मुगलों के खानसामा ने आम लोगों तक पहुंचाया शाही स्वाद, छोटी सी दुकान से शुरू हुआ सफर, आज नॉनवेज के लिए पूरे देश में मशहूर

हाइलाइट्स
करीम्स के संस्थापक शाही खानसामा थे.
वह बहादुरशाह जफर के समय में मुगल दरबार में थे.
करीम्स की स्थापना के लिए अपनी सारी पूंजी लगा दी थी.
नई दिल्ली. दिल्ली या इसके आसपास के इलाकों में अगर किसी एक नॉनवेज रेस्टोरेंट के बारे में बात की जाए जिसका नाम लगभग सभी जानते हों, तो अमूमन एक ही नाम आएगा. वह नाम है करीम्स. पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद से शुरू हुआ करीम्स का सफर आज देशभर में अपने पैर पसार चुका है. करीम्स की शुरुआत 1913 में करीमुद्दीन ने की थी. वह मुगम बादशाह बहादुरशाह जफर के समय में रॉयल शेफ थे. जब बादशाही खत्म हुई तो उन्होंने खुद का काम शुरू करने की ठानी. मुगल जायके आम लोगों तक पहुंचाने की उनकी चाहत ने ही करीम्स को जन्म दिया.
करीम्स की शुरुआत के लिए उन्होंने अपना लगभग सबकुछ दांव पर लगा दिया. मुगलों के लिए काम करते वक्त उन्हें जो कुछ भी हासिल हुआ था उन्होंने उसका इस्तेमाल करीम्स की नींव रखने के लिए किया. जब उन्होंने करीम्स की शुरुआत की तब वह केवल 2 ही व्यंजन परोसते थे. एक मटन और दूसरा दाल. उन्होंने अपनी दुकान का नाम करीम रखा. करीब इस्लाम में अल्लाह के 99 नामों में से एक है.
पीढ़ियों की विरासत
करीमुद्दीन ने एक दुकान शुरू करने के लिए जो जोखिम लिया उसकी वजह से इतिहास बन गया है. उनकी इस विरासत को उनके वंशजों ने बखूबी आगे बढ़ाया. करीम्स में पार्टनर ऐवाज आसिफ कहते हैं कि आज भी उनके यहां के खाने में मुगलई मौलिकता से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई लेकिन स्थानीय परिवर्तनों का जरूर ध्यान रखा गया है. वह कहते हैं कि बदलते स्वाद और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज करीम्स देशभर में अपने मेन्यु को लेकर पहुंच गया है. आज देशभर में करीम्स के 50 आउटलेट हैं.
केवल पुरानी दिल्ली वाले आउटलेट में करीम्स के पास 100 कर्मचारी हैं. इसमें से 18-20 लोग कई पीढ़ियों से वहीं काम कर रहे हैं. इस आउटलेट से हर साल औसतन 60 लाख रुपये की कमाई होती है.
फ्रेंचाइजी मॉडल पर ध्यान केंद्रित
करीम्स का ध्यान अब फ्रेंचाइजी मॉडल पर केंद्रित है. कंपनी का कहना है कि इस मॉडल के सफल होने के लिए जरूरी है कि प्रोडक्ट्स की क्वालिटी से कोई समझौता न किया जाए. उनका कहना है कि वह सभी आउटलेट्स में वही 106 साल पुरानी रेसिपी को ही इस्तेमाल कर रहे हैं. बकौल आसिफ, “हम सुनिश्चित करते हैं हर आउटलेट में प्रोडक्ट की एकरूपता बरकरार रखी जाए.”
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FIRST PUBLISHED : April 24, 2024, 16:59 IST
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