छतरपुर/लवकुशनगर। शासन एक ओर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर लवकुशनगर स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी बालक स्कूल के जिम्मेदार अधिकारी इन दावों की हवा निकाल रहे हैं। शनिवार को संकुल केंद्र पर अतिथि शिक्षक पंजीयन वेरिफिकेशन कराने पहुंचे अभ्यर्थियों को न केवल अव्यवस्था का सामना करना पड़ा, बल्कि संकुल प्राचार्य की कथित अभद्रता का भी शिकार होना पड़ा।
समय की बर्बादी और ऑपरेटर की मनमर्जी अतिथि शिक्षक पंजीयन वेरिफिकेशन की अंतिम तिथि 11 मई है। बीच में रविवार का अवकाश होने के कारण दूर-दराज से आए अभ्यर्थी सुबह से ही कतारों में लग गए थे। लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी कुर्सी पर नहीं पहुंचा। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब उन्होंने काम न होने और ऑपरेटर की अनुपस्थिति पर प्राचार्य यू.एस. भड़ेरिया से सवाल किया, तो जवाब में समाधान की जगह ‘धमकी’ और ‘गाली’ मिली।
“नहीं होना वेरिफिकेशन, यहाँ से भागो!” अभ्यर्थी राहुल विश्वकर्मा, पप्पू राठौर और संजना भुर्जी सहित दर्जनों युवाओं ने बताया कि दोपहर करीब 1 बजे जब उन्होंने प्राचार्य से ऑपरेटर के आने का समय पूछा, तो वे आगबबूला हो गए। आरोप है कि प्राचार्य ने मर्यादा की सीमा लांघते हुए कहा कि “नहीं होना है वेरिफिकेशन, जिसे जो करना है कर ले, यहाँ से भाग जाओ।” इतना ही नहीं, अभ्यर्थियों को धक्के मारकर बाहर निकालने की कोशिश भी की गई।
सवालों के घेरे में शिक्षा विभाग बेरोजगार युवाओं का कहना है कि वे आर्थिक तंगी और भीषण गर्मी के बीच किराए के पैसे खर्च कर वेरिफिकेशन कराने आए हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही उनके भविष्य पर पानी फेर रही है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी केंद्रों पर अधिकारियों को जनता से बदसलूकी करने का अधिकार मिल गया है? जिला शिक्षा अधिकारी को इस गंभीर मामले में संज्ञान लेकर तानाशाही रवैया अपनाने वाले प्राचार्य पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।










