मध्यप्रदेश

Eye on Green Energy Capital | ग्रीन एनर्जी कैपिटल पर नजर: 5 लाख टन कार्बन उत्सर्जन रोक रहे, 20% बिजली खपत भी घटाएंगे – Indore News


नई दिशा – देश का लक्ष्य 2070- इंदौर 2047 में ही बन सकता है नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन सिटी

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इंदौर अब ग्रीन एनर्जी कैपिटल की तरफ बढ़ रहा है। एलईडी लाइटिंग से शुरुआत के बाद, सोलर पैनल, विंड एनर्जी, और बायो-सीएनजी जैसे ग्रीन एनर्जी स्रोत को बढ़ावा दे रहे हैं। कचरे के सही निस्तारण से 5 लाख टन कार्बन का उत्सर्जन रोक रहे हैं। 20 फीसदी बिजली खपत कम करने का भी लक्ष्य है। ये प्रयास सफल रहे, तो इंदौर 2047 तक ही भारत का पहला कार्बन-न्यूट्रल शहर बन सकता है। देश ने इसके लिए 2070 का लक्ष्य रखा गया है।

बॉयो सीएनजी प्लांट से मिल रही सालाना ढाई करोड़ की रॉयल्टी नगर निगम रोजाना 550 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण कर रहा है। इससे सालान 5 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाय ऑक्साइड का उर्सजन कम हो रहा है। फलों और सब्जियों के कचरे से बायो-सीएनजी बनाई जा रही है। 550 मीट्रिक टन क्षमता वाले बायो-सीएनजी प्लांट से निगम को वार्षिक 2.42 करोड़ की रॉयल्टी मिल रही है।

क्लाइमेट मिशन से कार्बन फुट प्रिंट कम करने में मिलेगी मदद शहर ने 20% ऊर्जा खपत को कम करने की रणनीति अपनाई है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी। कई बड़ी संस्थाएं, स्कूल-कॉलेज इसमें हिस्सा ले रहे हैं। बच्चों के माध्यम से घरों में भी बिजली की खपत कम करने पर तेजी से काम हो रहा है।

सौर ऊर्जा से हर माह 4 करोड़ बचेंगे जलूद में 60 मेगावाट का सौर उर्जा संयत्र लग रहा है। इससे हर माह 4 करोड़ का बिजली खर्च बचेगा। पांच हजार घरों में सौर ऊर्जा पैनल लगाए हैं। 60 मेगावॉट का सोलर प्लांट हर साल 81 हजार मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन रोकेगा।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में कदम पेट्रोल-डीजल वाहनों की संख्या घटाकर इलेक्ट्रिक व सीएनजी व्हीकल बढ़ा रहे हैं। कचरा संग्रहण के लिए 100 ईवी खरीदी गई हैं। 70 इलेक्ट्रिक सिटी बस चल रही हैं। 25 नई ईवी बसें भी मिली हैं। निजी क्षेत्र में भी 150 सीएनजी बसें चल रही हैं।

ये प्रयोग दिलाएगे इंदौर को बड़ी सफलता

पौधारोपण और ग्रीन कवर बढ़ाने के प्रयास 1. अहिल्यावन योजना के तहत 51 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। एक पेड हर साल 20 किलो कार्बन डाय ऑक्साइड अवशोषित करता है। अगले 10 साल में ये पेड़ 1.02 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन रोकेंगे।

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम का प्रभाव 2. कार्बन उत्सर्जन कम करने डस्ट कंट्रोल यूनिट्स, सड़कों पर डस्टिंग, और ग्रीन बेल्ट विकसित कर रहे हैं। ‘रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ’ अभियान को बड़े चौराहों पर लागू किया गया है, जिसके असर दिखने लगे हैं।

एमआरएफ से मिल रहे सालाना 150 करोड़ 3. इंदौर में 400 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) प्लांट संचालित है। इससे 150 करोड़ वार्षिक मिल रहे हैं। ‘वेस्ट टू वेल्थ’ नीति में निगम 16 करोड़ सालाना कमा रहा है।

दुनिया के प्रमुख शहर ग्रीन एनर्जी में हम से बहुत आगे

  • कोपेनहेगन, डेनमार्कः 2050 तक कार्बन-न्यूट्रल बनने का लक्ष्य। यहां 50% से अधिक लोग साइकिल से यात्रा करते हैं। वेस्ट-टू-एनर्जी तकनीक का उपयोग करके कचरे से बिजली बना रहे हैं।
  • स्टॉकहोम, स्वीडनः 2045 तक नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य- 90% पब्लिक ट्रांसपोर्ट बॉयो फ्यूल से चलता है। कार्बन उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त ग्रीन टैक्स देना पड़ता है।
  • रिक्जाविक, आइसलैंडः 100% रिन्यूएबल एनर्जी पर निर्भर-100% शहर 2040 तक कार्बन-न्यूट्रल बनने की ओर बढ़ रहा है। परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

और इधर देश में, नागपुर और ठाणे, नागपुर ने 2025 तक 20% तो ठाणे ने 22% ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना चाहते हैं। सौर ऊर्जा, सीएनजी व ग्रीन बिल्डिंग निर्माण को बढ़ावा दे रहे। मुंबईः 2050 तक नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य-तटीय सड़क परियोजना से सालाना 100 मिलियन डॉलर का ईंधन बचाएंगे। बेंगलुरुः सस्टेनेबल एनर्जी और ग्रीन मोबिलिटी शहर में सोलर पावर ग्रिड स्थापित किए गए हैं। सार्वजनिक परिवहन के लिए EV बसें और CNG बसों को शामिल किया गया है। अहमदाबादः सौर ऊर्जा से 200 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। जल संरक्षण के लिए झीलों को पुनर्जीिवत किया गया है।


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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