बारिश शुरु होने के बाद रेत माफियों पर कार्यवाही कर वाहवाही लूट रहा जिला प्रशासन
आनंदेश्वर एग्रो रेत कंपनी पहले ही लगा चुकी सरकार को लगभग 28 करोड़ रुपए का चूना

छतरपुर। जिले में रेत माफियों के खिलाफ लगातार खबरें प्रकाशित होती रहीं परंतु जिलाप्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने रेत माफियों पर कार्यवाही आखिरकार क्येां नहीं की। किसके संरक्षण पर रेत का अवैध कारोबार चलता रहा जैसे समाचार प्रकाशित किए गए। अब जिले में वर्षा शुरु हो गई तो जिलाप्रशासन ने रेत माफियों पर कार्यवाही करने का ढिंढोरा पीटकर वाहवाही लूटने का कुछ समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित कर श्रेय लेने की कोशिश की गई है। मजेदार बात ये है कि जिले के जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी यानी कलेक्टर, एसपी ने आज तक रेत माफियों के श्रेत्र में कभी दौरा नहीं किया और न ही कार्यवाही कराने के लिए इतना बड़ा पुलिसबल पहले पहुंचाया । अब चूंकि जिले में वर्षा शुरु हो गई है और प्रदेश के अधिकारियों को दिखाना है कि रेत माफियों पर प्रशासन कार्यवाही कर रही है। रुद्र प्रताप पर जो कार्यवाही की गई है उसमें भी कहीं न कहीं गोलमाल है। रुद्र पटेल भाजपा के दो विधायकों के इशारे पर रेत का अवैध कारोबार कर रहा था और आज तक उस पर पुलिस ने किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही आखिरकार क्यों नहीं की। पुलिस और जिला प्रशासन को यह जानकारी पूर्व में ही थी। लेकिन सत्तापक्ष में विधायकों का संरक्षण होने के कारण रुद्र पटेल खुलेआम जिला प्रशासन को चुनौती देकर रेत का अवैध कारोबार करता रहा और लवकुशनगर क्षेत्र के सभी थानों पर इसकी जानकारी थी लेकिन एकाएक क्या हो गया कि पूरा पुलिस प्रशासन रुद्र पटेल के घर जाकर उसके खिलाफ कार्यवाही करने की चेतावनी दे रहा है । लवकुशनगर क्षेत्र में पुलिस के द्वारा की गई कार्यवाही जनता के गले नहीं उतर रही है। हालांकि कुछ रेत माफियों का कहना है कि वर्षा शुरु हो चुकी है इसलिए अब यह नौटंकी पुलिस के द्वारा दिखाई जा रही है।
छतरपुर जिले में कलेक्टर एवं एसपी को लगभग एक वर्ष से ज्यादा का कार्यकाल हो चुका है दोनों ही अफसरों ने आज तक रेत कारोबारियों के क्षेत्र में आखिरकार दौरा क्यों नहीं किया यह सवाल खड़े हो रहे हैं। आनंदेश्वर कंपनी जब तक काम करती रही पुलिस और प्रशासन ने उन्हें खुली छूट दे रखी थी जिससे इस कंपनी के लोग रेत का अवैध कारोबार करते रहे ।
रेत के अवैध कारोबार में जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पर यह आरोप लगाए गए थे कि रेत माफियों से दोनों अधिकारियों की सांठगांठ है यह आरोप लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष लखनलाल अनुरागी ने लिखित रूप से शिकायत कर की थी। लेकिन उस समय यह मामला उजागर नहीं हुआ था। रेत माफियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बाद अब यह मामला तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। चूंकि जो रेत ठेकेदार छतरपुर में था वह उप्र का था और कलेक्टर भी उप्र के रहने वाले हैं और पुलिस अधीक्षक भारतीय जनता पार्टी उप्र के विधायक के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। तीनों की सांठगांठ होने के कारण एक वर्ष से रेत का कारोबार काफी तेजी से चला और सरकार को लगभग 28 करोड़ रुपए का चूना भी लग चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेत के खेल में भाजपा के बड़े नेताओं का भी हाथ बताया जा रहा है। खजुराहो सांसद बीडी शर्मा की भी भूमिका और उनके संरक्षण के कारण राजनगर क्षेत्र एवं लवकुशनगर क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार काफी फलफूल रहा था।