अनूपपुर जिला मुख्यालय में शासकीय तुलसी महाविद्यालय के पुराने और जर्जर भवन में जिला एवं सत्र न्यायालय कार्यालय का संचालन वर्ष 2009 से किया जा रहा है। अव्यवस्थाओं के बीच न्यायालय संचालन होने से अधिवक्ताओं, पक्षकारों और न्यायिक अधिकारियों को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
नए भवन की घोषणा, लेकिन बजट का इंतजार
मुख्यमंत्री के अनूपपुर दौरे के दौरान 16 अगस्त 2024 को नए न्यायालय भवन के निर्माण की घोषणा की गई थी। हालांकि, कई महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक इसके लिए बजट स्वीकृत नहीं हो सका है, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।
अधिवक्ता कर रहे पेड़ की छांव में कार्य
अनूपपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संतोष सिंह ने बताया कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के बैठने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। अधिवक्ताओं को पेड़ की छांव में बैठकर काम करना पड़ रहा है। इस समस्या को कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
पक्षकारों को धूप में करना पड़ता है इंतजार
अधिवक्ता संजय शुक्ला ने कहा कि पक्षकारों को अपनी सुनवाई के इंतजार में घंटों धूप में या फिर होटल में बैठना पड़ता है। अदालत में उनकी बारी आने तक वे असहज परिस्थितियों का सामना करते हैं। बारिश और ठंड के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
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मूलभूत सुविधाओं का अभाव
अधिवक्ता उमेश कुमार राय ने बताया कि न्यायालय परिसर में न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था है और न ही स्वच्छ प्रसाधन की सुविधा। अधिवक्ताओं के लिए बने कक्ष में मात्र 8 से 10 लोग ही बैठ सकते हैं, जिससे बाकी अधिवक्ताओं को खुले में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। न्यायाधीशों के लिए भी उचित कक्ष नहीं है, वे सीधे न्यायालय में पहुंचकर कार्य करते हैं।
समाधान की मांग
अधिवक्ताओं और पक्षकारों की इन समस्याओं को देखते हुए जिला प्रशासन और शासन से जल्द से जल्द नए न्यायालय भवन के लिए बजट स्वीकृत करने की मांग की जा रही है। न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और सभी संबंधित पक्षों को राहत प्रदान करने के लिए आवश्यक है कि इस दिशा में त्वरित निर्णय लिया जाए।