मध्यप्रदेश

Don’t be afraid – there is no term like digital arrest in the law | डरें नहीं- कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी टर्म ही नहीं: इंदौर क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी ने बताए बचाव के तरीके; शिकार होते ही यहां करें शिकायत – Indore News

साइबर क्राइम की नई टर्म डिजिटल अरेस्ट से कई लोग ठगा रहे हैं। अकेले इंदौर की बात करें तो यहां इस साल 2024 में अब तक 31 शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें से तीन मामलों में केस दर्ज कर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। इंदौर के क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीप

.

भारतीय जांच एजेंसियां नोटिस देकर पूछताछ करती है। ताबड़तोड़ ऑनलाइन नोटिस देना, अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कराने जैसे काम भारत की कोई भी जांच एजेंसी नहीं करती।

दरअसल दंडोतिया इंदौर में साइबर क्राइम से बचाव के उपाय बताते हैं। वे स्कूल, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं, टाउनशिप्स में जाकर अवेयरनेस प्रोग्राम भी करते हैं। उन्हें इंदौर में आए 15 महीने हुए हैं, इस दौरान वे 185 प्रोग्राम कर चुके हैं। दो लाख लोगों को जागरुक किया है। इससे पहले वे ग्वालियर में इसी तरह अवेयरनेस प्रोग्राम करते थे।

दैनिक भास्कर ने उनसे साइबर क्राइम और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े आम लोगों के हरेक सवाल पूछे। जानिए उनके जवाब

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है? भारतीय कानून में ऐसा कोई टर्म नहीं है। इस तरह की कोई भी जांच व्यवस्था नहीं है। ये एक फेक टर्म साइबर ठगों ने बनाई है।

कैसे ठगी करते हैं साइबर ठग। अपराधी कॉल सेंटर की तरह काम कर रहे हैं। पहले देश में 35 हॉट स्पॉट थे, अब 50 हो गए हैं, साइबर ठगों के ठिकाने तेजी से बढ़ रहे हैं। चौबीस घंटे लाखों मैसेज, लाखों मेल, लाखों फिशिंग लिंक भेजते हैं। ताकि कोई न कोई तो फंस ही जाए। इनमें से 5 या 7 लोग भी फंस जाते हैं तो ये उन्हें शिकार बना लेते हैं। नए कानून में साइबर फ्रॉड को ऑर्गेनाइज क्राइम माना है। इसमें आरोप सिद्ध होने पर 10 साल की सजा का प्रावधान है।

कूरियर में ड्रग पकड़ाया है, या ह्यूमन ट्रैफिकिंग या ड्रग रैकेट में आपका नाम आया है। आपकी सिम या आपका अकाउंट ब्लॉक किया जा रहा है।

स्काइप के अलावा भी कोई तरीका है जिससे ठगी करते हैं? पहले केवल यही तरीका था, लेकिन अब अपराधी व्हॉट्सएप कॉल के जरिए ही डिजिटली अरेस्ट करने की कोशिश करते हैं।

क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि साइबर ठग यहां पर ठगी करके दूसरे देश में चले जाते हैं। दुबई इनमें से एक देश है।

अपराधी किन लोगों को टारगेट करते हैं? कोई क्राइटेरिया नहीं है। कल ही मेरे पास भी तीन कॉल आए थे, डिजिटल अरेस्ट करने के लिए। इनकी बातों में आकर जो गलती करता है वही व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है।

क्या कोई सरकारी एजेंसी इस तरह से डिजिटल अरेस्ट करती है या इस तरह से पूछताछ करती है? यदि कोई ट्रांजेक्शन संदिग्ध होता भी है तो देश की कोई भी सरकारी जांच एजेंसी डिजिटल अरेस्ट करके पूछताछ नहीं करती। एजेंसी सबसे पहले ऐसे अकाउंट को ब्लॉक करती है। किसी दूसरे अकाउंट में पैसा ट्रांसफर नहीं कराती। आपसे पैसा नहीं लेती, तत्काल फोन करके नोटिस देकर या ऑनलाइन इन्वेस्टिगेशन शुरू कर दे। सरकारी जांच एजेंसियां आपको सुनवाई के लिए पूरा समय देती हैं।

यदि ऐसा कोई कॉल आए तो क्या करें? आप कॉल करने वाले से कहिए कि आप अपने ऑफिशियल लैण्ड लाइन नंबर से बात करिए, व्हॉट्सएप पर नहीं।

कैसे बचें? कहां शिकायत करें? इसमें शिकार होने पर घर बैठे-बैठे केस रजिस्टर करा सकते हैं। NCRB portal : www.cybercrime.gov.in Phone : 1930 भारत में कहीं भी साइबर फ्रॉड होने पर। इंदौर : 7049124445

यदि फ्रॉड होने के 30 मिनट में शिकायत करते हैं तो जिस अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हुआ है उसे हम 15 से 30 मिनट के भीतर फ्रीज करा देते हैं। इससे पैसे आने की उम्मीद रहती है।

किस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। शेयर ट्रेडिंग के मामले सबसे ज्यादा आते हैं। देशभर में 34% लोग लालच में आकर उनके ट्रेप में फंस जाते हैं। इसके बाद सेक्सटॉर्शन के 25% केस आते हैं। साइबर ठगी कैसे बढ़ रही है। हमारी जितनी डिपेंडेंसी डिजिटल वर्ल्ड पर रहेगी, उतनी ही ज्यादा साइबर ठगी होने की आशंका रहेगी। लोग जिस तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जा रहे हैं पर उस स्पीड से सावधनी नहीं रख पा रहे। और इसका अवेयरनेस के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

