मध्यप्रदेश

शिवराज बोले- हमारे यहां टेंडर और मार्जिन न जाने क्या-क्या होता है | Shivraj said – don’t know what happens to tender and margin here

भोपालएक घंटा पहले

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आक्रामक नजर आ रहे हैं। गड़बड़ी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की मंच से क्लास लगाना हो या सस्पेंड करना हो, सब कुछ ऑन स्पॉट कर रहे हैं। अब सीएम ने प्रदेश के निर्माण कार्यों में होने वाली देरी और सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया है। भोपाल के एमपी नगर स्थित वनवासी कल्याण आश्रम में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (IOCL) के सीएसआर फंड से 3.8 करोड में बनकर तैयार हुए कौशल विकास केन्द्र के लोकार्पण कार्यक्रम में सीएम ने कंस्ट्रक्शन के सिस्टम पर हमला बोला है।

सीएम ने संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मौजूदगी में IOCL के जीएम शशि चौधरी की तरफ देखकर कहा- अभी मैं सोच रहा था कि इतनी सुन्दर बिल्डिंग बना दी। सरकार तो इतने पैसे में नहीं बना पाती। क्योंकि हमारे यहां तो टेंडर होते हैं फिर टेंडर में मार्जिन होता है। अनेकों तरह की चीजें होतीं हैं। लेकिन आपने जो पैसा दिया उसके एक-एक पैसे का सदुपयोग वनवासी कल्याण परिषद ने किया है। कौशल विकास केन्द्र बनकर खड़ा हुआ है। यहां हमारे बच्चे तीन महीने से एक साल तक रहेंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा- वनवासी कल्याण आश्रम और वनवासी कल्याण परिषद को सेवा के 70 साल हो गए हैं। जरा सोचिए अगर वनवासी कल्याण आश्रम न होता तो हमारे जनजातीय क्षेत्रों की हालत क्या होती। भारत हजारों साल पुराना इतिहास है। उसमें जनजातीय समाज अभिन्न अंग है। कई बार मुझे लगता है कि गगनचुंबी अट्‌टालिकाओं में रहने वाले लोग हमेशा चिंतित रहते हैं उन्हें नींद की गोलियां खानी पड़तीं हैं लेकिन हमारे झाबुआ अलीराजपुर के लोगों को देखिए कल की कोई चिंता नहीं। बेफिक्र होकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

समाज से जनजातीय समुदाय को दूर करने हो रहे षडयंत्र- सीएम

पिछले सालों में कई कुचक्र चले, षडयंत्र करके जनजातीय समुदाय को समाज से अलग करने की साजिश की गई। सरकार अपनी तरफ से प्रयास कर रही है सड़कों का जाल, सिंचाई के लिए पानी, स्कूल, छात्रावास की व्यवस्था की गई। यदि छात्रावास में जगह न मिले तो छात्रों को कमरे का किराया सरकार देती है। भ्रम फैलाने और समाज से तोड़ने के षडयंत्र हुए हैं। वनवासी कल्याण आश्रम को ऐसे कुचक्र तोडने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। मप्र में सामाजिक समरसता के साथ पेसा एक्ट लागू कर दिया गया है।

छात्रावास में टंट्या मामा की प्रतिमा लगाई गई है।

आजादी के जनजातीय नायकों को नहीं मिला 50 साल तक सम्मान
सीएम ने कहा स्वतंत्रता के बाद 50-60 साल तक जनजातीय योद्धाओं की मूर्तियां नहीं लगीं। कभी बड़े शहरों में जनजातीय नायकों की प्रतिमाएं नहीं लगीं। लेकिन पिछले दिनों हमने इंदौर में टंट्या मामा की प्रतिमा लगाई। पेसा एक्ट जनजातीय समाज के लिए लागू किया गया।

