Tiger Strike Force is searching in the forests of Hasanpura | टाईगर स्ट्राइक फोर्स कर रही हसनपुरा के जंगलों में सर्चिंग: तीन दिन पहले मृत अवस्था में मिला था बाघ; TSF का डॉग ब्रुनो कर रहा वनकर्मियों की मदद – Burhanpur (MP) News

बुरहानपुर जिले के नेपानगर वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 197 दक्षिण हसनपुरा के जंगल में शुक्रवार शाम मृत अवस्था में मिले करीब 10-12 साल के नर बाघ के मामले में वन विभाग की टीम हर एंगल से जांच में जुटी है। शनिवार को बाघ का एसओपी के अनुसार अंतिम संस्कार
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इंदौर से आई 6 सदस्यीय टीएसएफ यानी टाईगर स्ट्राइक फोर्स में शामिल डॉग ब्रुनो से वन क्षेत्रों में सर्चिंग कराई जा रही है। दो दिनों से टीम सर्चिंग में जुटी हुई है। रविवार को भी नेपानगर, असीरगढ़, हसनपुरा सहित अलग-अलग वन क्षेत्र में टीम ने सर्चिंग की।
घने जंगल में अलग-अलग क्षेत्रों में सर्च में लगी वनकर्मियों की टीम।
कहां से आया टाईगर, यह भी जांच का विषय नेपानगर में टाईगर कहां से आया इसकी भी बारीकी से जांच की जा रही है। दरअसल जिले की सीमा से मेलघाट टाईगर रिजर्व एरिया लगा है। इसलिए महाराष्ट्र वन विभाग की टीम को भी स्थानीय वन विभाग ने सूचना दी है। इसकी जांच भी की जा रही है कि टाइगर कहीं उनके यहां का तो नहीं है। डीएफओ विजय सिंह ने 3 सदस्यीय टीम का गठन की है। इसमें नेपानगर एसडीओ मान सिंह खराड़ी, नेपानगर रेंजर श्रीराम पांडे और असीरगढ़ रेंजर तरूण अनिया को शामिल किया गया है।
बाघ की प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पेट में कुछ नहीं निकला। उसके नाखून, मूंछों के बाल सही सलामत मिले। बॉडी भी पूरी तरह सुरक्षित थी। नेपानगर एसडीओ मान सिंह खराड़ी के अनुसार तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन हुआ है। टीम ने क्षेत्र में रविवार को दिनभर सर्चिंग की है। असीरगढ़ रेंजर तरूण अनिया ने बताया कि इंदौर से आए डॉग ब्रुनो के साथ छह सदस्यीय टीम वनकर्मियों के साथ क्षेत्र में सर्चिंग कर रही है।
यह है पूरा मामला- 4 अक्टूबर की शाम के समय वनकर्मियों को गश्ती के दौरान नेपानगर की बीट दक्षिण हसनपुरा के कक्ष क्रमांक 197 में एक नर टाइगर मृत अवस्था में मिला। टीम ने इसकी सूचना वरिष्ठ अफसरों को दी। डीएफओ विजय सिंह सहित अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। टाईगर को रातभर निगरानी में रखा गया। दूसरे दिन 5 अक्टूबर को भोपाल वन विभाग से आए वन्यप्राणी चिकित्सकों व उप संचालक पशु चिकित्सा बुरहानपुर डॉ. हीरा सिंह भंवर के साथ आए अन्य चार डॉक्टर्स ने बाघ का बारीकी से परीक्षण किया।
वन्यप्राणी विशेषज्ञों ने बताया कि मृत बाघ की उम्र करीब 10 से 12 साल है। आमतौर पर खुले जंगल में रहने वाले बाघ की औसत उम्र 12 से 15 साल होती है। इस आधार पर माना जा सकता है कि अधिक उम्र के कारण बाघ की प्राकृतिक मौत हुई है। डॉक्टर्स के अनुसार बाघ के शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं मिले। सैंपल सुरक्षित कर इंदौर लैब भेजा गया। बताया जा रहा है कि करीब 15 दिनों में विसरा रिपोर्ट आने के बाद वास्तविक स्थिति का पता चलेगा।
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