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There is no staff to treat patients in the emergency department, the false ceiling of the OT is broken, yet 169 operations are being reported | वेंटीलेटर पर इमरजेंसी सुविधा: विभाग में इलाज करने स्टाफ नहीं, ओटी की फॉल सीलिंग उखड़ी, फिर भी 169 ऑपरेशन बता रहे – Sagar News

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बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी विभाग में व्यवस्थाएं वेंटीलेटर पर हैं। विभाग में पदस्थ गिनती के अधिकारियों को बैठने तक के लिए जगह नहीं है। इस विभाग में कागजी घोड़े दौड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। प्रबंधन विभाग में 20 की जगह 30 पलंग होना बता

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एक मेजर ओटी की फॉल सीलिंग उखड़ी पड़ी है और दूसरी में सर्जरी करने के लिए स्टाफ नहीं है फिर भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन यहां अब तक कुल 169 और जनवरी माह में 6 मरीजों की मेजर सर्जरी करने का दावा कर रहा है। जबकि कैजुअल्टी के अलावा विभाग की मेजर ओटी के बाहर कभी न तो मरीज और न उनके परिजन नजर आए हैं।

कैजुअल्टी में आने वाले मरीजों को गोल्डन ऑवर में विशेषज्ञ डॉक्टर मुहैया कराने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने इमरजेंसी मेडिसिन विभाग शुरू करने की अनिवार्यता कर दी थी। लिहाजा यह विभाग बीएमसी कैजुअल्टी के पास शुरू किया गया। विभाग में मेजर ऑपरेशन थिएटर, सर्जरी के बाद मरीज भर्ती करने के लिए मेल-फीमेल रिकवरी रूम तथा आईसीयू वार्ड तो बनाए गए हैं। लेकिन इनमें व्यवस्थाएं ऐसी हैं कि यहां मरीजों को भर्ती किया जाना संभव नहीं है। विभाग के पास पर्याप्त नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं है।

तीन साल से निकाल रहे एसआर-जेआर की भर्ती

डॉ. गजभिए व डॉ. जैन के अनुसार विभाग में 9 सीनियर रेसीडेंट (एसआर) और 9 जूनियर रेसीडेंट (जेआर) के पद स्वीकृत हैं। लेकिन केवल एक ही एसआर की भर्ती हो सकी है। विभाग द्वारा तीन साल से इन पदों पर हर हफ्ते भर्ती निकाली जा रही है लेकिन किसी ने ज्वाइन नहीं किया है। इसलिए पद खाली पड़े हैं।

विभाग में नर्स के नाम पर सिर्फ एक कर्मचारी है। बाकी पदों पर नई भर्ती नहीं हो पा रही है। ऐसे में सर्जरी जैसी गंभीर प्रक्रिया कैसे की जा सकती है। ओटी की फॉल सीलिंग सालों से उखड़ी है। यह ओटी माइनर सर्जरी करने लायक नहीं है। मरीज को संक्रमण फैलने का खतरा है। दूसरी ओटी में कुछ समय पहले सुधार कराया गया है। इसमें थोड़ा-बहुत काम हो रहा है।

मेजर ओटी में ही बैठना पड़ रहा

विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विशाल गजभिए, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ जैन के अनुसार ओटी में ही विभाग के अधिकारियों को बैठना पड़ रहा है। यहां दवा तथा अन्य उपकरण रखे गए हैं। इसीलिए इसे ओपीडी के बाद तालाबंद करना पड़ रहा है। इसके अलावा विभाग में सिर्फ 3 फैकल्टी है। वर्तमान में 1 सीनियर रेसीडेंट और 1 पीजी डॉक्टर उपलब्ध है। फिलहाल इतने स्टाफ से बेहतर काम लिया जा रहा है।

20 सीएमओ के पद लेकिन उपलब्ध सिर्फ सात ही

कैजुअल्टी में सीएमओ के 20 पद स्वीकृत हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ 7 ही उपलब्ध हैं। दो अन्य विभागों में अटैच हैं। कुछ पीजी करने के लिए अवकाश पर हैं। करीब 7 पद खाली पड़े हैं। 7 सीएमओ और 4 जूनियर रेसीडेंट डॉक्टरों के सहारे कैजुअल्टी विभाग का संचालन किया जा रहा है।

बीएमसी डीन के पास इन सवालों के जवाब नहीं

  • विभाग में जो पद खाली हैं उन पर भर्ती क्यों नहीं हो पा रही है?
  • विभाग की मेजर ओटी की फॉल सीलिंग सालों से उखड़ी पड़ी है। इसे अब तक सुधरवाया क्यों नहीं गया?
  • कैजुअल्टी विभाग के जिस वार्ड में 20 पलंग हैं वहां 30 क्यों बताए जा रहे हैं?
  • ग्रीन कैटेगरी के पलंग कहां लगाए गए हैं?
  • इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों के मार्गदर्शन में सर्जरी किसने की है?

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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