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Inside story of Dalit massacre in Sagar | जिसे मारा उसके खिलाफ 4 घंटे पहले पर दर्ज हुआ था केस; बहन बोली- पुलिस ने मेरी FIR ही बदल दी

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सागर24 मिनट पहलेलेखक: संतोष सिंह

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सागर के बरोदिया नौनागिर गांव में 20 वर्षीय दलित युवक नितिन उर्फ लालू अहिरवार की पीट-पीटकर हत्या के मामले में प्रदेश में राजनीति गरमाई हुई है। पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जिस नितिन अहिरवार की हत्या की गई है, उसके खिलाफ हत्या से चार घंटे पहले ही खुरई ग्रामीण थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

नितिन के परिवार का दावा है कि 2019 में दर्ज एससी-एसटी और धमकी के प्रकरण में आरोपी समझौते का दबाव बना रहे थे। मर्डर से पहले आरोपी उसके घर धमकी देने भी आए थे। नितिन की बहन बोली कि मुझे इंसाफ चाहिए। दैनिक भास्कर की पड़ताल में कई नए तथ्य सामने आए हैं। क्या है हत्या के पीछे की पूरी कहानी सिलसिलेवार पढ़ें…

24 अगस्त, शाम 8.30 बजे, खुरई ग्रामीण थाने से 26 किमी दूर बरोदिया नौनागिर गांव से पुलिस को सूचना मिलती है कि गांव के सरपंच पति, उनके बेटे और अन्य लोगों ने मिलकर एक युवक को पीट-पीट कर मरणासन्न कर दिया है। पुलिस पहुंची, तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। मौके पर 20 वर्षीय नितिन उर्फ लालू अहिरवार अधमरा पड़ा था। पास में उसकी मां निर्वस्त्र खड़ी थी और रो रही थी। भाई से लिपट कर बहन के भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

पुलिसवालों ने टॉवल से महिला के शरीर को ढंका और इसके बाद गांव की एक महिला से साड़ी मांग कर दी। पुलिस नितिन को लेकर बीएमसी (बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज) अस्पताल पहुंची, तो रात के 11.30 बज चुके थे। डॉक्टर ने चेक किया और नितिन को मृत घोषित कर दिया। नितिन की मौत की पुष्टि होते ही हंगामा मच गया क्योंकि आरोपी भाजपा नेता और मृतक दलित था। इस मामले में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के ट्वीट के बाद राजनीति शुरू हुई। दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, भीम आर्मी के चंद्रशेखर, बसपा प्रमुख मायावती के बयान आए।

खबर में आगे बढ़ने से पहले मृतक पर चार घंटे पहले दर्ज हुई एफआईआर के बारे में जान लेते हैं…

नितिन के साथ मारपीट की वारदात रात 8.30 बजे हुई थी। इससे चार घंटे पहले शाम 4.39 बजे नितिन और उसके चचेरे भाई शुभम अहिरवार के खिलाफ खुरई ग्रामीण थाने में एक एफआईआर दर्ज हुई थी। ये एफआईआर बरोदिया नौनागिर गांव के बंगला मोहल्ला निवासी नपीस खान ने दर्ज कराई थी। नपीस ने शिकायत में बताया है कि उसकी कस्बे में ही मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान है। 23 अगस्त की रात 11.30 बजे गांव के नितिन और शुभम मेरे मोहल्ले में घूम रहे थे। इतनी रात घूमने पर मैंने टोका तो दोनों गाली देते हुए जान से मारने की धमकी देने लगे। विवाद के समय मौके पर फहीम खान, सुरेश राय व अमरजीत भी मौजूद थे। पुलिस ने नितिन व शुभम के खिलाफ मारपीट व धमकी देने का प्रकरण दर्ज किया था। नीचे इस एफआईआर को पढ़ सकते हैं।

