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पैसे उधार लेकर समोसे बेचने शुरू किए, आज समोसे लेने के लिए पहले करनी होती है बुकिंग, ढाई रुपयों में बचें चाय और समोसे!

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Agency:News18 Rajasthan

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Jhunjhunu News : छावसरी गांव के रहने वाले सुभाष 2003 से समोसा बनाने का काम कर रहे हैं शुरुआत में उन्होंने किसी हलवाई के यहां पर मजदूरी करना शुरू किया. कुछ समय पश्चात उन्होंने अपनी खुद की एक छोटी सी दुकान शुरू क…और पढ़ें

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पैसे उधार लेकर समोसे बेचने शुरू किए, आज समोसे लेने के लिए पहले करनी होती है बुकि

हाइलाइट्स

  • सुभाष 2003 से समोसा बनाने का काम कर रहे हैं.
  • सुभाष के समोसे बिना चटनी के भी पसंद किए जाते हैं.
  • सुभाष रोजाना 100-150 समोसे बेचते हैं.

झुंझुनूं : झुंझुनूं के गुढ़ा गौरजी कस्बे के छावसरी गांव में पिछले 20 साल से यह दुकान अपना स्वाद बिखेर रही है. गांव वालों की सबसे बड़ी खास बात यह है कि बहुत सी दुकान होने के बाद भी इन्हीं के स्वाद को लोग काफी पसंद करते हैं. जहां पहले कभी घर खर्च चलाने के लिए समोसा बनाना सीखा. वही आज इनका समोसा लोगों की पहली पसंद बन चुका है.

छावसरी गांव के रहने वाले सुभाष 2003 से समोसा बनाने का काम कर रहे हैं. शुरुआत में उन्होंने किसी हलवाई के यहां पर मजदूरी करना शुरू किया. कुछ समय पश्चात उन्होंने अपनी खुद की एक छोटी सी दुकान शुरू की तभी से उनके द्वारा वहीं पर आज भी समोसे बनाकर दिए जा रहे हैं. सुभाष ने बताया कि वे सुबह 7:00 अपनी दुकान पर आते हैं. वह 12:00 तक लोगों को समोसा बनाकर खिलाते हैं. उन्होंने बताया कि वह हमेशा ताजा समोसे लोगों को खाने के लिए देते हैं. हर दिन आलू को उबालकर उसका मसाला तैयार किया जाता है. वह उसमें अच्छी क्वालिटी का मसाला डाला जाता है. उन्होंने बताया कि ताज होने के कारण उनके समोसों से कभी पेट खराब नहीं होता.

सुभाष ने जानकारी देते हुए बताया कि जब उन्होंने अपनी दुकान की थी तब ₹1000 लोगों से उधार लिए थे. वह ₹1000 चाय वह समोसे बनकर ही लोगों को वापस दिए. शुरुआत में उन्होंने ढाई रुपए में अपने समोसे बेचने शुरू किए थे जो कि आज ₹15 में समोसा बेचा जा रहा है. एक और खास बात अपने समोसे की उन्होंने बताई कि आज तक उनके द्वारा चटनी के साथ में समोसे कभी नहीं बने उनके समोसे बिना चटनी के भी लोगों को काफी पसंद आते हैं. उन्होंने बताया कि समोसे बनाने के दौरान आलू का मसाला जब तैयार किया जाता है उसमें कस्तूरी मेंथी, साबुत धनिया, हल्दी, मिर्च, हरी मिर्च अच्छी क्वालिटी की काम में ली जाती है. इसके अलावा कुछ भी विशेष उनके द्वारा नहीं किया जाता. बस लोगों के आशीर्वाद की वजह से आज अच्छा खासा उनका काम चल रहा है. आज भी दिन की सौ से डेढ़ सौ तक समोसे एक दिन में बेच देते हैं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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