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मोहम्मद युनूस: एशिया के जेलेंस्की या बांग्लादेश के नए युग की शुरुआत?

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Mohammad Yunus News: डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और बांग्लादेश के कार्यवाहक सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस चर्चा में हैं. यूनुस को ‘एशिया का जेलेंस्की’ तक कहा …और पढ़ें

युनूस बन गए हैं 'एशिया के जेलेंस्की', क्या बांग्लादेश का बंटाधार करके मानेंगे?

कई राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद यूनुस को ‘एशिया का जेलेंस्की’ कहने लगे हैं.

हाइलाइट्स

  • मोहम्मद युनूस को ‘एशिया का जेलेंस्की’ कहा जा रहा है.
  • युनूस को अमेरिका और पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है.
  • बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की संभावना है.

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी संभालते ही विश्व राजनीति में खूब हलचल मचा दी है. ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद दो और राष्ट्राध्यक्ष का नाम इन दिनों खूब चर्चा में हैं. इनमें से एक तो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की हैं और दूसरे बांग्लादेश के कार्यवाहक सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस. बांग्लादेश की राजनीति में मोहम्मद युनूस का उदय केवल एक घरेलू घटनाक्रम नहीं, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में एक नए समीकरण को जन्म देता है. कई राजनीतिक विश्लेषक यूनुस को ‘एशिया का जेलेंस्की’ कहने लगे हैं.

आखिर युनूस और जेलेंस्की के बीच समानता क्यों देखी जा रही है? क्या बांग्लादेश भी अब यूक्रेन की तरह अंतरराष्ट्रीय दबाव और सत्ता संघर्ष का नया केंद्र बनने जा रहा है? चलिये समझते हैं…

लोकप्रियता और बाहरी समर्थन
मोहम्मद युनूस और वोलोदिमीर जेलेंस्की दोनों ही सत्ता के उस मुकाम पर पहुंचे, जहां उनके पीछे अंतरराष्ट्रीय समर्थन की एक बड़ी ताकत थी. जेलेंस्की को अमेरिका और यूरोप का व्यापक समर्थन मिला, जो रूस के खिलाफ उनके संघर्ष को मजबूत करने में मदद करता रहा है. वहीं युनूस की बात करें तो उन्हें भी अमेरिका और पश्चिमी देशों का समर्थन रहा है. खास तौर से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और नोबेल पुरस्कार प्राप्तकर्ता के तौर पर उनकी प्रतिष्ठा के कारण.

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ अमेरिका और दूसरे पश्चिमी शक्तियां लगातार मानवाधिकार उल्लंघन और लोकतंत्र के हनन के आरोप लगा रही थीं. यह स्थिति वैसी ही लगती है, जैसी यूक्रेन में रूस समर्थित सरकार के खिलाफ बनी थी.

विदेशी फंडिंग और सत्ता पर कुंडली
इस बीच खबर है कि अमेरिका ने बांग्लादेश में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के नाम पर 2.10 करोड़ डॉलर यानी करीब 182 करोड़ रुपये दिए थे. USAID की तरफ यह मोटी रकम कथित रूप से सहायता के तौर पर दी गई थी. हालांकि दावा किया जाता है कि इस पैसे का इस्तेमाल तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन को हवा देने के लिए की गई. इसी उग्र आंदोलन का नतीजा था कि शेख हसीना को आनन-आफन में बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा और उनके जाने के बाद मोहम्मद यूनुस को देश की सत्ता मिल गई.

वैसे तो यूनुस बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार के मुखिया बनाए गए थे, जिनका मकसद देश में राजनीतिक अस्थिरता खत्म होने और शांति लौटने की सरकार चलाना था. हालांकि इतने महीने बीतने के बाद भी वह कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं और वहां चुनाव की उम्मीद दूर दूर तक नहीं दिख रही.

पहले लूटी वाहवाही, अब सवालों के घेरे में
मोहम्मद यूनुस की तरह जेलेंस्की भी यूक्रेन में सत्ता संभालने से पहले एक लोकप्रिय कॉमेडियन थे. उसी शोहरत और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगा सकते हैं, देश में राष्ट्रपति चुनने के लिए हुए पिछले चुनाव में लोगों ने इस कॉमेडियन को सत्ता सौंपने का फैसला किया.

यूक्रेन के लोगों को जेलेंस्की में एक नई उम्मीद दिख रही थी. रूस ने जब यूक्रेन पर आक्रमण किया तो जेलेंस्की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ डटकर खड़े हो गए. तब उनके इस स्टैंड की यूक्रेन की जनता के साथ-साथ दुनियाभर में खूब तारीफ मिली. अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देश जेलेंस्की के समर्थन में उठ खड़े हुए. उन्होंने रूस के खिलाफ जंग में यूक्रेन की बड़े पैमाने पर आर्थिक और सैन्य सहायता भी दी.

हालांकि अब इस युद्ध को तीन साल पूरे होने वाले हैं. इस युद्ध में यूक्रेन तबाह हो चुका हो चुका है और वहां लोगों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तो जेलेंस्की ने तानाशाह तक कह डाला जो बिना चुनाव कराए सत्ता में बैठा है. दरअसल जेलेंस्की ने 2019 में राष्ट्रपति पद संभाला था. वहां हर 5 साल में चुनाव होते हैं, लेकिन जेलेंस्की 6 बीतने के बाद भी सत्ता के शीर्ष पर काबिज हैं और वहां भी फिलहाल चुनाव के आसार नहीं दिख रहे.

क्या बांग्लादेश भी बनेगा अगला यूक्रेन?
बांग्लादेश की स्थिति आज उस भू-राजनीतिक मोड़ पर खड़ी है, जहां वह एक नए शीतयुद्ध का केंद्र बन सकता है. रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ी तो दुनिया मानो दो हिस्सों में बंट गई थी. एक पुतिन के समर्थक देश और दूसरे उसके विरोधी… उसी तरह बांग्लादेश की हालत होती दिख रही है.

चीन, बांग्लादेश में भारी निवेश कर चुका है और वह वहां स्थिरता देखना चाहता है. वहीं भारत भी पूर्ववर्ती हसीना सरकार के पक्ष में रहा है. दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देश युनूस की ओर झुके हुए दिखते हैं, जो बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय तनाव के केंद्र में ला सकता है.

यूक्रेन की तरह, बांग्लादेश भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है. बंगाल की खाड़ी और चीन-भारत के बीच उसकी रणनीतिक स्थिति उसे भूराजनीतिक शक्ति संघर्ष का केंद्र बना सकती है.

मोहम्मद युनूस और वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच समानताएं जरूर हैं, लेकिन बांग्लादेश और यूक्रेन की परिस्थितियां पूरी तरह समान नहीं हैं. लेकिन अगर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी, तो बांग्लादेश एक नया भू-राजनीतिक युद्धक्षेत्र बन सकता है. ऐसे में मोहम्मद युनूस की आगे की रणनीति ही तय करेगी कि वे एशिया के जेलेंस्की बनते हैं या बांग्लादेश के लिए एक नए युग की शुरुआत करते हैं.

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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