पन्ना की फिजाओं में आज न्याय की गूँज और प्रशासन की बेरुखी का कड़वा धुआं एक साथ महसूस किया गया। केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंझ, मझगांव और एनटीपीसी जैसी परियोजनाओं की बलि चढ़ रहे हजारों किसानों और आदिवासियों का सब्र उस वक्त टूट गया, जब जननायक अमित भटनागर की अलोकतांत्रिक गिरफ्तारी के विरोध में जुटे प्रदर्शनकारियों से मिलने की जहमत पन्ना एसपी ने नहीं उठाई। भीषण तपिश और चिलचिलाती धूप में हजारों आदिवासी महिलाएं और बुजुर्ग किसान दिनभर एसपी कार्यालय की चौखट पर अपनी फरियाद लेकर डटे रहे, लेकिन लोकतंत्र के रखवालों ने दफ्तर के बंद कमरों से बाहर निकलकर जनता का ज्ञापन लेना तक मुनासिब नहीं समझा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रही पार्षद दिव्या अहिरवार ने तीखे तेवरों के साथ प्रशासन को ललकारते हुए स्पष्ट किया कि लाठियों और जेल के डर से आदिवासियों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। भटनागर की गिरफ्तारी को पदयात्रा रोकने की कायराना साजिश करार देते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि यह दमनकारी नीति आंदोलन की आग को बुझाने के बजाय उसे और उग्र करेगी। प्रशासन की इस ‘अड़ियल और संवेदनहीन’ कार्यशैली ने साफ कर दिया है कि उसे विस्थापितों के आंसू और उनकी उजड़ती जमीन से कोई सरोकार नहीं है।
विधायक विक्रांत भूरिया, अभिषेक परमार और केशु राजा जैसे कद्दावर नेताओं के समर्थन के बीच यह प्रदर्शन अब सत्ता और जनता के बीच आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है। दिव्या अहिरवार की हुंकार ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक और अमित भटनागर की रिहाई पर फैसला नहीं हुआ, तो पन्ना की गलियां जन-आक्रोश के महासंग्राम की गवाह बनेंगी। प्रशासन की खामोशी अब तूफान के आने का संकेत दे रही है।
केन-बेतवा विस्थापित किसानों के समर्थन में गरजे विक्रांत भूरिया, कहा- एफआईआर से डरने वाले नहीं
छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों के समर्थन में आदिवासी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया शुक्रवार को छतरपुर पहुंचे, जहां उनका कांग्रेस कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लोकेंद्र वर्मा एवं एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में शहर में विशाल बाइक रैली निकाली गई।
भगवा तिराहा पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने विक्रांत भूरिया और यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक सिंह परमार का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ रैली पन्ना नाका पहुंची, जहां बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस मौके पर विक्रांत भूरिया ने केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित किसानों के समर्थन में बड़ा बयान देते हुए कहा कि किसानों की हक की लड़ाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि 50 लोगों पर एफआईआर हुई है तो क्या, 1000 लोगों पर भी एफआईआर हो जाए तो हम तैयार हैं, लेकिन पीडि़त परिवारों और किसानों की आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे।
वहीं कार्यक्रम से पहले कांग्रेस नेता अमित भटनागर को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने पर भी नेताओं ने नाराजगी जताई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वालों को दबाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।










