दोस्त की सलाह से किसान की चमकी किस्मत, मेडिसनल प्लांट्स की कर रहे खेती, 6 महीने में कमा लिए 9 लाख मुनाफा

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Medicinal Plant Ashwagandha Cultivation: पाली स्थित बूसी गांव के रहने वाले किसान पूरन सिंह ने दोस्त महेश की सलाह पर 50 बीघे में अश्वगंधा की खेती की शुरूआत की. इसके लिए कोटा से 150 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बी…और पढ़ें
अश्वगंधा की खेती करते किसान पूनम सिंह
हाइलाइट्स
- किसान पूरन सिंह ने 50 बीघे में अश्वगंधा की खेती की.
- 6 महीने में 8 लाख खर्च कर 17 लाख का टर्नओवर मिला.
- अब 100 बीघे में शतावरी की खेती की तैयारी कर रहे हैं.
पाली. कृषि के क्षेत्र में होने वाले नए प्रयोगों से किसानों की जिंदगी बदल रही है. पाली जिला के किसान भी इससे अछूता नहीं हैं. पाली के किसान ने तो ऐसा कमाल किया कि अपने खेतों फसलों के बजाए औषधीय पौधा उगाना शुरू कर दिया. दरअसल, 64 वर्षीय किसान पूरन सिंह राजपुरोहित अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं. किसान ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान दुनियाभर में जिस तरह से इम्यूनिटी बूस्टर दवाओं का महत्व बढा, उसी वक्त सोच लिया कि इस आयुर्वेदिक पौधे की खेती करेंगे.
अश्वगंधा औषधीय गुणों से भरपूर है और इसके जड़ का प्रयोग कई आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है. खास बात यह है कि अश्वगंधा की 10 किस्में होती है, लेकिन भारत में केवल 2 वैरायटी ही मिल पाती है. बता दें कि राजस्थान में नागौर और कोटा के बाद अब पाली में किसान अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं. किसान पूरन सिंह का सालाना टर्नओवर 34 लाख से अधिक है.
दोस्त की सलाह पर शुरू कर खेती
पाली स्थित बूसी गांव के रहने वाले किसान पूरन सिंह राजपुरोहित ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद दुनियाभर में इम्यूनिटी बूस्टर दवाओं का महत्व और इस्तेमाल बढ़ गया था. यही वजह रही कि अश्वगंधा की डिमांड भी बढ़ी. किसान ने बताया कि दोस्त ने अश्वगंधा उगाने का आइडिया दिया. उन्होंने बताया कि दोस्त महेश ने बीज से लेकर इसकी खेती की जानकारी और मजदूर भी मुहैया कराया. उन्होंने बताया कि दोस्त की सलाह पर ही पहली बार 50 बीघे में अश्वगंधा लगाया. इससे 17 लाख का कारोबार हुआ. वहीं इस साल डबल यानी 34 लाख का कारोबार होने का अनुमान है. एक्सपर्ट की देख-रेख में पहली ही कोशिश में अच्छी उपज हासिल हुई है. क्वालिटी अच्छी होने के चलते हैदराबाद की कंपनी ने उनके साथ डील की है.
6 महीने में 17 लाख का मिला टर्नओवर
किसान पूनम सिंह ने बताया कि बूसी गांव के पास ही पार्टनरशिप में 315 बीघा खेत खरीदा था. फसल के लिए 4 लाख की लागत से पूरे खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया. 5 लाख की लागत से ट्यूबवेल खुदवाया और सोलर सिस्टम लगवाया. सितंबर 2024 में कोटा से 150 रुपए प्रति किलो के भाव से अश्वगंधा का बीज खरीदकर खेतों में लगाया था. दोस्त महेश ने मध्य प्रदेश से 4 एक्सपर्ट किसान भेजे थे. इनकी सैलरी पर हर महीने 45 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं. शुरुआत में डर था कि पहली बार नई फसल लगा रहे हैं, खराब तो नहीं हो जाएगी. लेकिन, सब कुछ अच्छा रहा और 6 महीने में ही फसल तैयार हो गई. यहां की मिट्टी अश्वगंधा के लिए बेहतर है. पहली बार में अच्छी उपज हुई. फसल पर करीब 8 लाख का खर्चा आया और 17 लाख का टर्नओवर मिला है. इसी साल दूसरी फसल से भी इतने ही टर्नओवर का अनुमान है. कुल मिलाकर एक साल में 34 लाख के कारोबार की संभावना है.
100 बीघा में अब शतावरी लगाने की है तैयारी
किसान पूनम सिंह ने बताया कि अब तक 4500 किलो अश्वगंधा जड़ का उत्पादन हुआ है. खरीदने वाली कंपनी ने जड़ का भाव 350 से 400 रुपए और पत्तों का भाव 150 रुपए प्रति किलो लगाया. इस तरह 4500 किलो अश्वगंधा 350 रुपए के भाव से 15 लाख 75 हजार रुपए और पत्ते बेचकर 1 लाख रुपए मिले हैं. इस फसल को साल में दो बार ले सकते हैं. किसान ने बताया कि अश्वगंधा की पहली फसल अच्छी होने से हौसला बढ़ा है. अब 100 बीघा में आयुर्वेदिक फसल शतावरी उगाने की तैयारी कर रहे हैं. इसके लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम का विस्तार कर रहा हूं. संभव हो सका तो इसी साल शतावरी की फसल की बुवाई कर देंगे.
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