Memorandum march held in Tirupati Balaji regarding Prasad issue | तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद मामले में निकाली ज्ञापन यात्रा: घटना को लेकर संतों ने जताई आपत्ति, बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु – Indore News

तिरुपति बालाजी में प्रसाद व्यवस्था में हुए विभत्य कृत्य से हिंदू आस्था पर जो आघात हुआ उसके विरोध में बुधवार को ज्ञापन यात्रा निकाली। यात्रा श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग से कलेक्टर ऑफिस तक निकाली गई। जहां सभी संतो द्वारा भक्तों को तिरुपति बाल
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श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग से दोपहर 4 बजे यात्रा अनंत श्री विभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी विष्णु प्रपन्नाचार्य महाराज के सान्निध्य में निकली। इंदौर के सभी व्यापारी संगठन सभी सामाजिक संगठन के साथ ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने भी ज्ञापन यात्रा का समर्थन दिया। इंदौर शहर के प्राचीनतम देवस्थानों उज्जैन से रंगनाथाचार्य महाराज पुष्यमार्गी वाग्धीश बाबा, दिव्येश बाबा, गोकुलोत्सव, वीर बगीची के पवनानंद महाराज, दत्त माउली संस्थान के अण्णा महाराज, अन्नपूर्णा आश्रम के संत जयेद्रानंद गिरि महाराज, रणजीत हनुमान मंदिर के पंडित दीपेश व्यास, खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट, हंसदास मठ के पं.पवन शर्मा, गजासीन शनि धाम के महामंडलेश्वर दादू महाराज व शहर के सभी बड़े देवस्थान के द्वारा भी अपने शिष्यों के साथ शामिल होने का आह्वान किया गया था। यात्रा के लिए बाहर से भी बड़ी संख्या में भक्त इंदौर पहुंचे। यात्रा के लिए युवाओं ने विभिन्न प्रकार के स्लोगन और नारे तैयार किए थे।
यात्रा में भगवा ध्वज पताकाओं के साथ ही साउंड गाड़ी और संत समुदाय के साथ बटुक विद्यार्थी शामिल हुए। मातृशक्ति अपने-अपने संगठन के साथ हाथों में तख्तियां लेकर और बड़ी संख्या में पुरुष वर्ग केशरिया ध्वज लेकर सिर पर तिलक लगाकर यात्रा में शामिल हुए। देवस्थान के मीडिया प्रभारी पंकज तोतला ने बताया कि इस मामले में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एडीएम रोशन राय को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में ये लिखा – तिरुपति तिरुमला देवस्थान जो समस्त हिंदुओं का सर्वोच्च आस्था का केंद्र है, जहां लाखों लोग नित्य दर्शन करते हैं। वहां नित्य भोग आराधना में लड्डू प्रसादम जिसका बहुत ही ज्यादा महत्व है और जो प्रभु को अत्यंत प्रिय है और भक्त उसे नारायण का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं। ऐसे दिव्य प्रसादम में अभक्ष्य पदार्थों का उपयोग किया गया। भक्त इस प्रसादम के बिना अपनी तिरुपति यात्रा को अधूरी मानते हैं और वह प्रसादम लाकर सभी इष्ट मित्रों व परिवारों में उसका विवरण भी करते हैं। मुश्किल से कोई वैष्णव होगा जिसने वहां का प्रसाद नहीं पाया हो। ऐसा प्रतीत होता है कि यह जानबूझकर षड्यंत्र कर सभी हिंदू धर्मावलंबियों का धर्म भ्रष्ट करने एवं उनकी आस्था को आघात पहुंचाने के लिए किया गया। भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो इसलिए हम मांग करते हैं कि दोषियों को चिह्नित कर कठोर दंड दिया जाए और धर्मस्थलों की व्यवस्था में प्रशासनिक दखल बंद किया जाए। हमारी मांग है कि सरकार को धार्मिक देवस्थानों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए विशेष परिस्थितियों में पुरानी परंपरा को जीवित कर ट्रस्ट के माध्यम से संचालित किए जाना चाहिए, जिसमें धर्माचार्यों को प्रधानता दी जानी चाहिए। मठ एवं संप्रदाय के अधिकारों का हनन नहीं करना चाहिए।

यह मांग भी उठाई 1. TTD के बोर्ड में धर्माचार्यों का भी चयन होना चाहिए। 2. भारत सरकार के अंतर्गत जितने भी मठ मंदिर है उन सभी के लिए सनातन धर्म रक्षण बोर्ड का गठन हो, जो की सनातन धर्म से संबंधित सभी कार्यों को देखे एवं स्वतंत्र प्रभार से रहकर प्रशासनिक नियंत्रण से मुक्त हो। 3. सभी विशिष्ट मंदिरों में गोशाला का निर्माण अनिवार्य रूप से हो। मठ मंदिर की संपत्तियों पर निजी रूप से किसी का कब्जा हो उनको तुरन्त मुक्त करवाया जाएं। 4. सरकार वैदिक परम्पराओं से छेड़छाड़ ना करें मंदिरों में अर्चक का चयन परंपरागत कुलीन ब्राह्मण परिवार से ही हो एवं प्रभु सेवा में सम्मिलित अन्य कर्मचारी भी हिन्दू ही हो। 5. सभी जिलों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को मापने हेतु लैब की सुविधा उपलब्ध कराएं। 6. खाद्य सामग्री पर हिंदू देवी देवताओं एवं महापुरुषों के चित्र लगाकर अपमान ना करें। 7. हिंदू मंदिरों में अन्य धर्माधिकारी का हस्तक्षेप ना हो । 8. हिंदुओं के धर्मस्थलों से अभी तक की जो भी धनराशि प्राप्त हुई है उसकी पारदर्शिता स्पष्ट करें एवं वो राशि हिन्दू समाज के लिए जन कल्याणकारी योजना में ही खर्च हो।


इस कृत्य को लेकर उज्जैन रामानुज कोट देवस्थान के स्वामी श्री रंगनाथाचार्य, संत राधाकृष्ण महाराज, पंडित प्रदीप मिश्रा, पुष्टीय मार्गीय दिव्येश बाबा, स्वामी अच्युतानंद, वाग्धीश जी, वीर बगीची के पवनानंद महाराज दत्त, माउली संस्थान के अण्णा महाराज, अन्नपूर्णा आश्रम के संत जयेंद्रानंद गिरि महाराज, श्री रणजीत हनुमान मंदिर के पंडित दीपेश व्यास, खजराना गणेश मंदिर के पंडित अशोक भट्ट, हंस दास मठ के पं.पवन शर्मा, गजासीन शनि मंदिर दादू महाराज ने भी गहरी आपत्ति जताई है।

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