छतरपुर के मोरवा गांव की शांत फिजाओं में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब धूल उड़ाती एक बोलेरो सड़क निर्माण कंपनी (MKC) के दफ्तर के बाहर रुकी और पलक झपकते ही एक सुपरवाइजर की जिंदगी दांव पर लग गई। तीन अज्ञात बदमाशों ने सुपरवाइजर राम खिलाड़ी शर्मा के साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उन्हें जबरन गाड़ी में ठूंसकर सटई के घने जंगलों की ओर ले उड़े। यह अपहरण केवल एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि कानून व्यवस्था को दी गई एक सीधी चुनौती थी, जिसकी गूंज 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग के साथ और गहरी हो गई।
जैसे ही इस खौफनाक वारदात की खबर पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा तक पहुंची, पूरे जिले की पुलिस हरकत में आ गई। एसपी के कुशल निर्देशन में तीन थानों की विशेष टीमों ने रात के अंधेरे में सटई के उन जंगलों को घेरना शुरू किया, जहाँ परिंदा भी पर मारने से हिचकता है। एक तरफ घबराए परिजन बदमाशों के खौफ में आकर खाते में फिरौती की रकम जमा कर रहे थे, तो दूसरी तरफ पुलिस की सायबर टीम ने तत्परता दिखाते हुए उस बैंक खाते को ‘होल्ड’ कर अपराधियों की आर्थिक जड़ों पर प्रहार कर दिया।
जंगल की पगडंडियों पर जब खाकी की धमक तेज हुई और पुलिस की घेराबंदी का दायरा सिमटने लगा, तो बदमाशों के हौसले पस्त हो गए। मौत और सलाखों का डर उन पर इस कदर हावी हुआ कि वे शिकार को बीच रास्ते में ही छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए। पुलिस ने राम खिलाड़ी शर्मा को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस पूरी कार्रवाई ने न केवल एक बेगुनाह की जान बचाई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वर्दी की सतर्कता के आगे अपराधियों की हर साजिश नाकाम है। फिलहाल, एक संदेही पुलिस की गिरफ्त में है और सलाखों के पीछे बाकी गुनहगारों के पहुंचने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।