नितिन के शव के साथ लिपटकर रोती उसकी बहन।

नितिन के शव के साथ लिपटकर रोती उसकी बहन।

23 अगस्त की रात ही पुलिस ने नितिन के बड़े भाई विष्णु अहिरवार को उठाया था

नितिन की बड़ी बहन ने दैनिक भास्कर को बताया कि 23 अगस्त की रात में खुरई ग्रामीण थाने की पुलिस मेरे घर आई थी। मेरे भाई विष्णु अहिरवार को पुलिस उठा कर ले गई थी। उसका दावा है कि ये सब गांव के सरपंच पति कोमल सिंह ठाकुर और उनके बेटे के दबाव में हुआ था। खुरई ग्रामीण थाने की पुलिस का कहना है कि विष्णु के खिलाफ गांव के लोगों ने शिकायत की थी। उनका कहना था कि विष्णु अहिरवार उनके घरों में रात में पथराव करता है और धमकी देता है। इसकी छानबीन करने पुलिस गांव में गई थी। विष्णु का आपराधिक रिकॉर्ड है। उसे भोपाल एसटीएफ भी चोरी के एक मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। आपराधिक रिकॉर्ड और ग्रामीणों की शिकायत पर उसे हिरासत में लेकर पुलिस थाने लौट आई थी। इसके बाद उसके खिलाफ 151 में चालान कर अगली सुबह एसडीएम कोर्ट में पेश किया गया था। जहां से उसे जमानत मिल गई थी।

अब जानते हैं कि भीड़ का गुस्सा क्यों भड़का

ग्रामीणों ने बताया कि 24 अगस्त की रात 8.00 से 8.30 बजे का वक्त था। नितिन (मृतक) हाथ में तलवार लहराते हुए बस स्टैंड पहुंचा। बस स्टैंड पर सुशील उर्फ गोलू सोनी की ज्वेलरी की दुकान है। इसी दुकान पर सरपंच का बेटा विक्रम सिंह ठाकुर बैठा था। नितिन तलवार लहराते आया और विक्रम को मारने दौड़ा, सुशील ने बीच-बचाव की कोशिश की तो उसकी अंगुली कट गई। इसके बाद वहां मौजूद लोग आक्रोशित हो गए। सभी ने मिलकर नितिन के हाथ से तलवार छीन ली और उसे लात-घूसों से पीटने लगे। इसी मारपीट में वह इतना घायल हुआ कि उसकी कुछ देर बाद मौत हो गई। पुलिस जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है।

मृतक की बहन का दावा, 5 साल पूर्व के विवाद में समझौते का दबाव डाल रहे थे आरोपी

हालांकि नितिन उर्फ लालू अहिरवार (20) की बहन का दावा दूसरा ही है। उसने बताया कि 2019 में कोमल सिंह ठाकुर, विक्रम सिंह ठाकुर, छोटू रैकवार, आजाद ठाकुर, पुष्पेंद्र ठाकुर, अंकित ठाकुर से मेरा विवाद हुआ था। आरोपियों ने तब उसके साथ मारपीट और धमकी देते हुए छेड़छाड़ की वारदात को अंजाम दिया था, लेकिन पुलिस ने सिर्फ मारपीट, धमकी और एससी-एसटी का प्रकरण ही दर्ज किया था। ये प्रकरण कोर्ट में लंबित है। इसी मामले में आरोपी मेरे परिवार पर समझौता करने का दबाव डाल रहे थे। घटना से पहले रात करीब 7.30 बजे सरपंच पति कोमल सिंह ठाकुर, आजाद ठाकुर, विक्रम सिंह ठाकुर उसके घर समझौते के लिए बात करने पहुंचे थे। मेरी मां ने कहा था कि समझौता कर लेंगे, लेकिन वे जिद पर अड़ गए कि अभी समझौता नहीं किया तो सभी को जान से मार डालेंगे। उनके जाने के बाद मेरा छोटा भाई नितिन घर से बाजार सब्जी लाने के लिए निकला था।

