Explainer : दुनिया के 10 देशों में कोर्ट ने दी समलैंगिक विवाह को अनुमति

हाइलाइट्स
दुनिया के 33 देशों में समान लिंग विवाह को मिल चुकी है अनुमति, ज्यादातर देशों में अब ऐसे संबंध अपराध नहीं
सर्वे बताते हैं कि दुनियाभर में ज्यादातर देशों में लोग समलैंगिक विवाह को स्वीकार करने लगे हैं
भारत में 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद समलैंगिक संबंध रखना अपराध नहीं रह गया है
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के मामले दायर की गयीं याचिकाओं पर सुनवाई शुरू कर दी है. इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने ही साल 2018 में समलैंगिक रिश्तों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाला ऐतिहासिक फ़ैसला दिया था. हालांकि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के डिक्रिमिनलाइज़ेशन के बावजूद समलैंगिक विवाह के लिए कानूनी दावा नहीं कर सकते.
वैसे दुनिया के 33 देशों में समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली हुई है, इसमें कम से कम 10 देशों ने अदालती फैसलों के जरिए ही समान-सेक्स विवाह को मान्यता दी है, जबकि शेष 22 देशों ने कानून बनाकर ये अनुमति दी है. सेम सेक्स मैरिज को कानूनी जामा पहनाने वाले ताजातरीन देश चिली और स्विट्जरलैंड हैं.
ऐसे विवाह को अब ज्यादा स्वीकार्यता
हालांकि दुनिया की 10 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 05 में समलैंगिक विवाह की अनुमति नहीं है. दुनिया के 64 देशों को छोड़कर समलैंगिक संबंध बनाना अब अपराध नहीं रह गया है. हालांकि इस विवाह को लेकर अब भी तमाम देशों के अपने अलग आग्रह हैं. हालांकि सर्वे ये बताते हैं कि इस तरह की शादियों को लेकर दुनियाभर में दस साल पहले की तुलना में ज्यादा स्वीकार्यता मिलने लगी है.
भारत में भी बदला माहौल
पीयू रिसर्च का सर्वे कहता है कि दुनियाभर के 34 देशों में 52 फीसदी लोगों ने माना है कि सेम सेक्स मैरिज को स्वीकार करना चाहिए. स्वीडन में 94 फीसदी लोग ऐसा चाहते हैं. वहीं आईपीएसओएस नामक संस्था का सर्वे कहता है70 फीसदी लोग पूरी दुनिया में मानते हैं कि शादी की अनुमति मिल जानी चाहिए. भारत में ऐसा मानने वाले 66 फीसदी लोग हैं.
गैलप नामक संस्था के सर्वे में भारत के 53 फीसदी लोगों ने कहा कि देश अब समलैंगिक लोगों के लिए बेहतर जगह बन गया है. हालांकि 64 देश दुनियाभर में ऐसे हैं, जो समलैंगिक संबंधों को अपराध मानते हैं. इसकी कड़ी सजा देते हैं. जिसमें मृत्युदंड भी शामिल है.
जिन देशों में कोर्ट ने दी सेम सेक्स मैरिज की अनुमति
हम देखते हैं कि जिन देशों में सेम सेक्स मैरिज को मंजूरी दी गई है, वहां क्या स्थिति है और ये मंजूरी कब और कैसे दी गई.
संयुक्त राज्य अमेरिका – 26 जून 2015 को, यूएस सुप्रीम कोर्ट ने ‘ओबेर्गेफेल बनाम होजेस’ में 5:4 के फैसले में समलैंगिक विवाह को कानून बनने की अनुमति दी. अब पूरे अमेरिका के सभी 50 राज्यों में समलैंगिक जोड़ों को ना केवल पूर्ण अधिकार मिल चुका है बल्कि विवाह की अनुमति भी है.
अदालत ने तर्क दिया कि विवाह को केवल विषमलैंगिक जोड़ों तक सीमित करना कानून के तहत समान सुरक्षा की 14वीं संशोधन गारंटी का उल्लंघन करता है. हालांकि अमेरिका के 32 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के पहले ही अपने यहां समलैंगिक विवाह को मान्यता दे दी थी. 2003 में, मैसाचुसेट्स संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसा करने वाला पहला राज्य बना था.
ताइवान – 2019 में ताइवान समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला पहला एशियाई देश बन गया. एक अदालत के फैसले के बाद एक कानून पेश किया गया. 17 मई, 2019 को ताइवान की संसद ने समान-लिंग विवाह को वैध बनाने वाला एक विधेयक पारित किया. अपने फैसले में अदालत ने देश के विवाह कानूनों को बदलने के लिए विधायिका को करीब दो साल का समय दिया.
कोस्टारिका – 26 मई, 2020 को, कोस्टारिका मध्य अमेरिका का पहला देश बन गया, जिसने 2018 में देश की शीर्ष अदालत के एक फैसले के बाद समान-लिंग विवाह को वैध बनाने के लिए समान-लिंग विवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को “असंवैधानिक” घोषित किया गया. एक चेतावनी यह भी जोड़ी गई कि विधायिका द्वारा प्रतिबंध को 18 महीनों में रद्द कर दिया जाएगा. हालांकि ऐसा नहीं हुआ, जिसके कारण अदालत के फैसले को महत्व दिया गया.
