देश/विदेश

लाल बालों और धनुष जैसे होंठों वाली कैबरे डांसर पर जब कपूरथला के राजा का दिल आया

हाइलाइट्स

सिख प्रिंस ने जैसे ही स्टेज पर कैबरे डांसर को थिरकते देखा, उसका दीवाना हो गयाराजकुमार पहले से विवाहित था लेकिन उसको इस बात की कतई परवाह नहीं थीपिता महाराजा जगतजीत सिंह ने दोनों के प्यार का बहुत विरोध किया

दिल्ली के पृथ्वी राज रोड कब्रिस्तान में एक टूटी फूटी सी कब्र है.  इसके नीचे कपूरथला की विदेशी महारानी शांति से लेटी है, जो इंग्लैंड में पैदा हुई. कैबरे डांसर बनी. फिर महाराजा से प्यार हुआ . वह महारानी बन गई. वह दिल्ली के अस्पताल में बेनाम मौत मरी. अब उसकी कब्र का  कोई पुरसाहाल नहीं.  कभी इस महारानी की भी एक लव स्टोरी थी.

कपूरथला के राजकुमार परमजीत सिंह ने जब पेरिस में उस सुंदर, छरहरी और सौंदर्य से भरपूर बलखाती हुई कैबरे डांसर को देखा तो एकझटके में उसका दीवाना हो गया. उस प्रोग्राम में वह पत्नी के साथ बैठा था. शो खत्म होने के बाद सिख राजकुमार स्टेज के पीछे उस डांसर युवती के पास गया. फूलों का गुलदस्ता दिया. इसके बाद एक ऐसी लव स्टोरी शुरू हुई. जिसका अंतिम सफर इस कब्र तक आकर खत्म हो गया. पिता महाराजा के विरोध के बाद भी ना केवल वह उसके साथ रहने लगा बल्कि शादी करके उसे महारानी भी बना दिया. इस कैबरे डांसर का नाम था स्टेला मुडगे.

स्टेला का जन्म 13 अक्टूबर, 1904 को इंग्लैंड के केंट में हुआ था. उसके बाल लाल थे, होंठ धनुषाकार. पैर लंबे और पतले. वह एक मशहूर थिएटर कंपनी के साथ पेरिस गई और किस्मत ने उसे कैबरे डांसर बना दिया. उसके शो हिट होने लगे. वह बिजली की थिरकती और मचलती थी.

उसी समय पंजाब के कपूरथला का सिख राजकुमार अपनी खूबसूरत बीवी वृंदा के साथ पेरिस घूमने गया था. वह स्टेला का कैबरे शो देखने गया. जैसे ही उसने 18 साल की स्टेला को स्टेज पर बिजलियां गिराते देखा, वो फट से उसका दीवाना ही हो गया. शो खत्म हुआ. सिख राजकुमार स्टेज के पीछे गया. स्टेला को फूलों का खूबसूरत गुलदस्ता भेंट किया.  फिर राजकुमार ने उसे डिनर का न्योता दिया. फिर एक प्रेम कहानी चल पड़ी. जहां स्टेला जाती, राजकुमार भी साथ होता. कैबरे शो में वह हमेशा मौजूद रहता.

दिल्ली के पृथ्वीराज रोड स्थित कब्रिस्तान में रानी स्टेला की कब्र, जो बुरे हाल में है.

कपूरथला के होने वाले इस राजा का विवाह हिमाचल प्रदेश के जुब्बल राज्य की खूबसूरत राजकुमारी वृंदा देवी से हुआ था. जब वृंदा की सगाई हुई, तब वह 07 साल की थी. परमजीत 09 साल के. तब परमजीत सिंह के पिता महाराजा जगतजीत सिंह कपूरथला पर शासन कर रहे थे. उन्होंने वृंदा को पढ़ने के लिए पेरिस भेज दिया.

बहू जब फ्रांस से पढ़कर लौटी तो पूरी फ्रांसीसी बन चुकी थी
महाराजा जगतजीत सिंह फ्रांसीसी प्रेमी थे. उन्हें लगता था कि उनकी होने वाली बहू को फ्रेंच बोलना चाहिए और फ्रेंच शिष्टाचार से परिचित भी होना चाहिए. जब ​​वृंदा परमजीत से शादी करने के लिए भारत लौटी, तो ससुर यह देखकर हैरान रह गए कि उसने न केवल फ्रांसीसी तौर-तरीके सीख लिए थे बल्कि दिमाग से भी पश्चिमी हो चुकी थी. वृंदा ने तीन बेटियों को जन्म दिया. जब परमजीत ने स्टेला से पींगे बढ़ानी शुरू कीं तो वृंदा को कोई एतराज नहीं हुआ.

कपूरथला की विदेशी रानी स्टेला मुडगे, जो पहले कैबरे डांसर थी.

विदेशी माशूका को राजकुमार चुपचाप भारत ले आया
परमजीत अपनी विदेशी माशूका पर इतना दीवाना हो चुका था कि उसके बगैर रहना मुश्किल हो गया. लिहाजा वो उसको गुपचुप भारत ले आया. उसके स्टेला को एक शानदार घर में रखा. गुप्त तरीके से उससे मिलने लगा. परमजीत जितनी कोशिश करता कि ये रिश्ता गोपनीय रहे. स्टेला उतना ही इसे रिश्ते के बारे में खुलेआम घोषणा करने लगी.