जमीन हथियाने किए जा रहे जनजातीय बेटियों से शादी के षडयंत्र
सीएम ने कहा ऐसे षडयंत्र होते हैं कि जमीन खरीदने के लिए जनजातीय बेटी से चौथी पांचवीं शादी कर ली। चुनाव लडवाने के लिए शादी कर ली। ये प्रेम नहीं हैं। ये लव नहीं हैं। गलत तरीके से नाम करा ली गई जमीन को वापस दिलाने का अधिकार ग्राम सभा को होगा। शादी करके जमीन ले ली तो वो भी वापस दिलाने का अधिकार पेसा में दिया गया है। कोई जनजाति भाई बहन अगर क्रेशर या खदान करना चाहे तो सरकार ने पेसा में हक दिया है। जंगल में दो तरह की उपज होती है। वनोपज को वनोपज संघ खरीदता था। लेकिन अब ये जनजातीय भाई तय करेंगे।

ऐसा न हो कि बिना बताए कोई रोहिंग्या गांव में घुस जाए
सीएम ने कहा कि पेसा एक्ट में ये प्रावधान किया है कि यदि गांव से कोई श्रमिकों को बाहर ले जाता है तो उसे ग्राम सभा को पूरी जानकारी देनी होगी। गांव में अगर कोई आएगा तो ग्राम सभा को बताना पडे़गा। कहीं ऐसा न हो कि रोहिंग्या घुस गए। इसके लिए ग्राम सभा आने और जाने वालों की पूरी जानकारी रखेगी। हम सरकारी तंत्र के माध्यम से प्रयास कर रहे हैँ कि हम इस कानून को जमीन पर लागू कर दें। इसमें वनवासी कल्याण आश्रम का सहयोग चाहिए।

छात्रावास में लगी टंट्या मामा की प्रतिमा का अनावरण सीएम और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने किया।

छात्रावास में लगी टंट्या मामा की प्रतिमा का अनावरण सीएम और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने किया।

पेसा कॉर्डिनेटर करेंगे जनजातीय समाज को जागरुक
सीएम ने कहा हम पेसा कॉर्डिनेटर बना रहे हैं। जो पेसा कानून पर लोगों को जागरूक कर सकें। सेवा के साथ अधिकार देने का अभियान शुरु कर रहे हैं। चार-चार ग्रामीण इंजीनियर एक गांव में होने चाहिए। उसी गांव के लोगों को प्रशिक्षित करके रोजगार देने का काम किया जा रहा है। षडयंत्र और कुचक्र कहीं हो तो उसे समाप्त करने का काम करें।

भोपाल के लोग समाज कार्यों में सहयोग करने में आगे- दत्तात्रेय होसबोले

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- ये अपने घर का कार्यक्रम है। हमारे भाई- बहनों ने संगठन की यात्रा में ये उपलब्धि हासिल की है। देश की संस्कृति के विकास में जनजातीय समुदाय का योगदान है। उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद़देश्य से मैं यहां आया। भोपाल को झीलों की नगरी कहते हैं ये संस्थाओं की नगरी है। इंस्टीट्यूशन खड़ा करना और उसमें सहयोग करना ये भोपाल के लोगों का स्वभाव है। ऐसा मेरा अनुभव रहा है। भोपाल के लोग ऐसे सामाजिक और राष्ट्र उत्थान के मामलों में सहयोग करते हैं।

भोपाल में जनजातीय नायकों की स्थाई प्रदर्शनी बने- दत्तात्रेय
स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय भाई बहनों का योगदान रहा है। भारत की राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रवाह और इतिहास में जनजातीय समाज का योगदान दूसरे किसी समाज से तिल मात्र कम नहीं हैं। बल्कि हर क्षेत्र में उनका योगदान रहा है। ट्रेड एंड कॉमर्स में शिक्षा, ज्ञान, स्वास्थ्य, तकनीक में जनजातीय समाज का योगदान रहा है। लेकिन दुर्भाग्य ये है कि शिक्षा पद्धति में इसका उल्लेख नहीं हुआ। झारखंड में जनजातीय समुदाय स्टील को अपने तंत्रज्ञान से तैयार करते हैं।

इस प्रकार के ज्ञान को हर पीढ़ी को देने की व्यवस्था होनी चाहिए। जिन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में योगदान दिया ऐसे जनजातीय नायकों की अस्थाई नहीं बल्कि स्थाई प्रदर्शनी होनी चाहिए। तब पब्लिक एजुकेशन का काम होगा।

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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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