छतरपुर जिले में पनपता आतंकराज: खाकी का नया नारा वसूली हमारा अधिकार है?

जब सत्ता में बैठे लोग अंध हो जाते है तब माहौल बन जाता है अराजक

(धीरज चतुर्वेदी)
ताबड़तोड़ अपराधिक वारदते, खौफजदा आमजन। वहीँ दूसरी ओर जुआ लूटने के आरोप में खाकी और बेगुनाहो पर दर्ज होते अपराधिक मामले। यह है छतरपुर जिले की नई तस्वीर जहाँ सत्ता में बैठे ताकतवर नेताओं के आशीर्वाद से पूरा तंत्र बेलगाम होकर लूट खसोट के आरोपों में फंसा है।छतरपुर जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्राम ढाडारी में आपसी विवाद में एक दलित महिला को गोली मार दी गई। चिंताजनक हालत में उसे ग्वालियर रिफर किया गया है। कुछ दिन पहले हीं टडेरा हार में एक महिला संदेहास्पद हालत में मिली थी जिसकी अस्पताल में मौत हों गई। यह घटनाये दर्शाती है कि मप्र में मुख्यमंत्री के महिला सुरक्षा के तमाम दावे मात्र भाषणों तक सीमित है। कारण है बेलगाम तंत्र जो सत्ताधारियों के आशीर्वाद के कारण बेलगाम घोषित हों चुका है। जिसने पुलिस शपथ के मायने हीं बदल दिये है। यूं तो पुलिस की शपथ देशभक्ति-जनसेवा की है, लेकिन आरोप लगते है कि लूट खसोट यानि वसूली हीं पहला अधिकार है।
इन दिनों पुलिस की वर्दी पर कालिख पोतने वाले कई मामले सुर्खियों में है। सिविल लाइन थाना पुलिस की जद के गांव में एक जुआ पकड़ा जाता है। एक प्रकार से पुलिस ने लूट की क्यों कि आरोप लग रहे है कि इस जुआरियो के पास से करीब 74 हजार रूपये मिले पर जप्ती करीब 14 हजार की बताई गई। फिर यह भी आरोप सरगर्म है कि इन जुआरियो को तत्काल जमानत देने के एवज में अलग से भी वसूली की गई। खाकी की शपथ पर तमाचा जड़ने वाले इस मामले में एक पुलिस कर्मचारी भी पकड़ा गया था जिसे छोड़ दिया गया। अब क्या पुलिस कप्तान इस मामले की निष्पक्ष कराने की हिम्मत जुटाएंगे क्यों मामला उनकी विश्वसनीयता पर भी चोट पंहुचाता है।एक ओर मामला राजनैतिक हल्के में भी सुर्खिया बटोर रहा है जो सट्टेबाजी से शुरु होता है आबकारी एक्ट पर आकर खत्म होता है। सतना में छतरपुर के कुछ सट्टेबाज पकडे जाते है जो छतरपुर के कुछ लोगो के नाम बताते है। शहर की कोतवाली पुलिस को यह मामला कुबेर नजर आने लगता है। जनचर्चा का विषय है कि जिस युवक को पुलिस हिरासत में लेती है उससे 5 लाख की डिमांड कर दी जाती है वरना उसे अन्य अपराध में बंद करने की धमकी दी जाती है। यह मामला तब ओर अधिक सनसनी फैलाता है जब इस मामले में बीजेपी के एक नेता हस्तक्षेप करते है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पहल होती है पर शहर कोतवाली पुलिस अपने अधिकारी को बेइज़्ज़त कर उस युवक पर फर्जी अपराध थोप देती है। बताया जाता है कि शहर कोतवाल की बड़े साहब साहब से अच्छी ट्यूनिंग है इस कारण वह छोटे साहब को लिफ्ट नहीं देते।यह सभी मामले सुर्खिया बटोर रहे है जिनमे कितनी सच्चाई है यह तपाश का विषय है जिन्हे लेकर जाँच की गंभीरता जरुरी है। अब यह अराजक हालात क्यों निर्मित हों रहे है उसके पीछे का एक मात्र कारण अधिकारियो के प्रति सत्ताधारी भोपाल के ताकतवर नेताओं का मोहित होना है। इस सच को दबी जुबान में सत्ताधारी स्थानीय नेता भी स्वीकारते है कि अधिकारियो ने खजुराहो सांसद एवं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीड़ी शर्मा को सम्मोहित कर रखा है। इस संरक्षण से निरंकुशता हावी हों चुकी है। बीजेपी हाईकमान को छतरपुर जिले बिगड़ेल हालत को देख गंभीरता बरतते हुए चिंतन मनन मंथन करना होगा क्यों बढ़ता आतंकराज, अत्याचार, अनाचार घातक हों सकता है।