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60 की उम्र में शुरू किया काम! दादी-नानी के हाथ का स्वाद दे हिट हुईं रांची की रचना…व्रत के नमकीन से बनाई पहचान

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Ranchi Business Women: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली रचना आज सक्सेसफुल बिजनेस वुमन हैं. उम्र तो 60 साल है लेकिन वह अपने हाथों से अचार, पापड़, नमकीन, मसाले, ये सब बनाया करती हैं. ये सब सावन स्पेशल होता है, जिसमें सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है और प्याज-लहसुन का नामों-निशान नहीं होता. इसकी डिमांड जयपुर, असम, दिल्ली, बेंगलुरु तक है. लोग इनके हाथ से बने आइटम्स के स्वाद के दीवाने हैं.

एक बार खाकर देखिए
रचना ने लोकल 18 को बताया, “स्वाद ऐसा कि एक बार अगर आप खा लें तो हमारे पेटेंट कस्टमर बन जाएंगे. बस एक बार टेस्ट करने की देर है. ये सारी की सारी चीजें मैंने अपनी मां से सीखी हैं, तो वो जो दादी और नानी वाला स्वाद होता है वह आपको मेरे सारे अचार और पापड़ में देखने को मिलेगा. और हमारी सबसे बड़ी पूंजी है शुद्धता — इसके साथ हम किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करते.”

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सेंधा नमक से बनती है हर चीज
रचना बताती हैं, “शुद्धता ऐसी होती है कि हर चीज का बहुत ध्यान रखा जाता है. साफ-सफाई पर तो फोकस रखते ही हैं साथ ही हम हर चीज सेंधा नमक से बनाते हैं. आपको आलू का पापड़ (जो आप व्रत में भी खा सकते हैं), मूंग का पापड़, जैसा चाहेंगे वैसा मिलेगा. और यह सब बनाने के दौरान आसपास भी प्याज-लहसुन नहीं होता. यही कारण है कि खासतौर पर जो व्रत करते हैं या फिर जो सावन में शुद्ध नमकीन की तलाश में हैं, उनकी तलाश हमारे यहां आकर खत्म होती है.”

दूसरे राज्यों से आती है डिमांड
उन्होंने आगे बताया, “आज शायद ही भारत का कोई राज्य होगा जहां से इसकी डिमांड नहीं होती. कई बार ऐसा होता है कि लोग यहां से सामान खरीदकर बेंगलुरु ले जाते हैं. वहां के चार-पांच लोगों को पसंद आ जाता है और वहां से ऑर्डर आ जाते हैं. इस तरीके से माउथ पब्लिसिटी बहुत होती है. यहां मिर्च से लेकर आम के मीठे अचार तक आपको सब मिलेगा. हमारे यहां 15 से 20 वैरायटी के अचार मिल जाएंगे और एकदम दादी वाला स्वाद, क्योंकि सारे मसाले सिलौट में पीसे हुए रहते हैं.”

चाय मसाला स्पेशल
रचना बताती हैं, “हमारे पास आपको ऐसा चाय मसाला मिलेगा कि एक बार अगर आप चाय पी लें तो दोबारा कहीं और की चाय आपको पसंद नहीं आएगी. इसके अलावा हल्दी व हर तरह के मसाले भी यहां मिलते हैं और सबका बस एक सार है — शुद्धता. हम इसका पूरा ख्याल रखते हैं.

मेरा मानना है अगर आप 100% शुद्ध सामान देंगे तो आज नहीं तो कल, लोग आपके प्रोडक्ट को देर से ही सही, पहचानेंगे जरूर और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है. ऐसे में आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और इतनी डिमांड है कि पूरी नहीं कर पाती. इसलिए कुछ कारीगर भी होते हैं जो मेरी देखरेख में काम करते हैं.”

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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