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आगर मालवा में चल रहे चार दिवसीय 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को शांतिकुंज हरिद्वार से आए आचार्य सूरत सिंह अमृते ने प्रवचन दिए। आचार्य ने कहा कि गृहस्थ धर्म से ही इंजीनियर, डॉक्टर और साधु-संत जैसी प्रतिभाएं निकलती हैं। उन्होंने वर्तमा
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आचार्य ने बताया कि आजकल घर टूट रहे हैं। बच्चे माता-पिता की बात नहीं मान रहे। अभिभावक बच्चों को शिक्षा तो दे रहे हैं। लेकिन संस्कार देने में पीछे रह गए हैं। उन्होंने एक पौराणिक कथा का जिक्र किया। एक मां की छोटी सी गलती से उनका बेटा चक्रव्यूह में फंसकर मारा गया। आज भी ऐसी गलतियां दोहराई जा रही हैं।

24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ पहुंचे श्रद्धालु।
आचार्य ने कहा कि आज अधिकतर घरों में माता-पिता दुखी हैं। बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेजा जा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि माता-पिता ने बच्चों को धन तो दिया, संस्कार नहीं दिए। ऋषियों द्वारा बताए गए 16 संस्कारों का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि संस्कार विहीन समाज बिना नींव के मकान जैसा है। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण से हुआ।
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