मां को संदेह था कि भाई के साथ कुछ अनहोनी हो सकती है

आरोपियों की धमकी से मां डर गई थी। नितिन सब्जी लेने निकला तो मां ने आशंका व्यक्त करते हुए मुझसे कहा कि ऐसा न हो कि वो सब्जी लेने गया है और ये लोग उससे कुछ बोलने लगे। फिर मां ने कहा कि मैं बाजार जाकर उसे देखकर आती हूं। मेरी मां बाजार पहुंची तो देखा कि आजाद ठाकुर, कोमल सिंह, विक्रम सिंह, विजय ठाकुर, अंकित, गोलू खान, लालू खान, गोलू सोनी और अन्य लोग घेरकर मेरे भाई नितिन को बुरी तरह से लात-घूसों से मार रहे थे। मां के निकलने के कुछ देर बाद मैं भी पीछे-पीछे पहुंच गई थी। देखा कि ये लोग मेरे भाई नितिन को मार रहे हैं। एक दिन पहले ही मेरे भाई विष्णु को पुलिस लेकर गई थी। उसका मोबाइल भी मेरे पास था। उन पुलिस वालों का नंबर भी था। मैंने जैसे ही पुलिस को सूचना देने के लिए मोबाइल पर कॉल डायल किया कि कोमल सिंह ठाकुर ने मोबाइल छीन लिया और मुझे थप्पड़ मारने लगा।

मेरी मां को निर्वस्त्र कर दिया, पुलिस वालों ने टॉवल लपेटा था

कोमल सिंह ने मेरी मां की साड़ी और पेटीकोट तक निकाल दिए। वो निर्वस्त्र होकर भी मेरे भाई नितिन को बचाने की जद्दोजहद करती रही। गोलू सोनी, गोलू खान, लालू खान मुझे और मेरी मां को पकड़े हुए थे। वहीं अंकित ठाकुर लोहे का पाइप लिए मेरे भाई के गले पर पैर रखकर खड़ा था। कोमल, आजाद, विक्रम व विजय उसे मार रहे थे। कोमल ने उसके हाथ को पैर से दबाव रखा था। वह बेहोश हो गया था, तब भी वे उसे पीटते रहे। पुलिस के आने से पहले सभी भाग निकले। पुलिस वालों ने ही मेरी निर्वस्त्र हो चुकी मां को टॉवेल से लपेटा और बाद में दूसरे की साड़ी लाकर दी। हम उसी हालत में नितिन को लेकर पहले सीएचसी और वहां से रेफर करने पर बीएमसी अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने मेरे भाई नितिन को मृत घोषित कर दिया।

नितिन की बहन ने एसपी को एक पत्र लिखकर मध्यांचल ग्रामीण बैंक और विनोद कोरी की दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित कराने की मांग की है। उसने पत्र में लिखा है कि दोनों सीसीटीवी में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई होगी। इससे सब कुछ साफ हो जाएगा कि क्या घटना हुई थी।

पुलिस सुरक्षा के साथ शस्त्र लाइसेंस भी मांगा

नितिन की हत्या से उसका पूरा परिवार डरा हुआ है। उसकी बड़ी बहन ने एसपी को पत्र लिखा है कि आरोपी राजनीतिक दबदबे और प्रभावशाली हैं। अपराधियों ने उसके मकान में तोड़फोड़ कर दी और गृहस्थी का सामान भी नष्ट कर दिया। पूरे परिवार को दबंगों से जान का खतरा है। ऐसे में 24 घंटे परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस बल लगाया जाए। साथ ही शस्त्र का लाइसेंस भी दिया जाए। एसपी ने वारदात के बाद से ही गांव में पुलिस बल तैनात कर रखा है।

