अजब गजब

पढ़ाई छोड़कर टैक्‍सी चलाई, पर नहीं छोड़ा जज्‍बा, मुकेश जगतियानी ने खड़ी कर दी 40 हजार करोड़ की कंपनी

हाइलाइट्स

लंदन में अपने शुरुआती दिनों में उन्‍हें पेट पालने के लिए टैक्‍सी तक चलानी पड़ी.
जगतियानी ने लैंडमार्क ग्रुप के रूप में एक बड़े और मल्‍टीनेशनल समूह की स्‍थापना की.
अपने भाई की खिलौने की शॉप को बेबी प्रोडक्‍ट के स्‍टोर के रूप में बदल दिया.

नई दिल्‍ली. सफलता तो बहुतों को मिलती है, लेकिन कहानी उसी की बनती है जो विपरीत धारा में चलकर कामयाबी हासिल करते हैं. मुकेश जगतियानी की सफलता की कहानी भी कुछ इसी तरह की है. उन्‍होंने अपने धैर्य और कड़ी मेहनत के भरोसे यह मुकाम हासिल किया है. मुकेश की सफलता की कहानी किसी फिल्‍मी सफर की तरह लगती है, क्‍योंकि वे लंदन करने तो गए थे पढ़ाई-लिखाई लेकिन जिंदगी ने ऐसा सबक सिखाया कि सब भूलकर दो वक्‍त की रोटी जुटाने में लग गए.

दरअसल, लंदन में अपने शुरुआती दिनों में उन्‍हें पेट पालने के लिए टैक्‍सी तक चलानी पड़ी. कुछ समय तक लंदन में टैक्‍स चलाकर पैसा जुटाया और अपना बिजनेस करने को सोचा. अभी वह संयुक्‍त अरब अमीरात (UAE) के सबसे अमीर भारतीयों में भी आते हैं. जगतियानी ने लैंडमार्क ग्रुप के रूप में एक बड़े और मल्‍टीनेशनल समूह की स्‍थापना की.

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कई सेक्‍टर में काम करता है समूह
मुकेश का समूह कई सेक्‍टर में अपनी उपस्थिति रखता है. इसमें फैशन, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, फर्नीचर और बजट होटल जैसे कारोबार शामिल हैं. मुकेश के ज्‍यादातर कारोबार मध्‍य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में फैले हुए हैं. फोर्ब्‍स के अनुसार, मुकेश की कुल संपत्ति अभी करीब 5.2 अबर डॉलर यानी करीब 45 हजार करोड़ रुपये है. एक समय ड्राइवर बनकर पेट पालने वाले मुकेश को कड़े संघर्षों के बाद ही यह सफलता मिली है.

मां-बाप को बचपन में खोया
मुकेश लंदन गए थे पढ़ाई करने लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि उन्‍हें पढ़ाई छोड़कर अपनी फाइनेंशियल जरूरतों को पूरी करने के लिए टैक्‍सी भी चलानी पड़ी. बचपन में ही माता-पिता को खो दिया और भाई की मौत के बाद उसकी दुकान संभालने साल 1973 में बहरीन चले गए. उन्‍होंने अपने भाई की खिलौने की शॉप को बेबी प्रोडक्‍ट के स्‍टोर के रूप में बदल दिया. उन्‍होंने 10 साल तक इस बिजनेस को सफलतापूर्वक चलाया और 6 और आउटलेट भी खोले.

खाड़ी युद्ध में आई मुसीबत
मुकेश के ऊपर खाड़ी युद्ध के दौरान एक बार फिर मुसीब‍त आई और उन्‍हें यूएई छोड़ने को मजबूर किया गया. उन्‍होंने लैंडमार्क ग्रुप की स्‍थापना की और फैशन, इलेक्‍ट्रॉनिक, फर्नीचर, बजट होटल जैसे उद्योग मध्‍य एशिया में फैलाने की कोशिश करते रहे. उनकी पत्‍नी रेणुका जगतियानी फिलहाल कंपनी को चला रही हैं और वह अभी समूह की चेयरमैन और सीईओ हैं.

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लैंडमार्क समूह मिडिल ईस्‍ट, अफ्रीका और इंडिया में एक बड़ा रिटेल और होटल व्‍यवसाय से जुड़ा है. अभी इस ग्रुप के पास 2,200 आउटलेट हैं और देशभर में 3 करोड़ वर्गफुट की जगह में यह रिटेल कारोबार चल रहा है. भारत में यह ग्रुप 19999 में इंटर किया था.

Tags: Business news in hindi, Success Story, Womens Success Story


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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