पिता चाहते थे बेटा बने बड़ा डाक्टर, लेकिन हादसे ने बेटे को बना दिया फेमस पशु चिकित्सक, 19 साल से पशुओं की कर रहे सेवा

Agency:News18 Uttar Pradesh
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Success Story: यूपी के रायबरेली के पशु चिकित्सक डॉक्टर इंद्रजीत वर्मा 2006 से पशुओं की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता जा चाहते थे कि वह एक बड़े डाक्टर बनें, लेकिन उनकी गाय की मौत ने उन्हें झकझोर द…और पढ़ें
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा
हाइलाइट्स
- डॉ इंद्रजीत वर्मा 2006 से पशुओं की सेवा कर रहे हैं.
- गाय की मौत ने डॉ इंद्रजीत को पशु चिकित्सक बनने को प्रेरित किया.
- पशुओं की सेवा से डॉ इंद्रजीत को खुशी मिलती है.
रायबरेली: जिंदगी कभी-कभी इंसान को उन हालात के मुकाबिल कर देती है, जिनका सामना करने के लिए वह तैयार नहीं होता है. ऐसे हादसे परेशान तो करते हैं, लेकिन दुनिया में जीने के आदाब और जीतने के तरीके भी सिखा जाते हैं. ये पंक्तियां रायबरेली जिले के कस्बा शिवगढ़ स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ इंद्रजीत वर्मा पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं.
डॉ इंद्रजीत वर्मा के जीवन में घटित एक घटना ने उन्हें पशु चिकित्सक बनने की ओर अग्रसारित कर दिया. दरअसल, डॉक्टर इंद्रजीत वर्मा मूल रूप से जौनपुर जिले के मड़ीयाहू तहसील क्षेत्र के सादुल्लापुर गांव के रहने वाले हैं. उनके मुताबिक उनके पिता दूधनाथ वर्मा पेशे से किसान थे. उनके घर में पशुपालन का भी काम होता था, जिससे उनका जुड़ाव शुरुआत से ही पशुओं के प्रति ज्यादा था.
गाय की मौत ने झकझोर दिया
डॉ इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि वह पढ़ाई के साथ-साथ पशुओं की देखभाल करते थे. वहीं, एक दिन अचानक उनकी गाय बीमार पड़ी. तो उन्हें उसके इलाज के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. फिर भी उस गाय की मौत हो गई. इस घटना ने उनके मन को द्रवित कर दिया. वहीं से उन्होंने मन ही मन पशु चिकित्सक बनने की ठान ली. जबकि उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा पढ़ लिखकर जनरल फिजिशियन यानी कि (MBBS डॉक्टर) बने. परंतु उनके घर में हुई उनकी गाय के मौत ने उन्हें पशु चिकित्सक बना दिया.
यहां से की है पढ़ाई
डाक्टर इंद्रजीत वर्मा ने लोकल 18 से बताया कि उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई अपने गृह जनपद से पूरी की है. इसके बाद एआईपीवीटी यानी कि अखिल भारतीय प्री-वेटरनरी टेस्ट की परीक्षा पास की. उसके बाद बीवीएससी की पढ़ाई केरल से और एमवीएससी की पढ़ाई मथुरा कॉलेज से करने के बाद वर्ष 2006 में उनका चयन पशु चिकित्सक के पद पर हो गया.
पशुओं की सेवा करने से मिलती है खुशी
इसके बाद से वह लगातार पशुओं की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि आम आदमी का इलाज करना तो सरल है, लेकिन बेजुबान पशुओं का इलाज करना काफी कठिन काम होता है. क्योंकि वह कुछ बोल नहीं पाते हैं, जिससे उनके बीमारी का आसानी से पता भी नहीं चलता है. उन्हें पशुओं की सेवा करके काफी सुख की अनुभूति होती है.
Rae Bareli,Uttar Pradesh
February 02, 2025, 07:10 IST
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