बाप ने कहा ये शादी नहीं हो सकती
जब ये खबर राजमहल में पहुंची तो तहलका मच गया. राजकुमार को रिश्ते के बारे में पिता को बताना ही पड़ा. कहना पड़ा कि वह स्टेला से शादी करना चाहता है. पिता महाराजा जगतजीत आगबबूला हो गये. साफ कह दिया कि ये शादी किसी हालत में नहीं हो सकती. हालांकि कुछ सालों पहले उन्होंने खुद एक स्पेनी डांसर से शादी की थी. ये रिश्ता टूट गया क्योंकि राजा ने विदेशी बीवी को बेटे के साथ प्यार करते हुए पकड़ लिया था. ये बेटा कोई और नहीं बल्कि परमजीत ही था. बाद में महाराजा ने विदेशी बीवी से रिश्ता तोड़कर उसे लंदन भेज दिया.

स्टेला के राजमहल में प्रवेश पर पाबंदी लग गई
महाराजा जगतजीत सिंह ने तो स्टेला के कपूरथला के महल में ही प्रवेश पर पाबंदी लगा दी. इसलिए उसने भी कपूरथला राजमहल को कभी पसंद नहीं किया. उसे ये भी शिकायत रहती थी कि महल का हर नौकर जासूस है. हर नौकरानी दुश्मन. तब परमजीत ने कपूरथला में ही राजमहल से बाहर उसके लिए कॉटेज बनवाई, जिसका नाम था कि ‘स्टेला कॉटेज’. स्टेला जब कपूरथला में होती तो वहीं रहती थी.

शिमला का सेसिल होटल, जहां आखिरी बरसों में रानी स्टेला रहने लगी थी.

अब राजा ने राजकुमारी की दूसरी शादी तय की
महाराजा बेटे की दूसरी शादी कराना चाहता था ताकि वंश को उससे एक बेटा मिले. लेकिन स्टेला से तो कतई नहीं. जब महाराजा ने बेटे के लिए हिमाचल में कांगड़ा की एक राजपूत लड़की से रिश्ता तय किया तो 1932 में मन मारकर परमजीत को शादी करनी पड़ी. हालांकि इस काम के लिए महाराजा को उसी स्टेला की मदद लेनी पड़ी जिसे वह कतई पसंद नहीं करता था.

महाराजा ने स्टेला को 10 लाख रुपए दिये
वह स्टेला के पास पहुंचा, उसे 10 लाख रुपए दिए. ये वादा लिया कि वह राजकुमार को शादी के लिए राजी करेगी. शादी तो किसी तरह हो गई. लेकिन राजकुमार नई बीवी के पास जाने को तैयार नहीं था.  स्टेला ने भी उसको दूसरी बीवी के पास जाने के लिए कहा. दोनों में भयंकर झगड़ा हुआ. परमजीत को दूसरी बीवी के पास जाना पड़ा.

अगले ही दिन स्टेला को लेकर इंग्लैंड चला गया
परमजीत इसके बाद कभी अपनी दूसरी बीवी के पास नहीं गया. अगले ही दिन स्टेला के साथ भारत छोड़कर चला गया. 1937 में इंग्लैंड के एक गुरुद्वारे में स्टेला और परमजीत ने शादी कर ली. अब स्टेला का नाम बदलकर नरिंदर कौर हो गया.

स्टेला का रानी बनना और महल से निकलना
परमजीत 1948 में महाराजा बने और तब वह घोषित तौर पर वह उनकी रानी बन गई. हालांकि 1955 में महाराजा बुरी तरह बीमार पड़ा. उसका निधन हो गया. स्टेला पर आरोप लगाया गया कि उसने कपूरथला से बहुत सारा धन, सोना, हीरे आदि हड़पा. महाराजा परमजीत उससे नाराज हो गया. पहली महारानी वृंदा के परिवार ने तय कर लिया कि अब स्टेला को बीमार महाराजा के पास फटकने भी नहीं दिया जाएगा. वृंदा ने परमजीत के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद स्टेला महल से बाहर निकाल दिया गया.

इंग्लैंड गई वापस भारत लौटी और शिमला में रहने लगी
स्टेला इंग्लैंड चली गईं लेकिन वहां उसे बोरियत महसूस होने लगी. वह भारत वापस आईं. दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में एक साधारण से घर में रहने लगीं. लेकिन दिल्ली में भी जब अकेलापन महसूस हुआ तो वो 1957 में शिमला आ गईं. वहां वह होटल सेसिल के एनेक्सी में रहने लगीं.

शराब के नशे में होटल से गिरी और मृत्यु
शिमला के लोगों का कहना है कि वह कामुक जीवन जीती थी. खूब शराब पीने लगी. जनवरी 1984 में नशे में धुत होकर सेसिल एनेक्सी में अपने अपार्टमेंट में गिर गई. कई दिनों तक बेहोश रही. पुलिस ने दरवाजा तोड़कर उसे शिमला सेनेटोरियम ले गई. वहां से उसे सेंट स्टीफन अस्पताल, दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां 23 फरवरी, 1984 को उसकी मृत्यु हो गई.

नई दिल्ली के पृथ्वीराज रोड कब्रिस्तान में उसके अंतिम संस्कार में कुछ ही लोग शामिल हुए. अब भी उसकी कब्र वहां है लेकिन कोई नहीं जानता कि वो कौन है. कब्र टूटती जा रही है.

Tags: Love, Love Stories, Love Story, Royal wedding


Source link

एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!