अजब गजब

Success Story: कभी होटल में करते थे वेटर का काम, मोजे न पहनने पर पड़े थे थप्पड़, अब हैं विधायक

भोपाल. भारत आदिवासी पार्टी (बाप) और कमलेश्वर डोडियार. हाल ही में संपन्न हुए मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दोनों ही नामों को शायद ही कोई जानता था. लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बाद कोई तीसरा दल जीता है तो वो है बाप और इसके प्रत्याशी डोडियार. बचपन से ही तंगी और गरीबी में पले डोडियार ने अपनी कहानी News18 Hindi से बयां कीं. प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश सवाल-जवाबों में…

  • इतनी भीषण गरीबी में पढ़ाई कैसे की?

    कक्षा 5 तक अपनी स्कूली शिक्षा अपने पैतृक गांव राधाकुवां से की. फिर मैंने पास के शहर सैलाना से कक्षा 8 तक और 2013 तक रतलाम से डिग्री हासिल की. फिर मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी. बीच-बीच में माता-पिता कोटा, अहमदाबाद आदि जगह मजदूरी करने जाते थे, तो हमें भी जाना होता था. तब भी पढ़ाई ऐसी छूट जाती थी. बाद में विवाह और अन्य समारोहों में खानपान सेवाओं के लिए वेटर के रूप में काम किया. लेकिन पढ़ने की ललक थी तो फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. परेशानियां आती रहीं और मैं पढ़ता रहा. फिर भी, एलएलबी के दो पेपर अभी भी क्लीयर नहीं हुए है.

  • विधायक बनने का ख्याल कैसे आया?

    साल 2009 में बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे. उनके जीवन को देखकर विधायक बनने की प्रेरणा मिली. तब मेरी उम्र महज 18 साल थी. तब यह बात मैं किसी को बता नहीं पाया. क्योंकि हिम्मत ही नहीं हुई. मैंने कहीं पढ़ा था कि बराक ओबामा ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एलएलएम किया था. इसलिए 2016 में मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास कर एडमिशन ले लिया.

  • पढ़ाई के लिए पैसों का प्रबंध कैसे हुआ

    हमारी आदिवासी परंपरा नोतरा मेरे काम आई. इसमें कुछ लोगों ने मुझे पढ़ाई के लिए पैसे दिए. साथ ही मैंने छोटे-मोटे काम भी किए. जैसे नोएडा में सुबह टिफिन बॉक्स बांटना. शनिवार और रविवार  को ऑलीशान होटलों में वेटर के रूप में काम करना आदि. इसी दौरान, दिल्ली के आलीशान होटल का वाक्या है. वहां पार्टियों व शादियों के लिए अलग से लोग बुलाए जाते थे. मेरे पास मोजे नहीं थे. इसलिए बिना मोजे पहनकर चला गया. मैनेजर ने मुझे इस हालात में देखा तो दो थप्पड़ जड़ दिए. मुझे पढ़ाई पूरी करनी थी, इसलिए मैंने चुपचाप अन्याय सहन कर लिया. 

  • विधायक बन गए हैं फिर भी आप बाइक से भोपाल आए हैं?

  • सैलाना से भोपाल की दूरी 350 किमी हैं. मैंने एक दोस्त से कार मांगी थी, लेकिन प्रबंध नहीं हो सका. लिहाजा, बाइक चलाकर भोपाल आ गए.

  • चुनावी तैयारी कब शुरू की?

    मैं जयस से जुड़ चुका था. इससे पहले, कॉलेज में भी कई संगठनों से जुड़ा था. हम प्रदर्शन करते रहते थे. 2018 में भी चुनाव लड़ा. तब 18 हजार वोट मिले थे. इसके बाद मैं फिर तैयारी में जुट गया. लेकिन मेरे साथ काफी राजनीति हुई.

  • आपके खिलाफ क्या साजिश हुई?

    विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण मेरे पास कई मामले हैं। सबसे लंबे समय तक मैं 2020 में इंदौर जेल में चार महीने तक रहा हूं. तब मैंने बलात्कार की शिकार एक आदिवासी लड़की के लिए विरोध प्रदर्शन किया था. इसमें मुझ पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. बाद में इसे रद्द कर दिया गया. मैं जेल गया और वहां अधिकारियों को यह नहीं बताया कि मैंने 2018 में चुनाव लड़ा था, मुझे डर था कि मुझे पीटा जाएगा. मैंने संयम बनाए रखा और किसी तरह वहां अपना समय गुजारने में कामयाब रहा.

  • चुनाव प्रचार कैसे किया?

    मैंने आपको हमारी परंपरा नोतरा के बारे में बताया था. इसके जरिए लगभग 500 लोगों से 2.38 लाख रुपए एकत्रित किए. दान भी मांगा. किसी ने 5 रुपए दिए तो किसी ने 10 रुपए. इस तरह, 30 हजार रुपए आए. प्रचार में जब थक जाता था तो उसी गांव में सो जाता था. गांव के लोगों से खाना मांगता था और अगले दिन आगे बढ़ जाता था. पूरे अभियान के दौरान मैंने केवल 5-7 बार खाना खाया और यहां तक कि 4-5 बार ही नहा पाया. गांव के सभी युवा जो जयस के साथ थे, उन्होंने मेरे लिए काम किया.

  • रेप का मामला क्यों दर्ज हुआ?

    मेरी सगाई जिस लड़की से तय हुई थी उसके परिजन कांग्रेस से जुड़े थे. वे मेरे जयस के साथ काम करने के खिलाफ थे, इसलिए शादी टूट गई. बाद में मैंने दूसरी लड़की से शादी की तो उसने मुझ पर रेप का मामला दर्ज कर दिया. मैं जेल में रहा. लेकिन मेरी पत्नी ने पूरा साथ दिया. अग्रिम जमानत के लिए जब मैं इधर-उधर भाग रहा था. तब का एक वाक्या मुझे हिला देता है. जंगल में छिपा हुआ था. तब एक दिन मैंने अपनी पत्नी से कुछ सामान मंगाया. वह वहां आई. तभी यह अफवाह फैल गई कि पुलिस वहां है. मैं नदी में कूद गया. मेरी पत्नी भी बिना डरे मेरे साथ कूद गई.

  • चुनाव जीतने पर माता-पिता की क्या प्रतिक्रिया थी?

    मां ने कहा कि यह अच्छा है अब मुझे मजदूर के रूप में काम नहीं करना पड़ेगा. और पिता ने कहा कि जीत गए हो, इसलिए अब लोगों की सेवा करो.

  • राजनीति में आप क्या करना चाहते हैं?

    हमारी पार्टी का मुख्य उद्देश्य अलग भील राज्य की मांग है. मैं पेसा एक्ट, संविधान की अनुसूची 5 और आदिवासी अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए काम करूंगा.

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    एडवोकेट अरविन्द जैन

    संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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