मध्यप्रदेश

ड्रग्स के ढाबे:कनाडा के झंडे, मूसेवाला के पोस्टर, यानी यहां नशा बिकता है



मप्र को राजस्थान से जोड़ने वाले प्रमुख महू-नीमच फोरलेन पर 30 किमी के एरिया का सफर आपको चौका देगा। यूं तो इस फोरलेन पर रतलाम के बाद (अरनिया गुर्जर से जावरा) और मंदसौर के बाद (पिपलियामंडी से नीमच) तक 30 किमी के एरिया में ढाबों पर हिंदी से ज्यादा पंजाबी भाषा वाले बोर्ड ही नजर आएंगे। इन पर सिद्धू मूसेवाला के पोस्टर्स और कनाडा के झंडे भी दिखेंगे। इनमें से कुछ ढाबों का कनेक्शन अफीम और डोडा चूरा तस्करी से जुड़ा है। दरअसल, यह पंजाबी भाषा वाले बोर्ड ट्रक ड्राइवरों के लिए एक सिग्नल हैं या यूं कहें कि यह एक कोडवर्ड है, जिससे पता चल सके कि यहां अफीम-डोडा चूरा उपलब्ध है। भास्कर टीम ने ट्रक ड्राइवर बनकर 30 दिन तक रतलाम से नीमच तक के इस क्षेत्र की पड़ताल की। इसमें पता चला कि कुछ ढाबों से डोडा चूरा और अफीम बिक रही है। एक ढाबे पर अफीम और डोडा चूरा सौदे के लिए दिखाया भी गया। हालांकि, ढाबों से इसे खरीदना आसान नहीं है क्योंकि ढाबों पर उनके ग्राहक भी तय हैं। ट्रक ड्राइवर के नाम और नंबर तक ढाबों पर नोट हैं ताकि यह खेल पूरी तरह सुरक्षित रहे। भास्कर टीम ने ट्रक ड्राइवर बनकर 30 दिन तक की पड़ताल 18 फरवरी, शाम 4 बजे : भास्कर टीम ने अफीम और डोडाचूरा का सौदा करने के लिए क्षेत्र के ही एक व्यक्ति को ढूंढकर भरोसे में लिया। यह रणनीति सफल हुई और वह व्यक्ति सौदा करने के लिए तैयार हो गया। हमने उसे 3 हजार रुपए दिए, इसमें वह एक किलो डोडा चूरा और अफीम की डिब्बी का सौदा कर आया। ज्यादा मात्रा में डोडाचूरा देने की गारंटी भी मिली। अफीम छोटी डिब्बी में थी, लेकिन वह भी जितनी चाहिए, उतनी उपलब्ध करवाने की बात कही गई। यहां अफीम मिल जाएगी, लेकिन आपको नहीं देंगे… हाइवे किनारे बने लगभग 250 ढाबों में से कई ढाबों पर सिद्धू मूसेवाला के पोस्टर और कनाडा के झंडे लगे हुए हैं। कुछ ढाबे ऐसे भी हैं, जहां गाड़ी नंबर पर शहर की पहचान बताने वाले अंक लिखे हैं। हकीकत जानने भास्कर टीम 12 फरवरी को ट्रक चालक अमरदीप के पास पहुंची। उसने बताया कि ज्यादातर ढाबों पर डोडा चूरा और अफीम आसानी से मिल जाएगी, लेकिन वह आपको नहीं देंगे। वह ट्रक ड्राइवरों को ही देते हैं। उन्हें पहचान भी लेते हैं। भाषा ही अलग है। पानी देने से भी मना किया… 4 मार्च दोपहर 2 बजे : क्षेत्रीय व्यक्ति का सौदा देखने के बाद रिपोर्टर ने खुद भी प्रयास किया, लेकिन अनजान चेहरे देखकर अफीम तो दूर ढाबा संचालक ने पानी की बोतल देने से भी इंकार किया। कई ढाबों के सिर्फ बोर्ड थे। जबकि उनका कंस्ट्रक्शन पेड़ों की आड़ में छिपा हुआ था। पंजाबी में ही बातचीत… 5 मार्च, दोपहर 3 बजे : नीमच से 20 किमी पहले सड़क किनारे ट्रक ड्राइवर अमन से संपर्क किया। अमन ने कहा आप नीमच बायपास पर धानुका फैक्टरी के पास पंजाबी ढाबे पर मेरी बात करा देना। ढाबे पर पहुंचे तो ढाबा संचालक और ड्राइवर के बीच पंजाबी भाषा में माल की बात हुई। किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है। लगातार कार्रवाई हुई भी है और आगे भी सख्ती से जारी रहेगी। -मनोज कुमार सिंह, डीआईजी, रतलाम रेंज


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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