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जस्टिस सेंटर लियोबेन: ये कोई फाइव स्टार होटल नहीं है जनाब, असलियत जानकर उड़ जाएंगे होश!

विएना. जेल का नाम सुनते ही बड़े से बड़े अपराधियों की हवा टाइट हो जाती है. शायद यही वजह है कि लोगों के मन में अपराध करने को लेकर हमेशा डर बना रहता है. दुनियाभर में एक से बढ़कर एक खतरनाक जेल हैं, जहां पर जाने का मौत जीते-जी नर्क भोगने जैसा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे जेल भी हैं, जो अपनी लग्जरी की वजह से पहचाने जाते हैं? शायद नहीं जानते हों तो बता दें कि ऐसा ही एक जेल ऑस्ट्रिया में ‘जस्टिस सेंटर लियोबेन’ है, जो पिछले 18 सालों से अपनी भव्यता और आलीशान तरीकों के लिए जाना जाता है.

इस जेल को मशहूर आर्किटेक्ट जोसेफ होहेंसिन्न ने तैयार किया था, जो ऑस्ट्रिया के पहाड़ी इलाके लियोबेन में स्थित है. साल 204 में बने इस जेल के आधे हिस्से में कोर्ट बना है. आपको बता दें कि फाइव स्टार होटल सरीखे इस जेल में कुल 205 कैदियों के रहने की व्यवस्था है. कैदियों को यहां तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं, जिसमें स्पा, जिम, अलग-अलग इंडोर गेम और पर्सनल हॉबी को पूरा करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं.

एक साथ 13 कैदी हो सकते हैं इकट्ठा
आमतौर पर किसी जेल में कैदियों को एकसाथ इकट्ठा होने की परमिशन नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे विवाद और हिंसा की स्थिति पैदा हो सकती है. लेकिन इस जेल में ऐसा बिल्कुल नहीं है. यहां पर एक साथ 13 कैदी एक जगह एकत्रित हो सकते हैं. अगर दो कैदी आपस में अपना सेल एक्सचेंज करना चाहें या शेयर करना चाहें तो इसके लिए भी मनाही नहीं है.

जेल की इमारत ही नहीं, सेल भी हैं लग्जरियस

जेल की इमारत जहां फाइव स्टार होटल का फील देती है, वहीं इसके सेल भी होटल के कमरों की तरह लग्जरियस हैं. यहां के हर एक सेल में अलग बाथरूम, किचन और एक लिविंग रूम बना हुआ है. इसमें कैदियों को टीवी देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. इसके अलावा रूम में एक फुल साइज विंडो भी मौजूद है, जिससे की कैदी बाहर का नजारा देख सकें.

नहीं रखे जाते दुर्दांत कैदी
ऑस्ट्रिया के इस लग्जरियस जेल में हत्या, किडनैपिंग, रेप जैसे जघन्य अपराध करने वाले क्रिमिनल्स को नहीं रखा जाता है. यहां उन कैदियों को ही जगह मिलती है जो मामूली घटनाओं की सजा काट रहे होते हैं. दरअसल, इस जेल को लग्जरियस बनाने के पीछे का मकसद ही छोटे-मोटे अपराध की सजा काट रहे कैदियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराना था, ताकि वे अपने अपराध के बारे में सोच सकें. इसके बाद जब वे जेल से बाहर निकलें तो क्राइम से दूर होकर एक सामान्य जीवन जी सकें.

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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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