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महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा ‘अबॉर्शन’, तम‍िलनाडु और बंगाल भी पीछे नहीं, देशभर में 11.44 लाख गर्भपात के र‍िकॉर्ड केस

हाइलाइट्स

महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा 11 लाख से अध‍िक गर्भपात
तमिलनाडु और पश्‍च‍िम बंगाल दूसरे और तीसरे नंबर के राज्‍य
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने 14 मार्च को राज्‍यसभा में पेश क‍िए थे आंकड़े

नई द‍िल्‍ली. देशभर में महाराष्‍ट्र (Maharashtra) इकलौता ऐसा राज्‍य है जहां प‍िछले साल में सबसे ज्‍यादा गर्भपात (Abortion) के मामले र‍िकॉर्ड क‍िए गए हैं. इसके बाद तमिलनाडु और पश्‍च‍िम बंगाल क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर के राज्‍य हैं जहां पर सबसे अध‍िक मामले सामने आए हैं. मार्च 2021 और अप्रैल 2022 के दौरान एक साल के भीतर 11 लाख गर्भपात के मामले र‍िकॉर्ड क‍िए गए थे. इनमें से अकेले महाराष्‍ट्र राज्‍य में 1.8 लाख मामले दर्ज क‍िए गए थे जबकि तम‍िलनाडु में 1.14 लाख और पश्चिम बंगाल में 1.08 लाख मामले सामने आए थे. इससे संबंध‍ित आंकड़ों की जानकारी खुद केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Union Health Ministry) ने गत 14 मार्च को राज्यसभा (Rajya Sabha) में डाटा पेश करते हुए दी है.

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से प्रस्‍तुत सरकारी आंकड़ों की माने तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पिछले वित्तीय वर्ष में 11,44,634 गर्भपात के मामलों की सूचना म‍िली थी. इनमें सहज और प्रेरित करने वाले दोनों तरह के मामले शाम‍िल रहे हैं. आंकड़ों से पता चलता है क‍ि अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में गर्भपात के सबसे कम मामले र‍िकॉर्ड किए गए.

इस बीच देखा जाए तो गर्भावस्था के बीस सप्ताह से पहले सहज गर्भपात गर्भावस्था का प्राकृतिक नुकसान होता है जिसको ‘गर्भपात’ भी कहा जा सकता है, जबकि गर्भावस्था का जानबूझकर चिकित्सा या शल्य चिकित्सा के जर‍िए समाप्त कराना प्रेरित गर्भपात होता है.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट से पता चलता है कि साल 2007 और 2011 के बीच भारत में 67 फीसदी गर्भपात असुरक्षित रूप में वर्गीकृत किये गए थे. यह राज्यों में व्यापक रूप से 45 से 78 फीसदी तक भिन्न रहे.

पिछले साल, सुप्रीम कोर्ट की ओर से भारत में गर्भपात कानूनों को मजबूत करने का फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) अधिनियम के तहत प्रदान की गई 20 से 24 सप्ताह की समय-सीमा के भीतर एक अविवाहित महिला को अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय व्यापक गर्भपात देखभाल (CAC) कार्यक्रम के तहत गर्भपात सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर काम कर रहा है.

जबकि सरकार देश में होने वाले गर्भपात की वास्तविक घटनाओं को पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं कर सकती है. नीति अनुसंधान संस्थान गुट्टमाकर द्वारा भारत में बड़ी संख्‍या में घटना का अनुमान लगाया गया है.

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2015 से 2019 तक सालाना 4.85 लाख गर्भधारण हुए हैं. इनमें से 2.15 लाख गर्भधारण अनपेक्षित थे और 1.66 लाख गर्भपात हुए. भारत में गर्भपात व्यापक तौर पर सामाजिक या आर्थिक आधार पर कानूनी है. हालांकि, एमटीपी अधिनियम के मजबूत होने के साथ केंद्र सरकार को उम्‍मीद है क‍ि गर्भपात वैध तरीके से और संगठित क्षेत्र में हो सकेंगे.

मुंबई के एनएचआरसीसी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के सलाहकार, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रुजुल झावेरी ने कहा क‍ि एमटीपी को वैध बनाने से मातृ मृत्यु दर को कम करने, असुरक्षित गर्भपात को रोकने और अवांछित गर्भधारण के मुद्दे को हल करने में मदद मिली है.

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झावेरी ने कहा कि महिलाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में उनके प्रजनन अधिकारों और एमटीपी के कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक था.

स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) डॉ शिवानी सचदेव गौड़ का कहना है क‍ि भारतीय एमटीपी अधिनियम शायद दुनिया में सबसे उदार है, जहां एक महिला मानसिक तनाव न‍ियम के तहत और किसी और के हस्ताक्षर के बिना (जब तक कि वह नाबालिग न हो) गर्भावस्था को समाप्त कर सकती है. कानूनन गोपनीयता को सख्ती से बनाए रखना आवश्‍यक है. साथ ही हर मामले क सूचना भारत सरकार को दी जाती है. एमटीपी अधिनियम (MTP Act) में एक हालिया संशोधन कानून को और उदार बनाने के लिए था.

Tags: Abortion, Health News, Maharashtra, Union health ministry


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एडवोकेट अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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