Daughters are no less than sons. Hashmita Mehra, studying in class 11 of Kota, is ahead in every field.

शक्ति सिंह/कोटा राज. पहले के जमाने में जब घर में बेटी पैदा होती थी, तो उसे मातम जैसा माना जाता था, लेकिन अब समय बदल गया है. आज लड़कियां पढ़ाई, खेल, मॉडलिंग, डांस और एक्टिंग जैसे हर क्षेत्र में लड़कों से आगे बढ़ रही हैं. वे हर तरह के कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेती हैं और बोर्ड एग्जाम से लेकर यूपीएससी, आर्मी, सीए तक हर जगह टॉप कर रही हैं. इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2022 के अनुसार, महिलाएं रोजगार के मामले में पुरुषों से अधिक काबिल साबित हो रही हैं. अब माता-पिता भी अपनी बेटियों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें अन्य गतिविधियों में भी शामिल करते हैं.
कोटा की हशमिता मेहरा एक ऐसी ही उदाहरण हैं. वह 11वीं कक्षा में पढ़ाई के साथ-साथ स्विमिंग, मॉडलिंग और डांसिंग भी करती हैं. 16 साल की उम्र में ही उन्होंने मॉडलिंग और फैशन शो में कई अवार्ड्स जीते हैं. हशमिता न केवल तैराकी में, बल्कि डांसिंग और एक्टिंग में भी अपना नाम कमा रही हैं.
तैराकी में जीते तीन मेडल
हशमिता ने 68वीं जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर 50 मीटर फ्रीस्टाइल में स्वर्ण पदक, 100 मीटर बटरफ्लाई में रजत पदक और 50 मीटर बटरफ्लाई में कांस्य पदक हासिल किया. इससे पहले भी उन्होंने कई जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपने नाम मेडल किए हैं.
मॉडलिंग और डांसिंग में सफलता
हशमिता न केवल तैराकी में बल्कि फैशन शो और डांसिंग कॉम्पिटिशन में भी हिस्सा लेती हैं. उन्होंने कई फैशन शो जीते और डांसिंग में भी अपनी पहचान बनाई है. हशमिता की इस मेहनत और लगन की समाज में काफी तारीफ़ हो रही है और उनकी उपलब्धियों को प्रेरणादायक माना जा रहा है.
परिवार का समर्थन
हशमिता के माता-पिता विनोद और दीप्ति ने हमेशा उनका साथ दिया है. उनकी इस सफलता से उनके परिवार को गर्व है और यह संदेश मिलता है कि अगर मेहनत और समर्पण हो, तो कोई भी लड़की बड़े से बड़े मुकाम हासिल कर सकती है. हशमिता मेहरा ने 16 साल की उम्र में ही यह साबित कर दिया है कि लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. उनकी मेहनत और संघर्ष सभी के लिए एक प्रेरणा हैं.
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FIRST PUBLISHED : October 9, 2024, 16:51 IST
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