मध्यप्रदेश

The hospital’s power station has not been maintained for 3 years. | मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में तकनीकी खराबी की वजह से बाधित हो रही बिजली सप्लाई,मरीज परेशान

छिंदवाड़ा28 मिनट पहले

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मेडिकल संबंद्ध जिला अस्पताल की हालत वेंटीलेटर पर आ गई है। यहां ईलाज, बिजली और पानी सहित अन्य सुविधाओं के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। करोड़ों रूपए खर्च करने के बाद भी अस्पताल के हालात बद से बदतर होते जा रहे है। मेडिकल संबंद्ध जिला अस्पताल के 33 केव्ही प्लांट का पिछले तीन महीने से मेंटेनेंस नहीं हुआ है। जिस कारण आए दिन बिजली गुल हो रही है। इस बात को लेकर जिला अस्पताल ने मेडिकल डीन से लगभग दो दर्जन बार प्रत्र व्यवहार कर चुके है। इसके बाद भी मेडिकल प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है।दरअसल मेडिकल संबंद्ध जिला अस्पताल की बिल्डिंग की देखरेख और बिजली मेंटेनेंस का जिम्मा मेडिकल कॉलेज डीन का है। इस अस्पताल में बिजली के लिए 33 केव्ही का एक प्लांट बनाया गया है। वही वैकल्पिक रूपए में 750 किलो वॉट का जनरेटर भी लगाया गया है। इसके साथ ही सौर्य ऊर्जा का एक संयन्त्र भी लगाया गया है। यदि बिजली गुल होती है तो इस अवस्था में इन दोनों से अस्पताल के ओटी से लेकर जरूरी सेवाओं के लिए बिजली की सप्लाई की जाती है। शुक्रवार को तकरीबन शाम तीन बजे से लेकर छह बजे तक बिजली गुल रही। जिला अस्पताल प्रबंधन की मानें तो जिसकी मुख्य वजह प्लांट का एक ट्रांसफार्मर और बिजली सप्लाई के लिए लगाए गए स्विच भी खुले में लगे हुए है। पिछले तीन चार दिनों से बारिश होने के कारण नमी होने से एक ट्रांसफार्मर ब्लास्ट हो गया था। वही एक केवल खराब हो गया था। जिसको सुधारने के लिए करीब दो से तीन घंटे का समय लगा था इसके बाद बिजली की सप्लाई शुरू कर दी गई थी। इस दौरान डाक्टरों को अपने सभी काम चाहे ओटी के हो या वार्डों के सभी मोबाइल की रोशनी में निपटाने पड़े। हालांकि इस मामले में जिला अस्पताल प्रबंधन ने मेंटेनेंस को लेकर मेडिकल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। अस्पताल प्रबंधन डॉ उदय पराडक़र ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि मेडिकल प्रबंधन का हस्तक्षेप होने के कारण हमारा स्टॉफ कुछ नहीं कर पाता। मेन पॉवर को लेकर कई बार पत्र व्यवहार किया गया है, लेकिन हमारे पास बिजली मेंटेनेंस के लिए महज एक कर्मचारी है। स्टॉफ तो एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहा है। ऐसी स्थिति में मरण मरीज की हो रही है।नहीं हो रहा मेंटेनेंसमेडिकल संबंद्ध जिला अस्पताल के लिए में नियम के मुताबिक बिजली के लिए बनाया गया प्लांट का मेंटेनेंस हर 6 महीने में होना चाहिए। लेकिन जबसे मेडिकल अस्पताल की बिल्ंिडग बनी है तब से लेकर आज तक इस प्लांट का मेंटेनेंस नहीं हुआ है। ऐसे में एक दिन यह स्थिति आएगी कि मेडिकल प्रबंधन की अनदेखी के कारण प्लांट भगवान भरोसे होगा।

मेन पॉवर का अभाव

जिला अस्पताल प्रबंधन की मानें तो जिला अस्पताल के हाथ में कुछ नहीं है। बिल्ंिडग से लेकर रखरखाव सब कुछ मेडिकल प्रबंधन के हाथ में है। मेटेंनेंस को लेकर दर्जनों बार पत्रव्यवहार किया गया है। इसके बाद मेडिकल प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मेंटेनेंस के लिए मेन पॉवर की मांग की, इस बात को भी मेडिकल प्रबंधन ने अनसुनी कर दी है।डीजल की नहीं है व्यवस्था

जिला प्रबंधन ने बताया कि जिला अस्पताल में वैकल्पिक बिजली सप्लाई के लिए 750 किलो वॉट का जनरेटर लगाया गया है। जिसमें एक घंटे में तकरीबन 150 लीटर डीजल की खपत होती है। इस डीजल के लिए भी हमारे पास कोई वजट नहीं है। वजट के लिए भी पत्र व्यवहार किया गया, लेकिन मेडिकल प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।मोबाइल की रोशनी में हो रहे कामबिजली गुल होने की स्थिती में ओटी, इमरजेंसी डाक्टर रूम और वार्डों में मरीजों का इलाज हो या पर्ची पर दवा लिखने का काम हो, मोबाइल की रोशनी में किया जाता है। बिजली गुल होने के बाद जिला मेडिकल संबंद्ध जिला अस्पताल की वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जिला अस्पताल प्रबंधन का कहना है इमरजेंसी स्थिती में जैसे तैसे मरीजों को देखते हुए डीजल का इंतजाम कर वैकल्पिक बिजली की सप्लाई की जाती है।जनप्रतिनिधी नहीं दे रहे ध्यानईलाज की सुविधाओं का दम भरने वाले जनप्रतिनिधियों ने मेडिकल अस्पताल के उद्घाटन अवसर पर मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि हमारा जिले का मेडिकल अस्पताल ऐसा होगा कि यहां महानगरों के मरीज इलाज कराने आएंगे। इसके बाद से आज तक इन जनप्रतिनिधियों ने झांककर भी नहीं देखा, कि अस्पताल की क्या हालत है। आज यह हालात है कि छोटी छोटी बीमारी के लिए मरीजों को नागपुर की ओर रूख करना पड़ रहा है।जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉक्टर उदय पराड़कर का कहना है कि मेंटेनेंस का काम जिला मेडिकल प्रबंधन का है। तीन साल से कोई मेंटेनेंस नहीं हुआ है। इस बात को लेकर दो दर्जन से अधिक बार पत्र व्यवहार कर चुके है। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है। देखरेख के अभाव में 33 केव्ही प्लांट की बिजली आए दिन गुल हो रही है।


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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