उसने एक सपना देखा, फिर खेत में गयी और खुदाई की… जो दिखा वो चमत्कार था! 150 साल पुराना पवित्र स्थल

श्री श्री श्री कनक महालक्ष्मी अम्मावरी मंदिर आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के चीपुरपल्ली शहर में स्थित है. यह मंदिर कोई आम मंदिर नहीं, बल्कि लगभग 150 साल पुराना एक पवित्र स्थल है, जिसकी मान्यता और आस्था दूर-दूर तक फैली हुई है.
स्वप्न में आई देवी, खुद बताया मंदिर का स्थान
कहानी के अनुसार, एक भक्त को स्वप्न में कनक महालक्ष्मी देवी ने दर्शन दिए और कहा, “मैं खेतों में हूं, मुझे बैलगाड़ी पर बिठाकर ले चलो और जहां बैलगाड़ी रुके, वहीं मेरा मंदिर बनाओ और रोज पूजा करो.” भक्त ने वैसा ही किया और तभी से इस स्थान पर देवी का मंदिर स्थापित है. तभी से यहां पूजा-अर्चना होती आ रही है और आज यह मंदिर श्रद्धा का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.
पूरे उत्तर आंध्र से आते हैं भक्त
यह मंदिर सिर्फ आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर आंध्र के हर कोने से भक्तों को अपनी ओर खींचता है. देवी कनक महालक्ष्मी को लोग धन, सुख और समृद्धि की देवी मानते हैं. इसलिए लोग बड़ी आस्था के साथ यहां आते हैं और कई भक्त यहां घंटों रुककर देवी के दर्शन करते हैं.
रविवार को होती है विशेष पूजा
मंदिर के मुख्य पुजारी रवि कामेश्वर शर्मा ने बताया कि हर रविवार को देवी के लिए खास पूजा होती है. साथ ही साल में एक बार शिवरात्रि के बाद सोमवार, मंगलवार और गुरुवार को यहां भव्य मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
तीन दिन का त्योहार, तीन रंगीन आयोजन
इस पर्व के पहले दिन प्रभा जातरा निकाली जाती है, दूसरे दिन कुमकुम अर्चना और खास पूजा होती है, और तीसरे दिन घट यात्रा होती है, जिसमें देवी को विशेष भेंट अर्पित की जाती है. यह उत्सव गांव के लोगों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता.
श्रावण मास में होती है खास पूजा और सजावट
श्रावण के हर शुक्रवार को मंदिर में देवी की विशेष सजावट होती है. इस दिन केसर से विशेष पूजा की जाती है और लक्ष्मी होमगुंडा नामक एक खास यज्ञ आयोजित किया जाता है. इन आयोजनों में गांव के साथ-साथ बाहर के श्रद्धालु भी हिस्सा लेते हैं.
नवरात्रि के दस दिन – देवी के दस रूप
नवरात्रि के दस दिनों में यहां देवी को हर दिन एक अलग अवतार में सजाया जाता है. पद्यमी से विजयादशमी तक रोज देवी की खास पूजा, चंडी होम, चंडी पारायण और सामूहिक कुमकुम अर्चन किए जाते हैं. इस दौरान भक्तों की लंबी कतारें मंदिर में देखी जाती हैं.
शांत वातावरण में भक्तों को मिलती है शांति
चूंकि मंदिर गांव के बाहरी इलाके में स्थित है, इसलिए यहां का माहौल बेहद शांत है. भक्त यहां घंटों ध्यान और पूजा करते हैं और आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं. देवी के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि लोग कहते हैं – जो सच्चे मन से यहां आता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है.
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