पहले हत्या का प्रयास, फिर दर्ज की हत्या

अब बात उस एफआईआर की, जो पीड़ित परिवार की ओर से खुरई ग्रामीण थाने में दर्ज कराई है। ये एफआईआर नितिन की बड़ी बहन ने दर्ज कराई है। उसने शिकायत में बताया कि 24 अगस्त की रात 8.30 के लगभग गांव के विक्रम ठाकुर, कोमल ठाकुर और विजय ठाकुर हाथों में डंडा लिए आए और पुराने विवाद को लेकर गाली-गलौज करने लगे। सभी ने घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस आए और गाली देते हुए मेरे भाई नितिन उर्फ लालू के बारे में पूछने लगे। लालू घर पर नहीं था।

वे फ्रिज सहित घर का सामान तोड़ कर मां के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। इसके बाद वे बस स्टैंड की ओर चले गए। वहां से शोर आने पर मैं और मेरी मां दौड़ कर पहुंची तो देखा कि मेरा भाई नितिन उर्फ लालू अहिरवार को विक्रम ठाकुर, विजय ठाकुर, आजाद ठाकुर, कोमल ठाकुर, लालू खान, इस्लाम खान, गोलू सोनी, नपीस खान, वहीद खान और तीन-चार अन्य लोग लाठी-डंडे से मार रहे थे। बीच-बचाव करने गई तो लालू खान ने उसे थप्पड़ मारे। उसके हाथ पर भी किसी ने डंडे से मारा। मेरी मां के हाथ और कलाई में चोट आई। भाई लालू उर्फ नितिन के दोनों पैर, हाथ, पीठ, सीने में चोट थी। दोनों हाथ-पैर टूट गए थे और खून बह रहा था। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ बलवा, हत्या के प्रयास, एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। नितिन की मौत के बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास को हत्या में तब्दील कर दिया है।

दावे और एफआईआर में घटना का अलग-अलग जिक्र

पुलिस एफआईआर और नितिन के बहन के दावे में अलग-अलग बातें सामने आ रही है। दावे में पहले समझौते के लिए दबाव डालने की बात कही जा रही है। एफआईआर में सीधे घर में तोड़फोड़ का जिक्र किया गया है। दावे में नितिन के सब्जी लेने बाजार जाने की बात कही जा रही है। एफआईआर में दबंग पीड़ित के घर से निकलने के बाद बस स्टैंड पहुंचे, तब नितिन मिला और उसके साथ मारपीट की बात है। दावे में कहा जा रहा है कि आरोपियों ने मृतक की मां को निर्वस्त्र कर दिया था। एफआईआर में इसका जिक्र कहीं नहीं है।

बहन का दावा, पुलिस ने एफआईआर सब कुछ बदल दिया

दावे और एफआईआर में अंतर होने पर मृतक की बहन कहा कि “पुलिस ने मेरे साथ धोखा किया है। मैंने जो शिकायत की थी, उस शिकायत की बजाए, पुलिस ने एफआईआर की भाषा बदल ली। एफआईआर में कहीं भी मां के निर्वस्त्र किए जाने और मेरे साथ मारपीट का जिक्र नहीं है। दरअसल ये परिवार प्रभावशाली है और इनका राजनीतिक रसूख है। क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री भी इसी परिवार पक्ष में हैं। राजनीति चल रही है। उनकी पार्टी हिन्दू-हिन्दू कहती है, बहन-बहन करते हैं, आज बहनों को सरेआम बेपर्दा कर मारा जा रहा है। उनके बेटे को चार-पांच लोग जान से मार डाल रहे हैं, उनकी बहनों को छेड़ा जा रहा है।

