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1800 trees of more than 50 species were counted | 50 से ज्यादा प्रजाति के 1800 पेड़ गिने: एमओजी लाइन के रहवासियों ने पकड़ा नगर निगम का झूठ, 40 नहीं, सैकड़ों पेड़ कटेंगे – Indore News

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एमओजी लाइन में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए काटे जा रहे पेड़ों के विरोध में आगे आए रहवासियों ने एक अनूठा काम किया। 10 दिन तक नौकरी-व्यवसाय से समय निकालकर पूरे क्षेत्र के एक-एक पेड़ की गिनती कर दी। यहां नगर निगम कटने वाले पेड़ों की संख्या 40 के करीब बता

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सूची में पेड़ के नाम के साथ उसकी मोटाई, ऊंचाई भी मापी है। हर पेड़ के साथ उसकी जानकारी में गणना करने वाले का पूरा ब्योरा है। सबकी वीडियोग्राफी भी की है। अभय जैन के मुताबिक, जब लोगों ने मिलकर कुछ ही दिन में सारे पेड़ गिन डाले तो निगम ऐसा पूरे शहर में क्यों नहीं करता। निगमायुक्त को पूरा ब्योरा देने के साथ उनसे कहा है कि पेड़ों की जानकारी ऑनलाइन कर दें, ताकि सबको पता रहे कि कहां कितने पेड़ हैं। यहां अधिकांश पेड़ 30 से 40 फीट ऊंचे हैं तो 70 फीट ऊंचाई वाले पेड़ भी मौजूद हैं। तनों की मोटाई 10 इंच से लेकर 120 इंच तक है।

पीपल, शीशम, गुलमोहर, इमली, बबूल जैसी प्रजाति के पेड़ हैं एमओजी लाइन में
रहवासियों ने यहां 50 से ज्यादा प्रजाति के पेड़ चिह्नित किए। इनमें बरगद, पीपल, शीशम, गुलमोहर, इमली, बबूल, आम, चंदन, नीम, यूकेलिप्टस, सीताफल, गोंद, जाम, बिलपत्र, चम्पा, कनेर, नीलगिरि, सहजन, विलायती इमली, जामुन, गूलर, अशोक, परिजात, अनार, बादाम, कचनार, सेमल, सप्तसारणी, गुडहल, आंवला, कनेर, मेहंदी आदि शामिल हैं।

कुछ पेड़ तो ऐसे हैं, जिनके नाम रहवासी नहीं पहचान सके। उनके लिए विशेषज्ञों की मदद ली। सुदामा नगर में भी कटेंगे पेड़ : एमओजी लाइन से शुरू हुआ पेड़ बचाओ आंदोलन मल्हार आश्रम तक पहुंच गया है। वहां पेड़ कटाई के विरोध में 30 को लोग विरोध प्रदर्शन करेंगे। जैन बताते हैं कि सुदामा नगर लिंक रोड और पीपल्याकुमार में भी अलग-अलग प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने की तैयारी है। सुदामा नगर में करीब 200 और पीपल्याकुमार में 100 पेड़ हैं। उनकी भी सूची तैयार कर रहे हैं।

एक पेड़ 15 लाख से ज्यादा की पर्यावरणीय सेवा भी करता है
पेड़ हरियाली और सुंदरता के लिए ही नहीं होता है। यह अपने 50 साल के जीवन काल में 15 लाख से ज्यादा की पर्यावरणीय सेवा भी करता है। इसकी गणना कोलकाता विवि के प्रोफेसर तारकमोहन दास ने सैद्धांतिक रूप से की थी। वर्तमान में पेड़ की प्रजाति, क्षमता के अनुसार इसमें जोड़ेंगे तो यह सेवा 25 से 30 फीसदी अधिक होगी। आम, नीम, जामुन, पाम आदि की कीमत भी अलग-अलग होगी।

  • प्राणवायु ऑक्सीजन 2.5 लाख रुपए
  • मिट्टी की रोकथाम और उपजाऊ बनाने की 2.5 लाख रुपए
  • तापमान नियंत्रण और जलचक्रण 5.0 लाख रुपए
  • वायु व शोर प्रदूषण व अन्य उत्पाद 5.0 लाख रुपए हाल ही में कोलकाता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक पेड़ द्वारा सालाना 74 हजार रुपए का लाभ देने की गणना भी प्रस्तुत की गई है।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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