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Survey Report: दिल्‍लीवालों पर बड़ा संकट, लाखों लोगों की हालत खराब, सरकार से लेकर प्रशासन तक वादों में मस्‍त

नई दिल्ली. सर्दियों के मौसम को आमतौर पर सुकून और आराम वाला माना जाता है, लेकिन दिल्‍लीवालों के लिए जानलेवा बन जाती है. मानसून सीजन के जाते ही दिल्‍ली में लोगों को बस एक ही डर सताने लगता है. हवा की सेहत इस हद तक बिगड़ जाती है कि उसमें सांस लेना दूभर हो जाता है. एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (AQI) खतरनाक स्थिति तक पहुंच जाता है. हालात ऐसे बन जात हैं कि खुली हवा में सांस लेना भी दूभर हो जाता है. बुजुर्गों और बच्‍चों के लिए तो यह और भी खतरनाक हो जाता है. सर्वे रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है. दिल्‍ली के 36 फीसद परिवारों में कोई न कोई सदस्‍य प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से पीड़ित पाया गया है.

दिल्ली-NCR में खराब होती एयर क्‍वालिटी के बीच एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि 36 प्रतिशत परिवारों में एक या एक से अधिक सदस्य प्रदूषण से संबंधित बीमारियों से पीड़ि‍त हैं. ये लोग गले में खराश, खांसी और सांस लेने में समस्या से ग्रसित मिले हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘लोकल सर्कल्स’ की ओर से किए गए सर्वेक्षण में दिल्ली-एनसीआर के निवासियों की 21,000 से अधिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों पर वायु प्रदूषण के प्रभावों का खुलासा किया गया है.

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खराब हैं हालात
सर्वे रिपोर्ट बताती है कि 36 प्रतिशत परिवारों में एक या अधिक सदस्यों को प्रदूषण के कारण गले में खराश, खांसी और सांस लेने में समस्या है. 27 प्रतिशत परिवारों में एक या अधिक सदस्यों को नाक बहने और नाक बंद होने की परेशानी है. सर्वेक्षण के अनुसार, 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि खराब एयर क्‍वालिटी के कारण उन्हें किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या नहीं है. बता दें कि दिल्‍ली में वाहनों के साथ ही दिल्‍ली और आसपास के इलाकों में पराली जलाने की वजह से एयर पॉल्‍यूशन की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है.

क्‍या है सॉल्‍यूशन?
सर्वेक्षण में दिल्‍ली के लोगों से एयर पॉल्‍यूशन की वजह से होने वाली बीमारियों से बचने के उपायों को लेकर भी सवाल पूछा गया. सर्वे में हिस्‍सा लेने वालों में से 18 प्रतिशत ने बताया कि वह प्रदूषण के प्रभावों से बचने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना चाहते हैं. दूसरी तरफ, ज्यादातर लोग इम्‍यून बढ़ाने वाले खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘लगभग 22 प्रतिशत लोग दिवाली के आसपास प्रदूषण के चरम पर पहुंचने के बाद होने वाली परेशानियों से बचने के लिए कुछ दिन के लिए शहर से बाहर जाने पर विचार कर रहे हैं.’

Tags: Delhi AQI, Delhi news, Delhi pollution


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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