Loksabha Election 2024: जब एक ‘गोरखपुरी’ ने ठुकरा दिया था इंदिरा का प्रस्ताव, राज्यसभा जाने से किया इनकार

सियासत में अक्सर कुर्सी और पद को लेकर घमासान मचा रहता है. पद के लिए रिश्ते तक तार तार हो जाते हैं, लेकिन कई उदाहरण ऐसे भी देखने को मिलते हैं. जो इसके उलट हैं. जी हां, हम आपको एक ऐसा ही किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसमें यह शख्स ने न केवल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था, बल्कि राज्यसभा सांसद बनने से भी इनकार कर दिया था. यह शख्सियत कोई और नहीं, मशहूर शायर रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी थे.
जब पीएम आवास पहुंचे फिराक
फिराक गोरखपुरी के सहयोगी रहे रमेश द्विवेदी ने अपने संस्मरण में इस बात का जिक्र किया था. उन्होंने लिखा था कि एक बार की बात है फिराक गोरखपुरी लालकिले पर होने वाले मुशायरे के लिए दिल्ली पहुंचे थे. मुशायरे के अगले दिन उन्हें बताया गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनसे मिलना चाहती हैं. फिराक और रमेश द्विवेदी तय समय पर प्रधानमंत्री आवास पहुंच गए. जहां उनको एक कमरे में बैठाया गया. बगल के कमरे से बातचीत करने की आवाजें आ रही थी. फिराक साहब को शोरगुल पसंद नहीं था, लिहाजा उन्होंने इस पर कुछ बोला. उनकी आवाज सुनकर उस कमरे से हेमवती नंदन बहुगुणा और उमाशंकर दीक्षित बाहर आए, तो फिराक उन्हें देखकर खुश हो गए. दरअसल, दीक्षितजी उनके आजादी के दिनों के साथी थे और दोनों साथ साथ जेल भी गए थे.
जब इंदिरा ने रखा प्रस्ताव
रमेश द्विवेदी आगे लिखते हैं कि इसी मेल मुलाकात के बीच ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आ गईं और उन्हें यानि फिराक साहब को दूसरे कमरे में लेकर जाने लगीं. इसी बीच फिराक गोरखपुरी ने इंदिरा से कहा कि रमेश को साथ लिए बिना उनका दिमाग काम नहीं करता. जिसके बाद इंदिरा के साथ रमेश और फिराक एक दूसरे कमरे में चले गए. वहां कुछ देर दूसरी बातों के बाद इंदिरा गांधी ने फिराक गोरखपुरी से कहा कि हम सब चाहते हैं कि आपको राज्यसभा भेजा जाए. रमेश द्विवेदी ने अपने संस्मरण में लिखा है कि इंदिरा के इस प्रस्ताव पर फिराक गोरखपुरी के चेहरे पर हल्की मुस्कान तैर गई. थोड़ी देर सोच विचार करने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी का शुक्रिया किया और उनको अपने पुराने रिश्ते की याद दिलाई.
याद दिलाईं पुरानी बातें
फिराक ने इंदिरा गांधी से कहा कि आनंद भवन से हमारे पारिवारिक रिश्ते रहे हैं. मोतीलाल नेहरु के जमाने से हमारे परिवार का आपके परिवार से गहरा रिश्ता रहा है. आपका स्नेह ऐसे ही मिलता रहे, यही मेरे लिए सौ राज्यसभा सदस्य बनने के बराबर है. और इस तरह फिराक गोरखपुरी ने राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया था. बता दें कि मशहूर शायर रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी गोरखपुर के गोला तहसील के रहने वाले थे. उनका जन्म 28 अगस्त 1896 को बनवारपार गांव में हुआ था. यही कारण है कि वह अपने नाम के आगे गोरखपुरी लगाते थे. फिराक के पिता गोरख प्रसाद ‘इबरत’ भी एक बड़े शायर थे। फिराक गोरखपुरी की पढ़ाई लिखाई भी गोरखपुर के रावत पाठशाला और जुबली कॉलेज में हुई थी.
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FIRST PUBLISHED : March 20, 2024, 16:53 IST
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