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R G Kar Rape Murder Case: डॉक्टर बिटिया के निजी डिवाइवों की CBI ने करवाई जांच, बड़ा सबूत ‘गायब’, मामले में आएगा मोड़!

कोलकाता के आरजी कर रेप-मर्डर केस की जांच में सीबीआई को सनसनीखेज जानकारी हाथ लगी है. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल से जब्त किए गए डॉक्टर बिटिया के लैपटॉप, मोबाइल फोन, ब्लूटूथ से ये सुराग मिले हैं. ऐसे में यह शक गहरा गया है कि घटना के बाद सबूतों से छेड़छाड़ किया गया था. बीत महीने की नौ तारीक को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में एक जूनियर डॉक्टर का रक्तरंजित शव मिला था.

उस नृशंस घटना के बाद पूरे पश्चिम बंगाल में खूब विरोध प्रदर्शन हुए. जूनियर डॉक्टरों समेत समाज के सभी वर्गों की एक ही मांग थी ‘मुझे न्याय चाहिए’. घटना के बाद से समाज के विभिन्न वर्गों से मांग उठ रही है. इस बीच सीबीआई का कहना है कि इस घटना के कई सबूत खो गए हैं. वैसे पुलिस ने दावा किया था कि कोई सबूत गायब नहीं हुए थे.

पुलिस के मुताबिक अस्पताल प्रशासन ने सबसे पहले शव को घेरे में लेकर वारदात स्थल से कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए थे. लेकिन अब एक बड़ी पहेली सामने आई है. फोरेंसिक परीक्षणों से पता चला कि जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और ब्लू-टूथ पर कोई उंगलियों के निशान नहीं थे. अब सवाल यह है कि डॉक्टर बिटिया की हत्या के बाद किसी ना किसी ने इन सभी उपकरणों से उंगलियों के निशान मिटाए होंगे. इससे कि घटना के कई अहम सबूत मिट गए लगते हैं.

सीबीआई का शिकंजा
इस बीच सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार के मामले की भी जांच तेज कर चुकी है. वह इस मामले में गिरफ्तार पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर शिंकजा कस रही है. दूसरी तरह कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने तीन अन्य डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है.

इस बीच सीबीआई मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सप्तर्षि चटर्जी से सवाल जवाब कर रही है. सप्तर्षि को वह लगातार बुला रही है. उधर, संदीष घोष के बारे में सीबीआई ने नया खुलासा किया है. घटना के दिन सुबह-सुबह संदीष घोष ने अपने ड्राइवर को फोन किया था. वैसे संदीप घोष ने कहा था कि उन्हें सुबह 10:10 बजे घटना की जानकारी मिली. ऐसे में सीबीआई यह जांच कर रही है कि संदीप घोष ने सुबह-सुबह ड्राइवर को क्यों फोन किया था. वह उनकी गाड़ी के लोकेशन की भी जांच कर रही है.

Tags: Kolkata Police, West bengal


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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