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कलेक्टर के निर्देश के बाद भी जनपद के सहायक यंत्री नहीं हटे

छतरपुर। जनपद पंचायत बड़ामलहरा के सहायकयंत्री एनके शर्मा एवं गौरिहार जनपद के सहायक यंत्री व्हीके नायक के द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं में रुचि न लेने के कारण सरकारी योजनाएं इन दोनों जनपदों में प्रगति पर नहीं होने के कारण पिछली बैठक में छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने यह निर्देश जारी किए थे कि बड़ामलहरा के सहायक यंत्री एनके शर्मा एवं गौरिहार के सहायक यंत्री व्हीके नायक को तत्काल हटाया जाए। परंतु आज दिनांक तक दोनों जनपदों पर यह सहायक यंत्री जमे हुए हैं और कलेक्टर का आदेश बौना साबित हो रहा है। मजेदार बात ये है कि कलेक्टर के द्वारा पंचायत विभाग की हर हफ्ते होने वाली बैठक में जिले भर के सीईओ एवं सहायक यंत्रियों की बैठक ली जाती है और इस बैठक में ग्रामीणा क्षेत्र की योजनाओं की समीक्षा की जाती है। इस समय वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजनाओं की समीक्षा सबसे ज्यादा हो रही है ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना में सहायक यंत्री एवं उपयंत्री रुचि नहीं लेने के कारण जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना का जो लक्ष्य है वह पूरा नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण जिले की प्रगति जो होना चाहिए वह नहीं हो पा रही है। जबकि कलेक्टर के द्वारा हर बैठक् में प्रधानमंत्री आवास योजना को हाईलाइट कर प्रधानमंत्री आवास योजना को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए जा रहे हैं उसके बावजूद भी ग्राम पंचायतों के सचिवों ाअैर सरपंचों द्वारा भी कोई रुचि नहीं ली जा रही है। इस संबंध में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरपंच सचिवों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि सीधे हितग्राही के खाते में जाती है और हितग्राही पहली किस्त निकालकर दिल्ली चला जाता है। जिसके कारण आज भी ग्राम पंचायत में सैकड़ों मकान अपूर्ण स्थिति में पड़े हुए हैं। और कई हितग्राही तो पैसा निकालने के बाद ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। आखिरकार एफआईआर किस पर दर्ज कराएं और इन्हें कहां से ढूंढकर लाएं। सूची में नाम होने के बाद हितगा्रहियों को ढूंढकर उनसे मकान बनाने के लिए बाध्य किया जारहा है।सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री आवास योजना बनाने के लिए सेटरिंग की समस्या सबसे ज्यादा आड़े आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जो प्रधानमंत्री आवास योजना स्वीकृत किए गए हैं उनकी चार दिवारी तो बनकर तैयार हो गई है। सेटरिंग सामग्री नहीं उपलब्ध हो पा रही है जिसके कारण सैकउ़ों मकान अपूर्ण स्थिति में पड़े हुए हैं।

एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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