अजब गजब

’50 हजार लिए थे जिसे बढ़ाकर अब 10 लाख कर दिए’, युवक ने फाइनेंसर के ब्याज से तंग आकर दी जान; वीडियो बनाकर छोड़ा सुसाइड नोट

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मृतक ललित मोहन वार्ष्णेय

दिल्ली में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले एक युवक ने ब्याज के पैसों से तंग आकर सुसाइड कर लिया। उसने वीडियो बनाकर एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें फाइनेंसर ने उसे पैसे के लिए किस कदर परेशान किया इसका जिक्र किया है। साथ ही अपनी मौत का जिम्मेदार फाइनेंसर को ही बताया है। पुलिस ने सुसाइड के लिए उकसाने का मामला फाइनेंसर के खिलाफ दर्ज कर लिया है।

आरोपी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस ने बताया कि एक 42 साल के युवक ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी है, युवक की उम्र 42 साल है। मृतक का नाम ललित मोहन वार्ष्णेय है और कैलाश नगर का रहने वाला है। मृतक कैलाश नगर में ही मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता था। उसके एक फाइनेंसर से कुछ पैसे उधार लिया था, जिसका ब्याज देते-देते वह परेशान हो चुका था। इस कारण उसने सुसाइड कर लिया है। मृतक की पत्नी पूनम गुप्ता की शिकायत पर आरोपी संजीव जैन के खिलाफ गांधी नगर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया।

मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा

मृतक ललित ललित मोहन वार्ष्णेय ने सुसाइड करने से पहले बनाए वीडियो में कहा कि मेरी मौत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ संजीव जैन है, गली नंबर 4 का फाइनेंसर। इससे मैंने साल 2014 में करीबन 50000 रुपये लिए थे, लेकिन जिस काम के लिए मैंने रुपये लिए थे वह काम नहीं हो पाया और मेरे पैसे फंस गए। इसके बाद संजीव ने मुझे डरा-धमकाकर कि घर आऊंगा, शोर मचाऊंगा आदि कह-कहकर मुझसे ब्याज लेता रहा। अब संजीव ने यह रकम बढ़ा-बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है। मैं पिछले 8-10 साल से इसका ब्याज भरे जा रहा हूं। पर इसकी रकम खत्म नहीं हो रही है। और अब मेरे पास पैसा नहीं बचा है, मैं जहां-जहां पैसे लाकर इसे दे सकता था, दे दिया है। इसके ब्याज के चक्कर में मैं दूसरे फाइनेंसर के चक्कर में पड़ गया, पर इसका ब्याज खत्म नहीं हो रहा। अब मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। मैं बहुत पैसे भर चुका हूं, अपना घर खाली कर चुका हूं। मेरी मौत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ यह इंसान ही है।

पत्नी के लिए भी छोड़ा मैसेज

इसके बाद उन्होंने अपनी बीवी के लिए मैसेज छोड़ा और कहा कि पूनम मेरी जिंदगी में कोई दूसरी लड़की नहीं, मुझे गलत मत समझना। मैं यही बात तुमसे शेयर नहीं कर पाया। रचित को बड़ी जिम्मेदारी से संभालना। हंसिका ने मेरे से कुछ पूछा था वह कंप्यूटर पर मिल जाएगा। समझदार है, लड़ेगी नहीं। मेरी तरह गलती न करे, अब तुम घर पर रहना और मैं अब तुम्हारी जिंदगी से जा रहा हूं।

दूसरे वीडियो में कही ये बात

आगे एक और वीडियो में पीड़ित ने बताया कि 2014 में मैं चीन जाना चाहता था, घर वालों ने पैसा देने से मना कर दिया तो मैंने संजीव जैन फाइनेंसर से 50 हजार रुपये लिए। मैं ब्याज चुकाते-चुकाते खाली हो गया पर उसका ब्याज नहीं खत्म हुआ। आज वह रकम काफी बड़ी हो गई, अब मेरे जेब में पैसे नहीं हैं। मैं उस फाइनेंसर के कई बार बात कर चुका हूं कि ब्याज छोड़कर मुझसे मूल धन ले ले, लेकिन वह नहीं मान रहा। बार-बार वह घर आने की धमकी दे रहा। इज्जत के डर से ही मैं शायद उसे ब्याज देता रहा। आज उसने 50 हजार रुपये को बढ़ा-बढ़ाकर 10 लाख कर दिया है। अब मेरे पास पैसे नहीं हैं, मेरी मौत का जिम्मेदार संजीव जैन है। इसको मैंने बहुत पैसे दे दिए, मैं हिसाब नहीं लगा सकता कि मैंने इसके कितने ज्यादा पैसे दे दिए। शायद वह पैसे मेरे घर वालों के काम आ सकते थे। लेकिन इज्जत के डर से मैं उसे पैसे देता रहा।

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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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