दक्षिण अफ़्रीका – दक्षिण अफ़्रीका की सर्वोच्च अदालत के इस फ़ैसले के एक साल बाद कि उसके विवाह कानूनों ने समान अधिकारों की संविधान की गारंटी का उल्लंघन किया है, दक्षिण अफ़्रीकी संसद ने 30 नवंबर, 2006 को समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दे दी. हालांकि, नया कानून धार्मिक संस्थानों और अधिकारियों को आज़ादी की अनुमति देता है. इसकी वहां काफी आलोचना भी हुई है.
ऑस्ट्रिया – ऑस्ट्रिया के संवैधानिक न्यायालय ने 2017 में विवाह समानता से इनकार को भेदभावपूर्ण और कानूनी रूप से समान-लिंग विवाह को सही माना. 1 जनवरी, 2019 से समलैंगिक विवाह की अनुमति दे दी गई.
कानून के माध्यम से समलैंगिक विवाह की अनुमति देने वाले देश
ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, स्विट्जरलैंड – 2017 में एक राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह के बाद, ऑस्ट्रेलिया की संसद ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला कानून पारित किया. जनमत संग्रह में इसे 62 फीसदी समर्थन मिला. आयरलैंड और स्विट्ज़रलैंड में भी लोकप्रिय वोटिंग के जरिए LGBTQ विवाहों को औपचारिक मान्यता प्रदान की गई.
अर्जेंटीना – 15 जुलाई, 2010 को, अर्जेंटीना देशभर में समलैंगिक विवाह की अनुमति देने वाला पहला लैटिन अमेरिकी देश और दुनिया का 10वां देश बन गया. एक राष्ट्रीय कानून पारित होने से पहले ही, कई शहरों और स्थानीय इकाइयों ने समलैंगिक जोड़ों के लिए नागरिक संघों की अनुमति दी थी.
कनाडा – कनाडा में समान-सेक्स जोड़ों को 1999 से विवाह का कानूनी लाभ मिलने लगा. संघीय और प्रांतीय सरकारों ने एलजीबीटीक्यू जोड़ों के लिए सामान्य कानून के तहत विवाह को मंजूरी दे दी. कनाडा इसके लिए राष्ट्रव्यापी कानून भी लागू कर चुका है.
जर्मनी – 30 जून, 2017 को जर्मनी समलैंगिक जोड़ों को विवाह करने की अनुमति देने संबंधी कानून लाने वाला 15वां यूरोपीय देश बन गया. चांसलर एंजेला मर्केल के कार्यकाल देश के बुंडेस्टाग में 393 से 226 वोट उसके पक्ष में दिए गए.
क्यों विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव की हो रही पैरवी
विशेष विवाह अधिनियम एक धर्मनिरपेक्ष कानून है जो धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के साथ काम करता है. समलैंगिक विवाह को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मान्यता दी जा सकती है. अधिनियम पहले से ही “किसी भी दो व्यक्तियों” के बीच विवाह की बात करता है जो इसके तहत संपन्न होते हैं. किन्हीं भी दो व्यक्तियों में एक ही लिंग के दो व्यक्ति शामिल हो सकते हैं. विशेष विवाह अधिनियम “पति” और “पत्नी” शब्दों के कई संदर्भ देता है.
क्या था सुप्रीम कोर्ट का वर्ष 2018 का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में नवतेज सिंह जौहर मामले में समलैंगिक जोड़ों के बीच रिश्तों को आपराधिक कृत्यों की श्रेणी से बाहर कर दिया था. इससे पहले तक समलैंगिक लोगों के बीच रिश्तों को अपराध की श्रेणी में गिना जाता था जिनके ख़िलाफ़ सामाजिक और क़ानूनी स्तर पर कार्रवाई की जा सकती थी.
इस मामले में दायर तमाम याचिकाओं की सुनवाई करते हुए तत्कालीन चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने ऐसे संबंधों को अप्राकृतिक बताने वाली धारा 377 को निरस्त कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फ़ैसले के साथ ही समलैंगिक रिश्तों की दुनिया में एक नया अध्याय शुरू हुआ.
भारत का विवाह कानून शादी को लेकर क्या कहता है
हिंदू विवाह कानून के खंड पांच में कहा गया है कि शादी दो हिंदुओं के बीच होनी चाहिए.इसी कानून का खंड – 5 समलैंगिक और विपरीत-लिंगी जोड़ों के बीच भेदभाव नहीं करता. तमाम याचिकाओं में हिंदू विवाह अधिनियम 1955, विशेष विवाह अधिनियम 1954 और विदेशी विवाह अधिनियम 1969 के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग की गई है.
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Tags: Marriage Law, Same Sex Marriage, Supreme Court
FIRST PUBLISHED : April 18, 2023, 16:05 IST
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