छतरपुर। शासन जब स्वयं जनता के द्वार पहुँचता है, तो विकास की परिभाषा बदल जाती है। अलीपुरा में आयोजित रात्रि चौपाल इसका साक्षात प्रमाण बनी, जहाँ व्यवस्था और संवेदनशीलता का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षेत्रीय विधायक कामाख्या प्रताप सिंह और कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने रात के सन्नाटे को उम्मीदों की रोशनी से भर दिया।
फाइलों का मोहताज नहीं रहा हक
इस विशेष चौपाल की सार्थकता तब सिद्ध हुई जब पात्र हितग्राहियों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली। विधायक और कलेक्टर ने अपने हाथों से वृद्धावस्था पेंशन, संबल योजना की सहायता राशि और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के स्वीकृति पत्र मौके पर ही सौंपे। प्रमाण पत्र हाथ में आते ही बुजुर्गों और जरूरतमंदों के चेहरे मुस्कान से खिल उठे।
प्रशासनिक मुस्तैदी की मिसाल
जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया और एसडीएम सहित वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जिला प्रशासन अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित है। विधायक कामाख्या प्रताप सिंह ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल योजना बनाना नहीं, बल्कि उसे पात्र व्यक्ति के हाथ तक पहुँचाना है। चौपाल में मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन के इस “त्वरित न्याय” और आत्मीय व्यवहार की मुक्तकंठ से सराहना की।
कलेक्टर ने लंबित फौती नामांतरण तत्काल करने के निर्देश दिए
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने रात्रि चौपाल अलीपुरा में विगत दिनों में मृत हुए लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र एवं फौती नामांतरण होने की समीक्षा की और ग्रामीणों से भी जानकारी ली। इस दौरान बताया कि बद्दू खटीक की मृत्यु उपरांत 5 महीने से फौती नामांतरण नहीं करने पर टीला पटवारी विनय पटेल को मौके पर ही सस्पेंड करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी मृतकों के फौती चेक करने, बी 1 वाचन करने एवं लंबित होने पर निराकरण के निर्देश दिए। इसके अलावा 5 महीने से मृतकों के फौती नामांतरण नहीं करने पर अलीपुरा पटवारी जमना प्रसाद अनुरागी की एक इंक्रीमेंट रोकने के निर्देश दिए। इसके पश्चात 5 राशन पर्ची आवेदकों की मौके पर राशन पर्ची की स्वीकृति की। ग्राम चुरवारी के राशन पर्ची के आवेदक नंदलाल कुशवाहा, लक्ष्मण कुशवाहा, दयाराम कुशवाहा, हरिचंद्र पाल और दलपत कुशवाहा शामिल है। जिनकी राशन पर्ची स्वीकृत की गई।










