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अनोखा है रांची का टॉपर दिव्यांश…क्लास बंक किया, एग्जाम टाइम में भी नहीं छोड़ा जिम, रिजल्ट 99% – News18 हिंदी

रांची: अक्सर आपने बोर्ड के टॉपर्स बच्चों के मुंह से एक बात जरूर सुनी होगी कि सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें या फिर दिन-रात एक करके पढ़ाई की. कभी भी क्लास बंक नहीं किया. तब जाकर सफलता मिली. लेकिन आज हम आपको रांची के टॉपर दिव्यांश के बारे में बताने वाले हैं, जिन्होंने 99.4% लाकर 10th में टॉप किया. इनकी कहानी बाकी टॉपर से काफी अलग है.

दिव्यांश ने लोकल 18 से खास बात की और बताया मैं जितना भी पढ़ता था, मन लगाकर और फोकस के साथ पढ़ता था. हमेशा से मन में एक जुनून था कि स्टेट टॉपर बनू. आज यह सपना सच हुआ है. लेकिन मैंने कभी भी कोई पढ़ाकू बच्चे की तरह साल भर जी तोड़कर मेहनत नहीं की. बल्कि, एग्जाम के समय जमकर पढ़ाई की.

एंटरटेनमेंट व पढ़ाई को किया बैलेंस
दिव्यांश बताते हैं कि शुरुआती दिनों में तो मैंने फिजिक्स के कई क्लास बंक किये. मेरी स्पोर्ट में काफी रुचि है. तरह-तरह के गेम एक्सप्लोर करने का बहुत शौक है. मुझे ऐसा लगता है कि जिंदगी मस्ती से जीने के लिए मिली है. इसलिए हर चीज एक्सप्लोर करके और उसका आनंद लेकर बिताना चाहिए.

एग्जाम के समय मैंने 15 से 16 घंटा पढ़ाई की, लेकिन सिर्फ एग्जाम के समय. कई बार ऐसा होता था कि रात-रात भर जागता था और बिना सोए ही एग्जाम दे आता था. एग्जाम के समय भी मैं जिम जाना नहीं छोड़ता था. रात के 10 से 11 बजे भी जिम जरूर जाता था. क्योंकि जिम जाने से मैं बहुत रिलैक्स फील करता था.

क्वालिटी है जरूरी
दिव्यांश बताते हैं कि सबसे अधिक जरूरी है क्वालिटी. कुछ भी पढ़ें, मन लगाकर पढ़ें. थोड़े समय ही पढ़ें, लेकिन पूरे फोकस के साथ पढ़ें. आप 10 घंटे पढ़ें और आपको कुछ समझ में ना आए उससे अच्छा है 2 घंटे पढ़ें. इसके साथ ही फिल्म और वेब सीरीज भी मैंने लगातार देखी. मैंने किसी चीज को छोड़ा नहीं. बल्कि, सब चीज के बीच में एक तालमेल बैठा कर चला और यह काफी जरूरी भी है.

वहीं, मेरे माता-पिता ने भी कभी भी मेरे ऊपर कोई प्रेशर नहीं दिया कि तुम यह करो या फिर तुम खेल क्यों रहे हो. उन्होंने हमेशा मुझे फ्री छोड़ा. मेरे पिताजी उषा मार्टिन में इंजीनियर हैं. वह हमेशा मुझे मोटिवेट किया करते थे. एक दोस्त की तरह हमेशा गाइड किया करते थे. यही कारण है कि आज में हर चीज बैलेंस करके टॉपर बन पाया हूं.

अमीर बनने का है सपना
दिव्यांश ने बताया कि लोग डॉक्टर-इंजीनियर या जाने क्या-क्या बनना चाहते हैं. लेकिन मेरा एक ही सपना है- मैं बहुत अमीर बनना चाहता हूं. इतना अमीर कि किसी मॉल में जाऊं तो बिना प्राइस टैग देखे हर वह चीज खरीद पाऊं जो मैं खरीदना चाहता हूं, बस यही मेरा सपना है.

Tags: CBSE 10th Class Result, Jharkhand news, Local18, Ranchi news, Success Story


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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