रावत बर्तन कारोबारियों पर 3 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप जीएसटी छापे में टीम ने पकड़ी चोरी, प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी

छतरपुर। शहर के प्रतिष्ठित बर्तन व्यापारी रावत बर्तन भण्डार से जुड़ीं 8 फर्मों पर पिछले 8 दिन से चल रही जीएसटी की छापेमारी में लगभग 3 करोड़ रूपए की टैक्स चोरी सामने आयी है। यह जानकारी जीएसटी छापे की टीम का नेतृत्व कर रहे सतना एंटी इवेजन के संयुक्त कमिश्नर गणेश कावरकर ने मंगलवार को शहर के एक होटल में प्रेसवार्ता करते हुए दी। यह पहला मौका है जब जीएसटी छापे के बाद कर चोरी से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए जीएसटी की टीम को प्रेस कांफ्रेंस बुलानी पड़ी।
श्री कावरकर ने कहा कि पिछले 15 दिसम्बर को वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर एक 40 सदस्यीय टीम ने छतरपुर के बर्तन कारोबारी हरिश्चन्द्र रावत की मां बघराजन मेटल, विनोद कुमार रावत की वरूण इंटरप्राइजेज, भारती रावत की अवनी इंटरप्राइजेज, पंकज रावत के रावत बर्तन भण्डार, रोहित रावत के हजारी लाल नारायण दास फर्म, मनोज रावत के हजारी लाल लक्ष्मी प्रसाद रावत फर्म, प्रमोद रावत की एसआर इंटरप्राइजेज, कृष्ण कुमार रावत की जय भवानी इंटरप्राइजेज पर छापामार कार्यवाही की थी। इस परिवार की 4 मैनुफैक्चरिंग फर्मों एवं 4 ट्रेडिंग फर्मों पर यह कार्यवाही की गई थी। कार्यवाही के दौरान बड़े पैमाने पर कर चोरी पकड़ी गई है। इस कार्यवाही में 8 दिन इसलिए लगे क्योंकि व्यापारी परिवार सहयोग नहीं कर रहा था और माल का स्टॉक मिलाने में अधिक समय देना पड़ा। उन्होंने कहा कि विगत रोज हरिश्चन्द्र रावत और उनके भाईयों ने छापामार दस्ते पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। इस मामले में भी वरिष्ठ कार्यालय को वीडियो सहित साक्ष्य भेजे गए हैं। उक्त कार्यवाही में व्यवधान पैदा करने पर भी कार्यवाही की जा सकती है। उधर मंगलवार को भी यह छापामार कार्यवाही जारी रही।
कहां कितनी चोरी पकड़ी
सतना की एंटी इवेजन ब्यूरो के ज्वाइंट कमिश्नर गणेश कावरकर ने बताया कि मां बघराजन मेटल के प्रोपराइटर हरिश्चन्द्र रावत के द्वारा पीतल स्क्रेप से बर्तन बनाने की इंडस्ट्री संचालित की जाती है। यहां अत्यधिक मात्रा में स्क्रेप स्टॉक होने से एवं व्यवसायी द्वारा सहयेाग न करने के कारण अधिक समय लग गया। उन्होंने बताया कि इनका काफी स्क्रेप लेखा पुस्तकों में दर्ज ही नहीं पाया गया और न ही इसकी खरीदी से जुड़े प्रमाण मिले। इसी तरह विनोद कुमार रावत के द्वारा वरूण इंटरप्राइजेज फर्म के माध्यम से स्टील की टंकी का निर्माण किया जाता है। यहां अनाज के वेयर हाउस में अतिरिक्त स्टॉक पाया गया है जो लेखा पुस्तक में दर्ज नहीं है। इनका 6 हजार किलो अधिक स्टॉक पाया गया है। इसी तरह भारती रावत की फर्म अवनी इंटरप्राइजेज के पास बड़ी मात्रा में बर्तन का स्टॉक पाया गया जो कि लेखा पुस्तक में दर्ज ही नहीं है। पंकज रावत की फर्म रावत बर्तन भण्डार में बिना विक्रय बिल के माल बेचा जाना पाया गया है। रोहित रावत के द्वारा स्टील, पीतल एवं तांबे के बर्तनों का थोक विक्रय किया जाता है। इनके पास 13 लाख के माल का लेखा पुस्तकों से अधिक पाया गया। इसी तरह बिना विक्रय बिलों के विक्रय भी किया जाना पाया गया है। मनोज कुमार रावत की फर्म में बर्तनों की ट्रेडिंग का व्यवसाय किया जाता है। व्यवसायी की दुकान, गोदाम में कुल लगभग 31 लाख रूपए की राशि के बर्तनों का लेखा पुस्तकों में अधिक पाया गया। प्रमोद कुमार रावत की एसआर इंटरप्राइजेज में भी व्यवसाय स्थल एवं अन्य दो गोदामों में भौतिक स्टॉक को सूचित कर लिया गया है लेकिन इसका मूल्यांकन अभी किया नहीं जा सका। वहीं कृष्ण कुमार रावत की जय भवानी इंटरप्राइजेज में लेखा पुस्तकों से लगभग 51 टन कच्चा माल कम एवं 16 टन निर्मित माल अधिक पाया गया है जिसको व्यवसायी द्वारा स्वीकार कर चालान के माध्यम से 51.64 लाख रूपए की राशि भी जमा करा दी गई।