नशे में किया गया अपराध कब क्षमा योग्य होगा, कब नहीं.. जानिए/ IPC…
व्यक्ति जब नशे में होता है तो उसे कुछ याद नहीं रहता है कि वह क्या कर रहा है क्या नहीं,अर्थात व्यक्ति को अच्छे-बुरे की पहचान नहीं होती है। जब व्यक्ति स्वेच्छा से नशा करता है और कोई घटना कर देता है तब उसका यह कार्य एक अपराध हो सकता है लेकिन व्यक्ति को जबरदस्ती या किसी प्रकार के पानी में कोई नशीली दवा डाल दे बिना स्वेच्छा के वह नशा कर लेता है एवं तब उसके कोई अपराध हो जाये तो वह क्षमा योग्य हो सकता है जानिए।
★भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 85 की परिभाषा★
”अगर किसी व्यक्ति को उसकी मर्जी के बगैर कोई नशा करवा देता है या नशीली दवाई खिला देता है तब ऐसे में उस व्यक्ति के द्वारा कोई अपराध हो जाए तब वह धारा 85 के अंतर्गत क्षमा योग्य होगा।,, लेकिन व्यक्ति अपनी मर्जी से नशा करता है एवं उस व्यक्ति के द्वारा कोई अपराध होगा वह किसी भी प्रकार से क्षमा योग्य नहीं माना जाएगा।
★उधारानुसार वाद:–
डायरेक्टर ऑफ पब्लिक प्रॉसिक्यूशन बनाम मेगे स्वाकी★:- मामले में आरोपी ने ड्यूटी पर गश्त दे रहे एक पुलिस कांस्टेबल पर हमला करके उसे शारिरिक चोट पहुँचाई। आरोपी का कहना था कि उस शाम को घटना के पहले उसने नशीले पदार्थ एवं मद्यपान का सेवन किया था,जिसके कारण वह अपने होश में नहीं था। अतः कथित घटना के बारे में उसे कुछ भी याद नहीं था सिवाय इसके कि एक पुलिस कांस्टेबल से उसकी क्षणिक लड़ाई हुई थी। उसने अपने नशे की स्थिति की पुष्टि में मेडिकल रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। न्यायधीश ने निर्णय दिया की स्वेच्छा मद्यपान एवं नशे को अपराध के लिए बचाव के रूप में मान्य नहीं किया जा सकता है। अतः आरोपी की अपील को अस्वीकार कर दिया और उसे दोषसिद्ध कर दिया गया।

लेखक बी आर. अहिरवार(पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665