48वां खजुराहो नृत्य समारोह: नवगति, नवलय, ताल, छन्दन व सोमवार को सुजाता महापात्रा के ओडिसी नृत्य से शुरू हुआ नृत्य समारोह का संगम

छतरपुर। 48वें खजुराहो नृत्य समारोह के दूसरे दिन सोमवार को सुजाता महापात्रा के ओडिसी नृत्य समारोह का संगम शुरू हुआ। बैंगलोर की निरुपमा राजेंद्र ने मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्य आत्मा काव्य है इस काव्य को अपनी नृत्य साधना के माध्यम से सुजाता महापात्रा इसे काव्य बना रही है। उनकी नृत्य साधना को न सिर्फ देश में अपितु विदेशों में अलंकित किया गया है। वे शास्त्रीय शैली की सुन्दरता एवं गहराई को बनाये रखते हुये नई पीढ़ी का नृत्य को साझा कर रही है। इस दिन भरतनृत्यम-कथक (समागम) जयरामा राव एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। समागम नृत्य दो शास्त्रीय संगीत शैली का नृत्य है। निरूपमा, राजेन्द्र दुनिया भर देशों में 200 प्रस्तुतियां दे चुकी है। आप दोनों ने भुला दिये गये सहकार भंजीकोत्सव और चर्चरी नृत्य को भी नए आयाम दिये है। इस जोड़ी की बड़ी उपलब्धि है। 12 सौ साल पुराने मदनोत्सव कला महोत्सव को पुन: जीवित करना है। जयरामा राव एवं साथी दिल्ली कुचिपुड़ी समूह नृत्य की प्रस्तुति की गई। नाट्यगुरू जयरामाराव कुचिपुड़ी नृत्य की साधना को आगे बढ़ा रहे है।