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Explainer: नामीबिया में क्यों खाया जा रहा है हाथी, जेब्रा समेत हर जानवर का मांस, क्यों पड़े अनाज के लाले, मदद क्यों नदारद

Namibia People Struggling with Food Insecurity: नामीबिया में अकाल के कारण हालात बद से बदतर हो चुके हैं. इस अफ्रीकी देश में पिछले सौ सालों का सबसे बड़ा सूखा पड़ा है. स्थिति देखते हुए मई में ही देश में इमरजेंसी का ऐलान कर दिया गया था. नामीबिया की लगभग आधी आबादी यानी 14 लाख लोगों को खाने-पीने की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लोग भूख-प्‍यास से तड़प रहे हैं. अनाज के गोदाम खाली हो चुके हैं. कोई उम्मीद नहीं बची है. बेबस सरकार ने लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की योजना के तहत हाथियों सहित सैकड़ों जानवरों को मारने की मंजूरी दी है. 

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि सूखे के कारण नामीबिया में अनाज उत्पादन में 53 फीसदी की गिरावट आयी है. यही नहीं, देश को पानी की भी भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. बांध के जल स्तर में लगभग 70 फीसदी की कमी आई है. नामीबिया में भीषण सूखा पड़ने की वजह अल नीनो है. यह एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब घटित होती है जब प्रशांत महासागर की सतह का तापमान औसत से अधिक गर्म हो जाता है. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन अल नीनो को बढ़ा सकता है, जिससे तापमान बढ़ने के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं. जाहिर है कि इससे समस्या और बढेगी.

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723 जानवरों को मारा जाएगा
देश के पर्यावरण, वानिकी और पर्यटन मंत्रालय ने गुजरे सोमवार को घोषणा की कि मारे गए 723 जानवरों का मांस सूखा राहत कार्यक्रम के हिस्से के रूप में वितरित किया जाएगा. मंत्रालय ने कहा, “यह अभ्यास आवश्यक है और हमारे संवैधानिक आदेश के अनुरूप है जहां हमारे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नामीबियाई नागरिकों के लाभ के लिए किया जाता है.” योजना 30 हिप्पो, 60 भैंसों, 50 इम्पाला, 100 ब्लू वाइल्डबीस्ट, 300 जेब्रा, 83 हाथी और 100 एलैंड्स को मारने की है. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह लोगों के लिए मांस उपलब्ध होगा. साथ ही जंगली जानवरों के संरक्षण पर सूखे के नकारात्मक प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा. क्योंकि ये जानवर सूखे के कारण चरागाह वाले इलाकों और पानी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. 

मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा
बढ़ता तापमान और बारिश का कभी होना, कभी न होना नामीबिया में प्राकृतिक संसाधनों के लिए दो सबसे बड़े खतरे हैं. अगर जंगली जानवरों को संसाधन कम मिले तो वे मानव बस्तियों में प्रवेश कर सकते हैं. नामीबिया ने जानवरों को मारने की योजना के बारे में कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के तरीके के रूप में हाथियों की संख्या कम करने की जरूरत है. अधिकारियों ने कहा, “देश में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए अगर कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया तो संघर्ष बढ़ने की आशंका है.” ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों ने पहले ही जानवरों को मारने की अनुमति दे रखी है. ऑस्ट्रेलिया ने पिछले कुछ सालों में हजारों कंगारुओं को मारने को मंजूरी दी थी. क्योंकि वन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि कंगारुओं की बड़ी आबादी को खिलाने के लिए देश में पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं है. 

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आख‍िर क्या होती है कलिंग?
जानवरों को इस तरह मारने को कल‍िंंग कहा जाता है. नामीबिया के पर्यावरण और वानिकी मंत्रालय के मुताबिक, जो जानवर कमजोर हैं, उन्‍हें मारने के ल‍िए चुना जाएगा. इसके ल‍िए पेशेवर श‍िकारी लगाए गए हैं. कुछ कंपन‍ियों को ठेका दिया गया है. अब तक 157 जानवरों का श‍िकार क‍िया जा चुका है. इनसे 56,800 किलो से अधिक मांस सरकार को मिला है. जिसे लोगों में बांटा जा रहा है. बता दें क‍ि पांच अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे, जाम्बिया, बोत्सवाना, अंगोला और नामीबिया में दो लाख से ज्‍यादा हाथी रहते हैं. यहां हाथ‍ियों की सबसे घनी आबादी है. इस वजह से इनमें संघर्ष भी होता है. सूखे की वजह से पिछले साल 300 से ज्‍यादा हाथी मर गए थे.

क्यों हुए इस तरह के हालात
नामीबिया की आबादी लगभग 23 लाख है. इस देश ने बार-बार बाढ़ और सूखे का सामना किया है. इसके अलावा यहां कई तरह की बीमारियों ने भी अपना प्रकोप दिखाया है. कोविड-19 महामारी को गुजरे हुए भी ज्यादा समय नहीं हुआ है. इन सबका खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर गहरा प्रभाव पड़ा है. 2017 में यहां गरीबी दर 17.4 फीसदी थी. आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी पूरी या आंशिक आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है. 40 फीसदी छोटे किसान हैं जो मुख्य रूप से अपने उपभोग के लिए अनाज उगाते हैं. फसल की स्थिति आम तौर पर खराब होती है. अनियमित बारिश और बार-बार बाढ़ और सूखे के कारण हालात और बुरे हो गए हैं. इसीलिए नामीबिया की ज्यादा निर्भरता खाद्य सामग्री के इंपोर्ट पर है. 

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डब्ल्यूएफपी देता है तकनीकी सहायता
नामीबिया में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) का ध्यान खाद्य सहायता से हटकर सरकार को तकनीकी सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य स्कूली भोजन और राहत कार्यों जैसे खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में सुधार करके भूख को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना और खाद्य सुरक्षा जरूरतों का आकलन और योजना के लिए सरकार की क्षमता को बढ़ाना है. नामीबिया में स्कूल का भोजन देश के खाद्य सुरक्षा जाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. डब्ल्यूएफपी स्कूल भोजन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने में शिक्षा मंत्रालय का समर्थन करता है. इसके अलावा डब्ल्यूएफपी नामीबिया की खाद्य और पोषण सुरक्षा निगरानी प्रणाली को चलाने में मदद करती है. वो परिवारों की भोजन खपत, उनकी आय और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए उनके द्वारा विकसित की गई रणनीतियों के बारे में जानकारी एकत्र करती है. इस डेटा का इस्तेमाल वो अपने कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए करती है.

Tags: Baby Elephant, Food Insecurity, Shocking news, South africa


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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