क्या किसी ने इंदौर में इस तरह से ठगी होने के बाद शिकायत करके अपना पैसा बचाया है? इंदौर क्राइम ब्रांच ने 2023 में 4 करोड़ 32 लाख रुपए इसी तरह से वापस दिलाए थे। इस साल 2024 में सितंबर तक 7 करोड़ 20 लाख रुपए वापस करा चुके हैं। लेकिन ये लोगों की जागरुकता के कारण संभव हो पाया। क्योंकि उन्हें पता था कि वे गलती से ठगे गए और उन्होंने समय रहते सही जगह शिकायत की। लेकिन ऐसे लोग जो ठगी होने के काफी समय बाद हमसे मिले हमने ऐसे 3 करोड़ से ज्यादा की ठगी के केस में अब तक 70 लाख रुपए ऐसे लोगों के भी वापस कराए हैं।

सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्यौगिक सुरक्षा बल) द्वारा इंदौर में आयोजित साइबर अवेयरनेस सेशन का आयोजन किया गया। इस सेशन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा के महत्व को उजागर करना और समाज को बढ़ते साइबर अपराधों, नए तरीकों तथा फ्रॉड से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना था। सेशन में उपस्थित प्रतिभागियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक टिप्स दिए। दंडोतिया ने यहां साइबर अपराधों जैसे फ़िशिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर, और सोशल इंजीनियरिंग के बारे में जानकारी दी।

सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्यौगिक सुरक्षा बल) द्वारा इंदौर में आयोजित साइबर अवेयरनेस सेशन का आयोजन किया गया। इस सेशन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा के महत्व को उजागर करना और समाज को बढ़ते साइबर अपराधों, नए तरीकों तथा फ्रॉड से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना था। सेशन में उपस्थित प्रतिभागियों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक टिप्स दिए। दंडोतिया ने यहां साइबर अपराधों जैसे फ़िशिंग, मैलवेयर, रैनसमवेयर, और सोशल इंजीनियरिंग के बारे में जानकारी दी।

क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम कंट्रोल के साथ साइबर क्लासेस लेते हैं। कैसे मैनेज होता है? साइबर क्राइम क्राइम ब्रांच का ही पार्ट है। साइबर क्राइम में इन दिनों 35 से 40 शिकायतें रोज रिपोर्ट हो रही हैं। ऐसे में साइबर क्राइम को रोकने के लिए जागरुकता के अलावा कोई भी इफेक्टिव टूल नहीं है। इसलिए मैं सुबह 9 से 9.30 बजे के बीच स्कूल-कॉलेज के बच्चों का सेशन लेकर ही ऑफिस पहुंचता हूं। कभी लेट होता हूं तो अफसर सहयोग करते हैं।

अब तक स्कूल कॉलेज के बच्चों की कितनी क्लासेस ले चुके हैं? इंदौर क्राइम ब्रांच में आने के बाद 15 महीनों में 321 साइबर क्राइम अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किए हैं। इनमें से 185 अवेयरनेस प्रोग्राम स्कूल-कॉलेज में आयोजित किए हैं। इसके अलावा अलग-अलग एसोसिएशन, टाउनशिप, संस्थाओं और लोगों के बीच जाकर 2 लाख लोगों तक साइबर क्राइम से निपटने के तरीके बताए हैं। मैं मार्च 2022 से यह अवेयरनेस प्रोग्राम चला रहा हूं। इंदौर से पहले ग्वालियर में भी इसी तरह से लोगों के बीच जाता था। इस साल डिजिटल अरेस्ट के कितने केस आए हैं। अब तक 31 शिकायतों में 5 केस रजिस्टर किए हैं। तीन आरोपियों को पकड़ा भी है।

दंडोतिया ने विद्यासागर स्कूल द्वारा आयोजित “साइबर जागरुकता सेशन“ में साइबर क्राइम के प्रति जागरूक एवं सजग किया।

दंडोतिया ने विद्यासागर स्कूल द्वारा आयोजित “साइबर जागरुकता सेशन“ में साइबर क्राइम के प्रति जागरूक एवं सजग किया।

फ्रॉड के शिकार होने पर यह भी कर सकते हैं

  • RBI की 2017-18 की गाइडलाइन के मुताबिक, धोखाधड़ी की सूचना दर्ज कराने के बाद ट्रांजेक्शन की पूरी जिम्मेदारी बैंक पर होती है। तय प्रक्रिया के मुताबिक संबंधित बैंक को सूचित नहीं किया गया तो जिम्मेदारी उपभोक्ता की होती है। इस स्थिति में बैंक पर रिफंड करने की कानूनी बाध्यता लागू नहीं होती।
  • धोखाधड़ी के शिकार होने पर अपने बैंक के संबंधित अधिकारी को तुरंत सूचित करें। इसके अलावा कस्टमर केयर सेंटर पर सूचना दर्ज कराएं और दर्ज सूचना का नंबर भविष्य के लिए सुरक्षित रखें, ताकि बैंक आपके पैसे आपको रिफंड कर सके।

Source link

एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!