार कारण धाड़से, विष्णु धुर्वे, विक्रम पहाड़े, दिशा राठौर, प्रतिभा कसदेकर, नंदिनी मोहब्बे, ऋतिशा खड़से, माधुरी और समीर वाडिवा ने अपने-अपने पात्र को जीवंत कर दिया।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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