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2050 तक भारत के शहरों में आ सकती है कयामत, 2.40 अरब आबादी को नहीं मिलेगा पानी, यूएन रिपोर्ट में दावा

संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 2050 में दुनिया की 1.7 से 2.40 अरब शहरी आबादी जल संकट (Water Crisis) से जूझ सकती है और इससे सबसे ज्यादा भारत के प्रभावित होने की आशंका है. रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में 93.3 करोड़ शहरी आबादी जल संकट से जूझ रही थी. संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन-2023 से पहले मंगलवार को ‘संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट 2023: जल के लिए साझेदारी और सहयोग’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया में करीब 80 प्रतिशत आबादी जल संकट से जूझ रही है, खासतौर पर पूर्वोत्तर चीन, भारत और पाकिस्तान में.

रिपोर्ट में आंकड़ों के हवाले से कहा गया ,‘जल संकट से जूझने वाली वैश्विक शहरी आबादी 2016 के 93.3 करोड़ से बढ़कर 2050 में 1.7 से 2.4 अरब होने की आशंका है और अनुमान है कि भारत सबसे अधिक प्रभावित देश होगा.’ यूनेस्को की महानिदेशक आंड्रे एजोले ने कहा, ‘वैश्विक संकट के नियंत्रण से बाहर जाने से पहले मजबूत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तत्काल स्थापित करने की जरूरत है.’ रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर दो अरब लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है और 3.6 अरब आबादी के पास सुरक्षित स्वच्छता व्यवस्था नहीं हैं.

जल मानवता के लिए रक्त की तरह
रिपोर्ट के प्रधान संपादक रिचर्ड कॉनर ने संवाददाताओं से कहा कि अनिश्चितता बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘अगर आपने समाधान नहीं किया तो निश्चित तौर पर वैश्विक संकट होगा.’ संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने रिपोर्ट में कहा कि ‘जल मानवता के लिए रक्त की तरह है. यह लोगों और धरती के जीवन और स्वास्थ्य, लचीलेपन, विकास और समृद्धि के लिए आवश्यक है.’ गुतारेस ने चिंता जताई कि मानवता खतरनाक रास्ते पर चल रहा है, जिसमें ‘आसुरी प्रवृत्ति के तहत अत्याधिक उपभोग और अति विकास, जल का अवहनीय इस्तेमाल, प्रदूषण और अनियंत्रित ग्लोबल वार्मिंग मानवता के रक्त को बूंद-बूंद कर सूखा रहे हैं.’

Tags: United nations, Water Crisis


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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