Frequent drizzling weather in Indore | दो हफ्ते में सिर्फ एक इंच ही बारिश; आठ दिन तेज बारिश के नहीं हैं आसार

इंंदौर7 मिनट पहले
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जुलाई में खासी बारिश होने के बाद अगस्त में बारिश का रुख बिल्कुल इसके विपरीत है। इस माह के 13 दिनों में करीब एक इंच ही बारिश हुई है। मौसम का रुख ऐसा है कि दिन में तेज धूप खिलती है तो बीच-बीच में बादल भी छाये रहते हैं और कहीं-कहीं फुहारें होती है लेकिन तेज बारिश किसी भी हिस्से में नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अभी आठ दिन तक इंदौर में तेज बारिश के आसार नहीं है।

अगस्त में अब तक नहीं हुई ऐसी तेज बारिश।
इस बार अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश 1 अगस्त को 9.7 मिमी बारिश हुई थी। 12 से 13 दिन बारिश के होते हैं और सामान्यत: 10 इंच से ज्यादा बारिश होती है। हालांकि अभी आधा माह बाकी है लेकिन 20 अगस्त तक ऐसा कोई सिस्टम एक्टिव होने की संभावना नहीं है जिससे कि तेज बारिश हो। अभी बंगाल की खाड़ी में जो सिस्टम बन रहा है उसकी दिशा उत्तर प्रदेश-बिहार की ओर है। मप्र में इसका प्रवेश होने की संभावना नहीं है।
पिछले साल 13 दिन में 11 इंच पानी बरस गया था। राहत की बात यह है कि इस बार जुलाई बहुत पानीदार रहने से पश्चिमी मध्यप्रदेश के 30 जिलों में इंदौर बारिश के मामले में अब भी तीसरे स्थान पर है। शहर में भले ही 23.3 इंच पानी गिरा है, लेकिन इंदौर जिले में यह आंकड़ा 27.6 इंच हो गया है। इंदौर से ज्यादा बारिश नर्मदापुरम में 29 और रायसेन जिले में 28.7 इंच रिकॉर्ड हुई है।
कम बारिश का असर, 13 दिन में पहले से तीसरे स्थान पर पहुंच गए
31 जुलाई तक की स्थिति में इंदौर जिला पश्चिमी मध्यप्रदेश के 30 जिलों में शीर्ष पर था। अगस्त में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कोई सिस्टम एक्टिव नहीं होने, बारिश को बाधित करने वाला पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होने से हमारे यहां पानी नहीं बरसा। जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश में 3 से 8 अगस्त के बीच जोरदार बारिश हुई। नर्मदापुरम और रायसेन को इसका लाभ मिला। इस वजह से यह जिले इंदौर से आगे निकल गए। रविवार को मौसम का मूड बदला-बदला था। पिछले 5 दिन से बारिश नहीं हुई थी। धूप भी निकल रही थी। संडे को पूरा दिन बादल छाए रहे, बीच-बीच में 2 से 5 मिनट के लिए बारिश भी होती रही।
एक सिस्टम सक्रिय हुआ, लेकिन हमें फायदा नहीं
अगले 7 दिन भी पूरे शहर में एक जैसी तेज बारिश होने के कोई आसार नहीं हैं। बंगाल की खाड़ी में एक सिस्टम सक्रिय हुआ है, लेकिन इसका फायदा मालवा को नहीं मिलने वाला है। यह सिस्टम उत्तरप्रदेश, बिहार तरफ असर दिखाएगा। शनिवार शाम और रविवार सुबह जो रिमझिम बारिश हुई, वह इसी सिस्टम की देन है

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक गुजरात के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है। इस वजह से इंदौर व उज्जैन संभाग में इसका असर देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से यहां बूंदाबांदी हो रही है। शनिवार को भी सुबह से बादल छाए और फुहारें रही लेकिन फिर धूप खिली और दोपहर को फिर बादल छा गए। रात को शहर के कई हिस्सों में रिमझिम हुई। रविवार को सुबह से लेकर शाम तक बादल छाए रहे और कहीं-कहीं बूंदाबांदी हुई। इस बीच पिछले एक हफ्ते से उमस काफी कम है जिससे राहत है।

इस सीजन में अब तक करीब 24 इंच बारिश हो चुकी है जबकि कोटा 38 इंच का है। मौसम वैज्ञानिक अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि अभी अरब सागर से नमी आ रही है जिसके चलते मौसम ऐसा बना हुआ है। 17-18 अगस्त के बाद बंगाल में ऊपरी भाग में चक्रवात बनने की संभावना है। उसके बाद बारिश को लेकर एक्टिविटी बढ़ेगी लेकिन तेज बारिश के आसार नहीं हैं।
प्रदेश के इन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश
- प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश नरसिंहपुर में हुई है। यहां अब तक हुई बारिश का आंकड़ा 35 इंच से ज्यादा है। सिवनी-मंडला में 32 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है।
- इंदौर, जबलपुर, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, सागर, शहडोल, नर्मदापुरम और रायसेन में 28 इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।
- बालाघाट, कटनी, निवाड़ी, पन्ना, उमरिया, बैतूल, भिंड, देवास, हरदा, रतलाम, सीहोर और विदिशा में बारिश का आंकड़ा 24 इंच के पार पहुंच गया है।
इन जिलों में कम बारिश
- सतना, अशोकनगर, बड़वानी, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर और मुरैना में कम बारिश हुई है। यहां आंकड़ा 16 इंच को भी नहीं छू सका है।

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