चार-भाई बहनों में सबसे छोटा था नितिन

नितिन चार-भाई बहनों में सबसे छोटा था। सबसे बड़ा रोहित अहिरवार, विष्णु अहिरवार इसके बाद 20 वर्षीय उनकी बहन और सबसे छोटा नितिन उर्फ लालू अहिरवार था। पिता रघुवीर अहिरवार का एक पैर खराब है। उनका इलाज चल रहा है। वो कोई काम नहीं कर पाते हैं। इसी तरह नितिन की मां भी बीमार रहती है। नितिन ने 8वीं तक पढ़ाई की थी। इसके बाद वह मजदूरी करने लगा था। उसकी बड़ी बहन के मुताबिक पिता की बीमारी के चलते मेरे तीनों भाई मजदूरी करने लगे। सिर्फ मैं ही सागर स्थित कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रही हूं। अभी मेरी बीए फर्स्ट ईयर की परीक्षा समाप्त हुई है। भाई ही मुझे पढ़ा रहे हैं। रक्षाबंधन से पहले आरोपियों ने मेरा भाई छीन लिया।

मुझे इंसाफ चाहिए, अभी भी आरोपियों के घर नहीं तोड़े गए

नितिन की हत्या के बाद पीड़ित परिवार और राजनीतिक दल से जुड़े लोगों ने उसका शव रखकर प्रदर्शन किया था। तब मौके पर पहुंचे सागर कलेक्टर दीपक आर्या ने 10 बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया था कि दो दिन के अंदर आरोपियों के घर तोड़ दिए जाएंगे। पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। 10 लाख रुपए आर्थिक सहायता दी जाएगी। 24 घंटे के अंदर सभी आरोपी गिरफ्तार हो जाएंगे। पुनर्वास की व्यवस्था होगी और नुकसान की क्षतिपूर्ति की जाएगी। परिवार की सुरक्षा में पुलिस बल तैनात किया जाएगा और परिवार के नाम पर शस्त्र लाइसेंस दिया जाएगा। पीड़ित परिवार के सदस्यों को पुलिस परेशान (अनावश्यक) नहीं करेगी। इसके बाद ही परिवार के लोगों ने नितिन के शव का अंतिम संस्कार किया था।

नितिन की बहन का दावा है कि प्रशासन ने अपना आश्वासन पूरा नहीं किया। अब तक आरोपियों के घर नहीं तोड़े गए। सभी की गिरफ्तारी नहीं हुई। 10 लाख की बजाय घटना वाले दिन 1 लाख रुपए नकद दिए थे। इसके अलावा 4 लाख और कुछ हजार रुपए पिता के खाते में आए हैं। घर का सामान भी प्रशासन ने कुछ भिजवाया है। पुलिस बल भी तैनात है, लेकिन मुझे पूरा इंसाफ चाहिए।

दो साल पहले भी दोनों परिवारों में हुआ था विवाद

नितिन अहिरवार और आरोपियों के परिवार के बीच ये तीसरा विवाद था। 2019 के बाद 23 मई 2021 को भी विक्रम सिंह ठाकुर से पीड़ित नितिन अहिरवार के परिवार का खेत की मेड़ को लेकर विवाद हुआ था। इसमें विष्णु अहिरवार पर बलवा, मारपीट, आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसमें विष्णु ने फायरिंग की थी और गांव का माहौल बिगड़ा था। इस मामले में विष्णु के चाचा राजेन्द्र भी आरोपी हैं। यह मामला अभी न्यायालय में चल रहा है।

गांव वालों का दावा, मृतक नितिन, उसके भाई विष्णु और चाचा का आपराधिक रिकॉर्ड

नितिन की पीट पीटकर हत्या की घटना को कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। आरोपी चाहते तो उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले भी कर सकते थे। जब हमने गांववालों के गुस्से की वजह जब खंगालने की कोशिश की तो कुछ और ही सामने आया। ग्रामीण दहशत में हैं। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नितिन, उसका भाई विष्णु और चाचा राजेन्द्र आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। तीनों के खिलाफ मारपीट, धमकी, चोरी सहित अन्य प्रकरणों में एफआईआर दर्ज हैं। नितिन और विष्णु पर अकेले 7-7 एफआईआर दर्ज हैं। राजेंद्र पर 13 मामले दर्ज हैं। विष्णु को तो चोरी के मामले में कुछ समय पूर्व भोपाल एसटीएफ भी गिरफ्तार कर चुकी है। गांववालों का कहना है कि जिस परिवार के मां-पिता बीमार चल रहे हो, उस घर में फ्रिज से लेकर कई कीमती सामान कहां से आ गए। सिर्फ मजदूरी से क्या ये संभव है? ग्रामीणों इसके दावे में दोनों का अपराधिक रिकॉर्ड भी पेश किया है, जिसे नीचे देख सकते हैं।

