कभी सिर पर थाली रखकर बेचते थे मिठाई, अब विदेशों से आती है डिमांड, बुरे नाम ने दिलाई बड़ी पहचान

नई दिल्ली. भारत में मिठाई की दुकानें तो लाखों में हैं लेकिन पहचान कुछ खास ब्रांड ने बनाई है. आमतौर पर देश की बड़ी आबादी सिर्फ गिने-चुने नाम जैसे- हल्दीराम, बीकानेर वाला, मोती महल और भी कुछ नाम जानते हैं. लेकिन, इनके अलावा भी मिठाई के बिजनेस में कई और ब्रांड हैं जो अपने नाम और स्वाद दोनों के लिए देश ही नहीं विदेशों तक जाने जाते हैं. देश के कई शहरों में गली-नुक्कड़ पर कई हलवाई अपनी मिठाइयों के लिए फेमस हैं. इन्हीं में से एक कानपुर की नामी मिठाई की दुकान, जिसकी मिठास और अंदाज के चर्चे हिंदुस्तान से लेकर लंदन तक है. ‘ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं’ यह लाइन फिल्मी नहीं बल्कि कानपुर स्थित इस मिठाई की दुकान की टैगलाइन है. हालांकि, यह सिर्फ फन के लिए ठगने के लिए नहीं.
हम बात कर रहे हैं कानपुर के प्रसिद्ध ‘ठग्गू के लडडू’ की, जिसकी लोकप्रियता देश समेत विदेशों तक है. भारत की आजादी से पहले से शुरू हुई इस मिठाई की दुकान ने कई पीढ़ियों को अपना मुरीद बनाया है. खास बात है कि खुद पीएम मोदी भी इस दुकान पर मिलने वाले लड्डुओं का स्वाद चख चुके हैं.
गले में गमछा और हाथ में लड्डू की थाली
आज से करीब 60 साल पहले राम अवतार पांडे ऊर्फ मठ्ठा पांडे, कानपुर शहर में घूम-घूमकर लड्डू बेचते थे. गले में गमछा और हाथ में थाली लिए राम अवतार पांडे रोजाना लड्डू बेचने के लिए निकल जाते थे. किसी वक्त गांव से खाली हाथ आए राम अवतार पांडे ने लड्डू की ऐसी दुकान जमाई की आज उनके स्वाद और नाम की पहचान देश के साथ-साथ विदेशों तक है.
कानपुर में कहां मिलते ठग्गू के लड्डू
ठग्गू के लडडू की दुकान, कानपुर शहर के बीच स्थित है. यह दुकान छोटी-सी है लेकिन इसके चर्चा दूर-दूर तक हैं. कहते हैं जो भी कानपुर आता है वह ठग्गू के लडडू खाने जरूर पहुंचता है. इस दुकान के नामकरण के पीछे एक दिलचस्प कहानी है इसके मालिक राजेश पांडे ने इसे लेकर बेहद रोचक किस्सा सुनाया.
क्यों पड़ा दुकान का नाम ‘ठग्गू के लड्डू’
राजेश पांडे ने कहा कि मेरे पिताजी गांधी जी की सभा में जाया करते थे वहां उस समय सफेद चीनी के बारे में कहा जाता था कि ये मीठा जहर है. उस वक्त मेरे पिताजी को ख्याल आया कि हम भी लड्डू चीनी का इस्तेमाल करते हैं यानी एक नजरिये से हम लोगों का मुंह तो मीठा कर रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं लोगों को ठग भी रहे हैं. बस इसके बाद से ही दुकान का नाम ठग्गू के लडडू हो गया.
ठग्गू के लड्डू को बनाने में खास किस्म के गोंद का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी कीमत काफी ज्यादा होती है, साथ ही इसमें सूजी और भर भरकर ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं. इस दुकान से रोजाना 500 से 1000 किलो लड्डू की सप्लाई होती है. लड्डू की कीमत 700 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम है. फिलहाल, ठग्गू के लड्डू की बागडोर रवि और आदर्श संभाल रहे हैं. योर स्टोरी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 4 करोड़ रुपये है. ठग्गू के लड्डू ई-कॉमर्स साइट्स पर भी उपलब्ध हैं जिन्हें ऑर्डर देकर मंगाया जा सकता है.
ठग्गू के लड्डू का स्वाद पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लिया. इसके अलावा, कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी ठग्गू के लड्डू खा चुके हैं. 2005 में आई फिल्म बंटी और बब्ली में भी इस दुकान को दिखाया गया था.
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Tags: Business ideas, High net worth individuals, Startup Idea
FIRST PUBLISHED : April 24, 2024, 13:35 IST
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