Success Story: किसान पिता ने बोया जज्बा, बेटे ने बनकर दिखाया गांव का पहला फौजी, ऐसे मिली कामयाबी

मनमोहन सेजू/बाड़मेर. कहते है कि अपनी औलाद की सफलता से बढ़कर एक पिता के लिए कुछ नही हो सकता. और बेटा अगर किसी बात का वादा कर उसे कर दिखाए तो इससे बढ़कर एक पिता के लिए कुछ नही होता है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पाकिस्तान की सीमा से सटे बींजासर गांव के मोहन सिंह ने, जिसने अपनी मेहनत से सफलता हासिल की है.
भारत- पाकिस्तान की सीमा पर बसे बाड़मेर के छोटे से गांव बींजासर के रहने वाले चतर सिंह के लिए इन दिनों हवा में उड़ने के दिन है. हो भी क्यों ना उनके बेटे मोहन सिंह ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. मोहन ने अपने पिता से वादा किया था कि वह अपने तन पर देश की रक्षा की वर्दी पहनेगा और सेना में जाएगा. चार असफल प्रयासों के बाद आखिरकार उसका चयन भारतीय सेना के लिए हो ही गया है.
मोहन सिंह देश की सेवा के लिए फौज में जाने वाला गांव का पहला युवा है. उसके पिता बींजासर में खेतीबाड़ी करते है. मोहन इससे पहले वनरक्षक, कांस्टेबल, 5.5 जीडी, आर्मी भर्ती जोधपुर में असफल हो चुका है. अजमेर में आयोजित भर्ती में उसने सफलता को छुआ है.
बीए फाइनल ईयर का विद्यार्थी मोहन अपनी 10वीं की पढ़ाई के बाद बाड़मेर आ गया था. यहॉ घेवरसिंह राजपुरोहित के सानिध्य में उसने सेना भर्ती की तैयारी की और सफलता को हासिल किया है. वह बताता है कि पिता को इस बात का वादा किया था कि एक दिन वह देश सेवा के लिए भारतीय सेना का हिस्सा जरूर बनेगा. उसका सपना अब साकार हुआ जिसके लिए बीते 2 साल से वह जी-जान से जुटा हुआ था.
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FIRST PUBLISHED : September 20, 2023, 13:45 IST
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