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पुराना बेचकर आपको भी खरीदना है नया मकान, कैसे मिलेगी टैक्‍स छूट, ट्रिब्‍यूनल ने बताया-क्‍या है सबसे जरूरी?

हाइलाइट्स

आयकर की धारा 54 के तहत लांग टर्म कैपिटल गेन पर छूट मिलती है. मकान बेचने पर हुए मुनाफे पर 20 फीसदी की दर से टैक्‍स लगता है. मुनाफे की इस राशि पर टैक्‍स की दर का 4 फीसदी सेस भी लगता है.

नई दिल्‍ली. टैक्‍स ऐसी फांस है जिसमें जरा सी चूक लाखों का नुकसान करा सकती है. देश में बहुत से लोग हैं जो अपना पुराना मकान बेचकर नया खरीदते हैं या फिर दूसरी जगह नया मकान बनवाते हैं. अब ये बात तो सभी को पता है कि पुराना मकान बेचने पर आपको ज्‍यादा कीमत मिलती है, जो मुनाफे के रूप में होती है. अगर आपको मुनाफा हुआ है तो इस पर टैक्‍स भी चुकाना पड़ता है. लेकिन, इनकम टैक्‍स कानून आपको टैक्‍स बचाने का मौका भी देता है, अगर आप पुराना मकान बेचकर दूसरा आवासीय मकान बनाते या खरीदते हैं. हालांकि, इसके लिए आपको कुछ डेडलाइन और नियमों का ध्‍यान रखना जरूरी होगा. अगर इस नियम की जानकारी नहीं है और आप चूक गए तो लाखों रुपये का टैक्‍स चुकाना पड़ सकता है.

दरअसल, इनकम टैक्‍स कानून की धारा 54 के तहत पुराना मकान बेचने पर जो प्रॉफिट होता है, उस पर दूसरा मकान खरीदने या बनवाने पर टैक्‍स छूट दिए जाने का प्रावधान है. हाल में इनकम टैक्‍स अपीलीय ट्रिब्‍यूनल (ITAT) ने एक फैसले में कहा है कि करदाता को सेक्‍शन 54 के तहत टैक्‍स छूट क्‍लेम करते समय यह ध्‍यान रखना चाहिए कि उसने मकान कब खरीदा या बनवाया है. अगर यह इनकम टैक्‍स कानून की तय सीमा के भीतर नहीं है तो फिर टैक्‍स छूट नहीं दी जाएगी. इसमें ध्‍यान देने वाली बात ये है कि टैक्‍स छूट के लिए समय की गणना मकान के पजेशन से होगी न कि उसके एग्रीमेंट से.

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क्‍या कहता है सेक्‍शन 54
आयकर की धारा 54 के तहत अगर आपने कोई पुराना मकान बेचा है तो उसकी पुरानी कीमत और मौजूदा कीमत के अंतर को लांग टर्म कैपिटल गेन के रूप में मुनाफा माना जाएगा. वैसे देखा जाए तो इस पर LTCG टैक्‍स लगना चाहिए जो कि कुल रकम का 20 फीसदी और इस पर 4 फीसदी सेस मान लिया जाए तो 20.8 फीसदी होगा. लांग टर्म उस अवधि को कहते हैं जब किसी प्रॉपर्टी को 24 महीने या उससे ज्‍यादा समय तक अपने पास रखकर बेचा जाए.

उदाहरण से समझिए : मान लीजिए आपने कोई मकान 2020 में खरीदा तब उसकी वैल्‍यू 40 लाख रुपये थी और इसे 2024 में 50 लाख रुपये में बेच दिया. इस तरह आपने प्रॉपर्टी को 4 साल तक अपने पास रखा. लिहाजा इसे बेचने पर जो 10 लाख का मुनाफा हुआ, वह आपका लांग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और इस पर 20.8 फीसदी LTCG टैक्‍स चुकाना पड़ेगा. लेकिन, अगर आप इस मकान को बेचकर दूसरा आवासीय मकान खरीदते या बनवाते हैं तो धारा 54 के तहत आपको टैक्‍स छूट का लाभ दिया जाएगा और मुनाफे की पूरी रकम टैक्‍स फ्री हो जाएगी.

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छूट के लिए क्‍या ध्‍यान रखना जरूरी
ऊपर दिए उदाहरण से आप अपने मुनाफे पर लगने वाले टैक्‍स को तो समझ गए होंगे. अब हम इस टैक्‍स को बचाने का गणित बताते हैं. जैसा कि इनकम टैक्‍स की धारा 54 में लिखा है और हाल में ITAT ने भी अपने फैसले में कहा है कि अगर पुराना मकान बेचने के एक साल पहले ही आपने कोई नया मकान खरीदा है, भले ही वह अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन है, तो आपको पुराने मकान से होने वाले मुनाफे पर टैक्‍स नहीं देना होगा. लेकिन, यह जरूरी है कि नया मकान खरीदने की अवधि पुराना मकान बेचने से ठीक एक साल (365 दिन) के भीतर की ही होनी चाहिए. इसके अलावा अगर आप मकान बेचने के 2 साल के भीतर भी नया मकान खरीदते हैं तो भी आपको धारा 54 के तहत LTCG टैक्‍स चुकाने से छूट मिल जाएगी.

अब दूसरी स्थिति में जहां आप मकान खरीदने के बजाए खुद बनवाना चाहते हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि पुराना मकान बेचने की तारीख से 3 साल के भीतर ही आपको दूसरा नया मकान बनवा लेना होगा. तभी आपको सेक्‍शन 54 के तहत टैक्‍स छूट का लाभ दिया जाएगा. ट्रिब्‍यूनल ने साफ कह दिया है कि मकान खरीदने का मतलब उसके पजेशन से होगा. यानी आप खरीद रहे हैं तो ऐसा मकान खरीदें जो आपको 2 साल के भीतर पजेशन दे दे और अगर बनवा रहे हैं तो इसे 3 साल के भीतर हर हाल में पूरा कर लें, तभी छूट मिलेगी.

ट्रिब्‍यूनल ने क्‍यों दिया ये फैसला
इनकम टैक्‍स अपीलीय ट्रिब्‍यूनल के पास एक एनआरआई दंपति का मामला आया जिसमें इनकम टैक्‍स विभाग ने 36 लाख रुपये पर टैक्‍स और पेनाल्‍टी लगाई थी. दंपति ने 10 फरवरी, 2011 को एक मकान बेचा. नियम के तहत उन्‍हें एक साल पहले यानी 11 फरवरी, 2010 के बाद कोई मकान खरीदना था या 9 फरवरी, 2013 से पहले नया आवास खरीदना था. लेकिन, इनकम टैक्‍स विभाग ने देखा कि दंपति ने बिल्‍डर के साथ नया मकान खरीदने का एग्रीमेंट 25 जुलाई, 2009 को किया था. इस पर विभाग ने टैक्‍स के साथ मोटा जुर्माना लगा दिया. लेकिन, ट्रिब्‍यूनल ने फैसले में कहा कि टैक्‍स छूट के लिए एग्रीमेंट नहीं पजेशन को देखा जाना चाहिए, जो इस मामले में 2 फरवरी, 2011 को मिला था. लिहाजा दंपति को सेक्‍शन 54 के तहत टैक्‍स छूट के काबिल माना गया.

Tags: Business news, Income tax, Income tax exemption, Income tax return


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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