नितिन का आपराधिक का रिकॉर्ड।

नितिन का आपराधिक का रिकॉर्ड।

नितिन के भाई राजेंद्र का आपराधिक रिकॉर्ड। उस पर 13 केस दर्ज हैं।

नितिन के भाई राजेंद्र का आपराधिक रिकॉर्ड। उस पर 13 केस दर्ज हैं।

नितिन के भाई विष्णु पर सात अपराध दर्ज हैं।

नितिन के भाई विष्णु पर सात अपराध दर्ज हैं।

आठ आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

एएसपी संजीव कुमार उइके के मुताबिक नितिन हत्याकांड में मुख्य आरोपी विक्रम सिंह ठाकुर, आजाद ठाकुर, इस्लाम खान, गोलू उर्फ सुशील कुमार सोनी, अनीश खान, गोलू उर्फ फहीम खान, अभिषेक रैकवार, अरबाज खान गिरफ्तार हो चुके हैं। वहीं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष कोमल सिंह ठाकुर, विजय सिंह ठाकुर, नपीस खान, लालू खान, वहीद खान फरार चल रहे हैं।

पहले सीधी, अब सागर : अरुण यादव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने एक लेटर अपने सोशल पोस्ट के साथ अटैच कर लिखा कि, ‘सीधी में भाजपा विधायक केदार शुक्ला के प्रतिनिधि प्रवेश ने आदिवासी युवक पर पेशाब किया था, अब खुरई में मंत्री भूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधि ने परिजनों के साथ मिलकर दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, दलित-आदिवासियों पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं, क्योंकि अपराधियों को भाजपा का संरक्षण प्राप्त है।’

पीड़ित परिवार से जल्द मिलने आऊंगा : चंद्रशेखर

भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर ने इस घटना पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि “मुख्यमंत्री शिवराज जी आपके राज में बहुजनों पर अत्याचार चरम से भी पार हो गए हैं। सागर जिले में जातिवादी मानसिकता ग्रस्त और दलित युवती से छेड़छाड़ के आरोपी ने पीड़ित के घर पहुंच परिजनों पर राजीनामा के लिए दबाव बनाया। इसके थोड़ी देर बाद बाजार गए पीड़िता के भाई को इस निर्ममता से पीटा कि उसकी मौत हो गई। अपने बेटे को बचाने आई महिला को भरे बाजार में निर्वस्त्र कर पीटा। महिला भी चोटिल है। ये घटना बेहद दुखद और शर्मनाक होने के साथ-साथ ये भी बता रही है कि दलितों की स्थिति आपके राज में दमित के समान है। शिवराज जी याद रखिए, भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) इस अन्याय के खिलाफ डटकर खड़ी है। हम जातिवादी गुंडों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। जल्द मैं पीड़ित परिवार से मिलने आऊंगा।”

कांग्रेस दो पक्षों के विवाद को समुदाय का बताने पर तुली है : भूपेंद्र सिंह

क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मैं विधायक हूं। हमसे सभी लोग मिलते हैं। ऐसे में सभी को मुझसे जोड़कर बताना गलत है। कांग्रेस एक दलित की हत्या पर राजनीति नकर रही है। कांग्रेस समाज को बांटने का काम कर रही है। ये पूरा विवाद दो पक्षों के बीच का है। उनके बीच पूर्व में भी विवाद हो चुका है। उसे दो वर्गों का बताकर कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, लेकिन जनता इनके इरादों को पूरा नहीं होने देगी।

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Arvind Jain Editor, Bundelkhand Samchar
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