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Ground Report : जयपुर में मीट की दुकानों पर झटका और हलाल लिखने पर नहीं लाइसेंस को लेकर मच रहा बवाल, जानें वजह

जयपुर. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों, होटलों और ठेले मालिकों को नाम लिखने के फरमान के बाद कई राज्यों में इसको लेकर सुगबुगाहट होने लग गई है. राजस्थान में भी धीरे-धीरे यह मांग जोर पकड़ रही है. जयपुर के हवामहल के बीजेपी विधायक बालमुकुंदाचार्य ने जहां जोरशोर से उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए राजस्थान में भी इसे लागू करने की मांग उठाई है. वहीं जयपुर ग्रेटर की मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर इस बात पर भी जोर दे रही हैं कि जयपुर में अब मीट की दुकानों पर यह लिखा जाएगा कि मीट झटके का है या हलाल का.

जयपुर में ग्राउंड जीरो पर इस मसले पर मीट विक्रेताओं का करना है कि उन्हें इस बात पर कतई आपत्ति नहीं है कि झटका या हलाल नहीं लिखा जाए. उनके अनुसार वे हलाल का मीट बेचते हैं तो उसे दुकान पर लिखने में कतई संकोच नहीं है. दिक्कत तो लाइसेंस को लेकर है. अव्वल तो उसमें कई तरह की अव्यवहारिकताएं हैं, दूसरे उनका आरोप है कि निगम में कमीशनखोरी इतनी है कि लाइसेंस लेने में ही पसीने छूट जाते हैं.

मीट मर्चेंट बोले झटका या हलाल लिखने पर कोई आपत्ति नहीं
जयपुर शहर के मोती डूंगरी रोड के मीट दुकानदार हमीद कुरेशी कहते हैं कि उन्हें झटका या हलाल लिखने में कोई आपत्ति नहीं है. जयपुर मीट मर्चेंट एसोसिएशन के साबिर कुरैशी भी उनसे अलग मत नहीं रखते हैं. इसी एसोसिएशन से जुड़े हाजी फरीद को भी इसमें कोई आपत्ति नजर नहीं आती. दुकान पर झटका या हलाल लिखने के मुद्दे पर मीट मर्चेन्ट मोहम्मद यूसुफ कुरैशी और आल इंडिया जमीयतुल कुरैश के नायब सदर मुशर्रफ कुरैशी भी इस अन्य दुकानदारों के मत से सहमत हैं. लेकिन इन सबका का बुनियादी सवाल और आपत्ति निगम की ओर से मीट की दुकान के लिए कमर्शियल लाइसेंस और पट्टे को लेकर है.

मेयर बोलीं-जनभावना के आधर पर ये फैसला लिया है
दूसरी तरफ जयपुर ग्रेटर डॉ. मेयर सौम्या गुर्जर का कहना है कि हमने जनभावना के आधर पर ये फैसला कर लिया है कि मीट की दुकानों के बाहर यह लिखना ही होगा की मीट झटके का है या हलाल का. इसके साथ ही खुले में मीट नहीं बेचने और इसकी की दुकान के लिए कमर्शियल लाइसेंस अनिवार्य करने का फैसला ग्रेटर नगर निगम पहले ही ले चुका है. शहर में अब मीट बेचने वालों के लिए नया नियम लागू होगा.

झटका या हलाल लिखना ‘अनिवार्य’ होगा
इसके तहत अब मीट की दुकान के बाहर झटका या हलाल लिखना ‘अनिवार्य’ कर दिया गया है. डॉ. सौम्या गुर्जर ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है. इसके अलावा आवासीय क्षेत्रों में मीट की दुकानें प्रतिबंधित कर दी गई हैं. मीट की दुकानों का लाइसेंस नवीनीकरण भी कमर्शियल पट्टा होने पर ही दिया जाएगा. इसके अलावा आवासीय स्थानों पर मीट की दुकानें नहीं खोली जाएंगी. जबकि जयपुर में मीट की आधी से ज्यादा मीट की दुकानों के पास कमर्शियल लाइसेंस और पट्टा नहीं है.

बिना कमर्शियल लाइसेंस के अब मीट नहीं बेच पाएंगे
इन दुकानों के लिए अब अलग से जगह निर्धारित की जाएगी. अब माना जा रहा है कि इस मामले में सर्वे किया जाएगा. कौन सी दुकान कहां पर है और दुकानों पर किस तरह से नियमों का पालन किया जा रहा है. इसके साथ ही नियमों को लागू करने के लिए नगर निगम की ओर से तमाम तैयारियां की जा रही हैं. बहुत जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा. सभी को कहा गया है कि जिन लोगों के पास लाइसेंस है वो लाइसेंस दिखाएं और जिनके पास लाइसेंस नहीं है वो लोग जल्द से जल्द कमर्शियल लाइसेंस लें. बिना कमर्शियल लाइसेंस के अब मीट नहीं बेच पाएंगे.

Tags: Big news, Jaipur news, Rajasthan news


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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